मानवेन्द्र नाथ राय के राजनीतिक विचार

मानवेन्द्र नाथ राय के चिन्तन का विकास मानवेन्द्र नाथ राय का राजनीतिक चिन्तन अनेक उतार-चढ़ावों से परिपूर्ण है। अपने जीवन के प्रारम्भिक वर्षों में जब उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया तो वे एक क्रान्तिकारी स्वभाव के व्यक्ति थे। लेकिन अपने जीवन के अन्तिम पड़ाव में एक उदारवादी विचारक बन गए। लेकिन प्रारम्भ से …

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माओ त्से तुंग के सिद्धांत

माओ त्से-तुंग का जन्म मध्य चीन के दक्षिण स्थित हुनान प्रान्त के शाओ शान गांव में एक निर्धन किसान के घर 26 दिसम्बर 1893 को हुआ। उनके पिता का स्वभाव कठोर था, किन्तु उनकी माता दया की एक साक्षात मूर्ति थी। माओ बचपन से ही धुन के पक्के थे। वे हर कार्य लगन से करते थे। …

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अंतोनियो ग्राम्शी का जीवन परिचय, रचनाएं एवं राजनीतिक विचार

अंतोनियो ग्राम्शी का जीवन परिचय अंतोनियो ग्राम्शी (Antonio gramsci ) का जन्म 22 जनवरी, 1891 को इटली के सार्डिनिया प्रान्त के अलेस गांव में हुआ। उसकी मां का नाम ज्युसेपिना मर्सियस तथा पिता का नाम फ्रांसिस्को ग्राम्शी था। उसका पिता एक राजस्व अधिकारी था। 27 अक्टूबर 1900 को उसके पिता को उसके राजनीतिक विरोधियों द्वारा भ्रष्टाचार के …

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अरविन्द घोष के राजनीतिक विचार

अरविन्द घोष एक सच्चे राष्ट्रवादी थे। उनकी इच्छा थी कि भारत को अतिशीघ्र ही स्वतन्त्रता मिलनी चाहिए। उनके चिन्तन का मुख्य ध्येय अधिक व्यक्तियों के सुख की बजाय सभी का अधिकतम हित था। उन्होंने गीता, वेदों, उपनिषदों से ज्ञान प्राप्त करके ऐसी विधियों की खोज की जो भारत को स्वतन्त्रत कराने में अहम् भूमिका निभा सकती …

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महात्मा गांधी के राजनीतिक विचार / सिद्धांत

महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू भारतीय राजनीतिक चिन्तन में महात्मा गांधी का एक अति महत्वपूर्ण स्थान है। महात्मा गांधी का दर्शन बहुमुखी है। उन्होंने जीवन के हर क्षेत्र को स्पर्श किया है। यद्यपि उनके विचार प्लेटो, अरस्तु, हॉब्स व लॉक आदि राजनीतिक विचारकों की तरह क्रमबद्ध नहीं है, लेकिन फिर भी अनेक विद्वान उन्हें एक उच्चकोटि का …

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राजनीतिक सिद्धांत क्या है उसकी परिभाषा

राजनीतिक सिद्धांत राजनीतिक विज्ञान के मूल क्षेत्रों में से एक है। शैक्षणिक अनुशासन के रूप में राजनीतिक सिद्धांत बिलकुल हाल ही में उभर कर आया है। इससे पहले इस उद्यम में जो लोग शामिल थे, वे खुद को दार्शनिक अथवा वैज्ञानिक मानते थे। बौद्धिक परम्परा, जो कि तत्काल व्यावहारिक चिंता के क्षेत्र को बढ़ा देते हैं, …

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व्यवहारवाद का अर्थ, परिभाषा, कार्यक्षेत्र, आलोचना

व्यवहारवाद एक ऐसी विचारधारा, आन्दोलन, क्रान्ति या दृष्टिकोण है जिसने राजनीति शास्त्र को राजनीति का विज्ञान बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह एक ऐसा प्रतिरोध आन्दोलन है जिसका जन्म परम्परागत राजनीति शास्त्र की उपलब्धियों के प्रति असंतोष का परिणाम है और राजनीति शास्त्र को आनुभाविक (Empirical) बनाने के लिए प्रयासरत् है। इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी …

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उत्तर व्यवहारवाद का अर्थ, परिभाषा, उदय के कारण, विशेषताएं

उत्तर-व्यवहारवाद के प्रतिपादक भी व्यवहारवादी क्रान्ति के जनक डेविड ईस्टन ही हैं। डेविड ईस्टन ने व्यवहारवाद की रूढ़िवादिता, जड़ता और दिशाहीनता के कारण 1969 में इस क्रान्ति की घोषणा की। इसे नव-व्यवहारवाद भी कहा जाता है। व्यवहारवादी आन्दोलन जब अपनी सफलता की चरम सीमा पर था तो तभी विश्व समाज में अनेक सामाजिक और राजनीतिक संकटों …

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जॉन रॉल्स के न्याय के सिद्धांत का वर्णन | John Rawls’ theory of justice

जॉन रॉल्स का जन्म 21 फरवरी 1921 को अमेरिका में हुआ। जॉन रॉल्स की बचपन से ही सामाजिक समस्याओं को समझने में रुचि थी। जॉन रॉल्स एक विलक्षण प्रतिभा रखने वाले व्यक्ति थे। अपनी परिपक्व आयु में जॉन रॉल्स ने सामाजिक विषमताओं को समझकर अपने विचारों को पत्र-पत्रिकाओं में छपवाकर एक बुद्धिजीवी होने का परिचय दिया। …

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उदारवाद का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं सिद्धांत

उदारवाद शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘Liberalism’ का हिन्दी अनुवाद है। इसकी उत्पत्ति अंग्रेजी भाषा के शब्द ‘Liberty’ से हुई है। इस दृष्टि से यह स्वतन्त्रता से सम्बन्धित है। इस अर्थ में उदारवाद का अर्थ है ‘व्यक्ति की स्वतन्त्रता का सिद्धान्त।’ ‘Liberalism’ शब्द लेटिन भाषा के ‘Liberalis’ शब्द से भी सम्बन्धित माना जाता है। इस शब्द का …

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