स्मृति का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ प्रकार

स्मृति एक मानसिक प्रक्रिया है। जिसमें व्यक्ति धारण की गयी विषय वस्तु का पुन: स्मरण करने चेतना में लाकर उसका उपयोग करता है। व्यक्ति जो कुछ भी नित्य अनुभव करता है वह मस्तिष्क में किसी-न-किसी रूप में संचित होता रहता है। जो अनुभव मन के अचेतन स्तर पर रहते हैं या चेतनायुक्त नहीं होते उन्हें ‘संचय’ …

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अभिप्रेरणा का अर्थ, परिभाषा सिद्धांत, स्रोत, विधियां

प्राणी के व्यवहार को परिचालित करने वाली जन्मजात तथा अर्जित वृतिया को प्रेरक कहते है। यह वह अन्तवृति है जो प्राणी मेंं क्रिया उत्पन्न करती है और उस क्रिया को तब तक जारी रखती है जब तक उद्देश्य की पूर्ति नहीं जाती है। ‘Motivation’ शब्द लेटिन भाषा के ‘Movers’ का रूपान्तर है जिसका अर्थ है आगे …

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कार्य विवरण का अर्थ, परिभाषा, लाभ, विशेषताएँ

कार्य विवरण कार्य को प्रस्तुत करने की एक विशिष्ट प्रणाली होती है। यह कार्य का विस्तृत रूप दर्शाने की एक प्रत्यक्ष विधि है जिससे कर्मचारी को क्या करना है? इसका ज्ञान हो जाता है। इसे सरल ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रमापित प्रारूप होता है। इसकी सहायता से सन्दर्भ शीघ्र मिल जाता है। इससे शंकाओं …

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अस्तित्ववाद क्या है, अर्थ, परिभाषा, प्रमुख विशेषताएं

अस्तित्ववाद से क्या तात्पर्य है अस्तित्ववाद एक ऐसी विचारधारा है जो 19 वीं और 20 वीं शताब्दी के दौरान सामने आई। इसके मूल में आधुनिकता की यह दृष्टि निहित थी कि एक मनुष्य सोचता, विचारता, अनुभव करता, जीवन जीता वैयक्तिक (Individual) है। ज्याँ पाल सार्त्र के अनुसार मूलत: यह मानववाद है।  उनका कथन है कि, ‘‘ …

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साक्षात्कार क्या है? साक्षात्कार की परिभाषा

सामान्यत: दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा किसी विशेष उद्देश्य से आमने-सामने की गयी बातचीत को साक्षात्कार कहा जाता है। साक्षात्कार एक प्रकार की मौखिक प्रश्नावली है जिसमें हम किसी भी व्यक्ति के विचारों और प्रतिक्रियाओं को लिखने के बजाय उसके सम्मुख रहकर बातचीत करके प्राप्त करते हैं। साक्षात्कार एक आत्मनिष्ठ विधि है इसके माध्यम …

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रुचि का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, रुचि मापन की विधियां

हम अपने दैनिक जीवन में देखते हैं कि एक व्यक्ति यदि प्रोफेसर बनना चाहता है तो दूसरा डॉक्टर, इंजीनियर अथवा वकील बनना पसंद करता है। इसी प्रकार, विद्यालय में जहा प्रतीक को गणित, अनुभा को गृह विज्ञान, सोनल को संगीत, फराह को राजनीति शास्त्र पढ़ना अच्छा लगता है, वहीं सुशान्त हर समय पिक्चर की ही बातें …

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संवेगात्मक विकास का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएं

जीवन में संवेगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है तथा व्यक्ति के वैयक्तिक एवं सामाजिक विकास में संवेगों का योगदान होता है। लगातार संवेगात्मक असन्तुलन/अस्थिरता व्यक्ति के वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करती है तथा अनेक प्रकार की शारीरिक, मानसिक और समाजिक समस्याओं को उत्पन्न करती है। दूसरी ओर संवेगात्मक रूप से स्थिर व्यक्ति खुशहाल, स्वस्थ एवं …

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व्यवसायिक संप्रेषण क्या है? » Vyavasayik Sampreshan Kya Hai

संप्रेषण ही वह साधन है जिसके द्वारा व्यवहार को क्रियान्वित किया जाता है, परिवर्तनों को लागू किया जाता है, सूचनाओं को उत्पादक बनाया जाता है एवं व्यावसायिक लक्ष्यों को प्राप्त किया जाता है। संप्रेषण में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सूचनाओं का आदान-प्रदान शामिल होता है। आधुनिक संचार क्रान्ति के युग में समस्त व्यावसायिक उपक्रमों …

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आदर्शवाद का अर्थ, परिभाषा, सिद्धांत/ आदर्शवाद क्या है

आदर्शवाद पाश्चात्य दर्शन की प्राचीन विचारधारा है। ज्ञान की किरण भारत के बाद यदि कहीं पहले प्रस्फुटित हुई तो वह यूनान (ग्रीस) देश में। यूनान पाश्चात्य दर्शन की गुरुस्थली है। ईसा की कई शताब्दी पूर्व वहाँ तत्व ज्ञान का विकास होने लगा था। पश्चिमी जगत में यूनानी दार्शनिक थेल्स 640-550 ई. पू. सबसे पहले व्यक्ति थे …

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संप्रत्यात्मक विकास क्या है? बच्चों के प्रत्ययों की विशेषताएँ

सभी प्रकार के सीखने का आधार प्रत्यय है। शैशवावस्था से वृद्धावस्था तक मनुष्य अनेक नए प्रत्ययों का निर्माण करता है तथा प्रतिदिन के जीवन में पुराने निर्मित प्रत्ययों का प्रयोग करता है। व्यक्ति स्वयं आयु, अनुभव व बुद्धि के आधार पर प्रत्यय निर्माण के अलग-अलग स्तर पर होते है।  उदाहरणार्थ – एक चार साल के बच्चे …

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