आर्थिक संवृद्धि तथा आर्थिक विकास को कैसे मापा जाय ? मापदण्ड के रूप में क्या आधार चुना जाय?

आर्थिक संवृद्धि तथा आर्थिक विकास को कैसे मापा जाय ? मापदण्ड के रूप में क्या आधार चुना जाय? इसके सम्बन्ध में अर्थशास्त्रियों में मतभेद हैं। विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने इसको मापने के सम्बन्ध में अनेक मापदण्डों की चर्चा की है। वाणिकवादी अर्थशास्त्री किसी देश में सोने एवं चांदी की मात्रा को ही आर्थिक संवृद्धि का सूचक मानते …

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विकसित तथा अल्प विकसित देश में अंतर

मोटे तौर पर विश्व के देशों को दो भागों में बांटा जाता है – विकसित तथा अल्पविकसित अथवा धनी तथा निर्धन राष्ट्र। निर्धन देशों को कई नामों से पुकारा जाता है जैस निर्धन, पिछड़े, अल्प विकसित, अविकसित और विकासशील देश। वैसे तो यह सभी शब्द पर्यायवाची है परन्तु इनके प्रयोग में मतभेद रहा है।  उदाहरण के …

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आर्थिक विकास के निर्धारक तत्व

विश्व के समस्त देशों में आर्थिक वृद्धि हुई है परन्तु उनकी वृद्धि दरें एक दूसरे से भिन्न रहती हैं। वृद्धि दरों में असमानताएं उनकी विभिन्न आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, तकनीकी एवं अन्य स्थितियों के कारण पाई जाती है। यहीं स्थितियां आर्थिक वृद्धि के कारक हैं। परन्तु इन कारकों का निश्चित रूप से उल्लेख करना भी एक …

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रिकार्डो का आर्थिक विकास सिद्धांत

डेविड रिकार्डो के विकास सम्बन्धी विचार उनकी पुस्तक “The Principles of political Economy and Taxation” (1917) में जगह पर अव्यवस्थित रुप में व्यक्त किये गये। इनका विश्लेषण एक चक्करदार मार्ग है। यह सीमान्त और अतिरेक नियमों पर आधारित है। शुम्पीटर ने कहाँ रिकार्डो ने कोई सिद्धांत नही प्रतिपादित किया केवल स्मिथ द्वारा छोड़ी गयी कड़ियों को …

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शुम्पीटर का विकास प्रारूप / मॉडल

शुम्पीटर ऑस्टे्रलिया के मोराविया प्रान्त (जो आजकल जैकोस्लोवेकिया में है ) उम पैदा हुये थे उन्होने रूस ऑस्टे्रलिया, जर्मनी, कोलाम्बिया व अमेरिका के हावर्ड विश्वविद्यालयों में पढ़ाया उनके विकास के सिद्वान्तों को हम तीन पुस्तको से लेते है। :- The Theory of economic development – 1912 Business cycles (2 Volumes, 1939) Capitalism, socialism and democracy बेन्जामिन …

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लोक वित्त का अर्थ, परिभाषा, क्षेत्र, प्रकृति एवं महत्व

लोकवित्त अथवा राजस्व अर्थशास्त्र की वह शाखा है जो सरकार के आय-व्यय का अध्ययन करती है। राजस्व को लोकवित्त के पर्यायवाची शब्द के रूप में किया जाता है। राजस्व, संस्कृत भाषा का शब्द है जो दो अक्षरों-’राजन + स्व’ से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है।- ‘राजा का धन’। राजनैतिक दृष्टि से राजा को समाज …

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लोक वित्त का अर्थ, परिभाषा, क्षेत्र – Public Finance: Meaning, Definition

लोक वित्त की अवधारणा के अन्तर्गत लोक वित्त की परिभाषा, विचारधारा एवं सिद्धान्त आदि आते हैं । लोक वित्त की अवधारणा को और स्पष्ट करने हेतु सर्वप्रथम हमें इसके अर्थ के बारे में जानना होगा । परम्परागत् तौर पर लोक वित्त को राजस्व भी कहते हैं ,जिसका अर्थ है राजा का धन अर्थात् इसका तात्पर्य यह …

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लोक व्यय के उद्देश्यों का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है ?

लोक व्यय के आवंटन उद्देश्यों से हमारा तात्पर्य लोक व्यय की विभिन्न मदों पर व्यय की जाने वाली राशि से है जिसके द्वारा व्यक्तिगत कल्याण के स्थान पर सामाजिक कल्याण को अधिकतम किये जाने का प्रयास किया जाता है। जबकि वितरण के अन्तर्गत लोक व्यय से प्राप्त कल्याण के केन्द्रीयकरण के स्थान पर कल्याण के विकेन्द्रीकरण …

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लोक व्यय अर्थव्यवस्था के किन-किन क्षेत्रों को प्रभावित करता है?

इसमें आप लोक व्यय के अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों से परिचित हो सकेंगे। जिससे उत्पादन, बृद्धि, वितरण और स्थिरीकरण पर पड़ने वाले प्रभावों को शामिल किया गया है। लोक व्यय का उत्पादन पर अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। प्रत्यक्ष प्रभावों के साथ परोक्ष रूप से भी प्रभावित करता है। बृद्धि को तीव्र …

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कार्यात्मक वित्त का अर्थ, परिभाषा एवं उद्देश्य

कार्यात्मक वित्त शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अमेरिकी अर्थशास्त्री प्रो0 लर्नर ने किया था। परन्तु वित्त को कार्यात्मक बनाने का श्रेय कीन्स को जाता है। कीन्स द्वारा वित्त का उपयोग मन्दी एवं बेरोजगारी को दूर करने के लिये किया गया। जिन सामान्य उपकरणों की कीन्स ने चर्चा की, कार्यात्मक वित्त के अन्तर्गत सम्मिलित किया जाता है। कार्यात्मक …

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