तुलनात्मक राजनीति के विकास का अध्ययन अरस्तु से लेकर वर्तमान अवस्था तक

तुलनात्मक राजनीति केवल आधुनिक युग की देन नहीं है, बल्कि इसका गौरवपूर्ण अतीत है। तुलनात्मक राजनीति के विकास की गाथा अरस्तु से प्रारम्भ होती है। अरस्तु ने ही सर्वप्रथम 158 देशों के संविधानों का तुलनात्मक अध्ययन करके राज्य सम्बन्धी सिद्धान्तों की नींव रखी। अरस्तु के बाद अनेक विचारक सदैव यही बात सोचते रहे हैं कि कौन …

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संविधानवाद का अर्थ, परिभाषा, संविधानवाद की प्रमुख विशेषताएं

संविधानवाद का अर्थ है-उत्तरदायी व सीमित सरकार (Responsible and Limited Government)। इसके आधार हैं संविधान और संविधानिक सरकार। यद्यपि इनकी निश्चित परिभाषा देना कठिन है। उपरोक्त सभी परिभाषाएं पूर्ण नहीं हैं। समय और परिस्थितियों के अनुसार संविधानवाद का अर्थ बदल जाता है। लेकिन यह बात तो सत्य है कि संविधान (लिखित या अलिखित) तथा संवैधानिक सरकार …

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एकात्मक सरकार का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, गुण/ दोष

एकात्मक सरकार के अन्तर्गत शासन की सारी शक्तियां केन्द्रीय सरकार के पास ही केन्द्रित रहती हैं। सारे देश में एक कार्यपालिका, एक विधायिका व एक न्यायपालिका ही होती है। यद्यपि उनको केन्द्रीय सरकार द्वारा कोई महत्वपूर्ण शक्ति नहीं दी जाती। यदि कोई शक्ति दे भी जाती है तो वे केन्द्रीय सरकार के नियन्त्रण में ही कार्य …

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संघात्मक सरकार का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, गुण/दोष

संघात्मक शासन प्रणाली ऐसी प्रणाली होती है जिसमें शक्तियों का विभाजन केन्द्र व इकाइयों के मध्य संविधान या कानूनी सीमाओं के अन्तर्गत किया जाता है। अपने अपने क्षेत्रों में स्वतन्त्र होते हुए भी केन्द्र व इकाइयां देश के संविधान के प्रति उत्तरदायी होते हैं। एक दूसरे के अधीन न होकर भी केन्द्रीय व प्रादेशिक सरकारें एक …

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संसदीय सरकार का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं गुण एवं दोष

संसदीय सरकार को उत्तरदायी सरकार भी कहते हैं, इसमें कार्यपालक शक्तियां एक मन्त्रिमण्डल में निहित होती हैं, इसलिए मन्त्रिमण्डलात्मक सरकार भी कहा जाता है। संसदीय सरकार शासन की वह प्रणाली है जिसमें कार्यपालिका (मन्त्रिमण्डल) अपने कार्यों के लिए विधायिका (संसद) के प्रति उत्तरदायी होती है। इसलिए इसे उत्तरदायी सरकार भी कहा जाता है। इसमें कार्यपालिका अपने …

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अध्यक्षात्मक सरकार क्या है कौन सी सरकार अधिक उपयुक्त है संसदीय या अध्यक्षात्मक

अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली शक्तियों के पृथक्करण पर आधारित शासन प्रणाली है। इसमें कार्यपालिका और विधायिका में आपसी सम्बन्ध संसदीय शासन की तरह घनिष्ठ नहीं होते हैं। इसमें कार्यपालिका विधायिका के नियन्त्रण से मुक्त होती है और उसका कार्यकाल भी निश्चित होता है। उसे विधानमण्डल के समर्थन और सहयोग की कोई आवश्यकता नहीं होती। इसमें राष्ट्राध्यक्ष की …

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व्यवस्थापिका किसे कहते हैं व्यवस्थापिका के कार्य व भूमिका अलग-अलग देशों में अलग-अलग हैं।

किसी देश या राज्य के शासन को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार की आवश्यकता पड़ती है। सरकार ही वह यन्त्र होता है जो राज्य के उद्देश्यों या लक्ष्यों को अमली जामा पहनाता है। अपने उत्तरदायित्वों का वहन करने के लिए सरकार शासन कार्यों को अपने तीन अंगों में बाँटकर उन्हें पूरा करने का प्रबन्ध …

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न्यायपालिका किसे कहते हैं इसके क्या कार्य है?

न्यायपालिका सरकार का वह अंग है जिसका प्रमुख कार्य संविधान की व्याख्या करना तथा कानूनों को भंग करने वालों को दण्ड देना है। इस तरह कानूनों की व्याख्या करने व उनका उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को दण्डित करने की संस्थागत व्यवस्था को न्यायपालिका कहा जाता है।  न्यायपालिका सरकार का ऐसा अंग है जो सरकार की निरंकुशता …

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राजनीतिक संस्कृति का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, इसकी प्रमुख विशेषताएं

राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा, संस्कृति के विचार पर आधारित है। संस्कृति में किसी देश के लोगों के व्यवहार, मान्यताएं, विश्वास, घृणा, स्वामिभक्ति, साहित्य, परम्पराएं, कला-कौशल, सामाजिक मूल्य, नैतिकता आदि बातें शामिल होती हैं।  ग्राहम वालास के अनुसार-”संस्कृति विचारों, मूल्यों और उद्देश्यों का समूह है।” इसी तरह राजनीतिक विद्वानों ने राजनीतिक संस्कृति को राजनीतिक समाज के मूल्यों, …

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राजनीतिक समाजीकरण का अर्थ एवं प्रकृति को समझ लेने के बाद इसकी विशेषताएं

राजनीतिक समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा राजनीतिक संस्कृतियों को बनाए रखा जाता है और उनमें परिवर्तन भी किया जाता है। यह सीखने की वह प्रक्रिया है जिससे लोगों के राजनीतिक मूल्यों, विश्वासों और भावनाओं का निर्माण होता है। एक संकल्पना के रूप में यह लोगों के राजनीतिक मूल्यों, विश्वासों, अभिवृतियों व विचारों का समुच्यय है। …

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