मूल्य निर्धारण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं उद्देश्य

मूल्य निर्धारण का अर्थ किसी वस्तु या सेवा में मौद्रिक मूल्य निर्धारित करने से है। किन्तु विस्तृत अर्थ में, मूल्य निर्धारण वह कार्य एवं प्रक्रिया है। जिसे वस्तु के विक्रय से पूर्व निर्धारित किया जाता है एवं जिसके अन्तर्गत मूल्य निर्धारण के उद्देश्यों, मूल्य को प्रभावित करने वाले घटकों, वस्तु का मौद्रिक मूल्य, मूल्य नीतियों एवं …

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बट्टा किसे कहते हैं बट्टा के प्रकार?

ग्राहकों को अधिक क्रय हेतु प्रोत्साहित करने अथवा शीघ्र भुगतान के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से उनको कुछ छूटे प्रदान की जाती है जिन्हें बट्टा कहते है। बट्टा के प्रकार नगद बट्टा  परिमाण बट्टा व्यापारिक बट्टा गैर-मौसम बट्टा 1. नगद बट्टा – यह वह नीति है जिसमें विक्रेता ग्राहक को क्रय के समय या निर्धारित अवधि में …

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ई-कॉमर्स क्या है? | ई-कॉमर्स के प्रकार || What is an E-commerce in hindi

क्या कभी आपने इंटरनेट के माध्यम से कुछ सामान खरीदा है? या कुछ बेचा हो? अगर हाँ तो इसका मतलब आपने ई-कामर्स क्या इलेक्ट्रानिक वाणिज्य में भाग लिया है। ई-कामर्स एक ऐसी कार्यप्रणाली है जिसके द्वारा इंटरनेट का प्रयोग करते हुए सामान खरीदते तथा बेचते हैं। वाणिज्य का प्रयोग सदियों से वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीददारी …

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Trademark क्या है ट्रेडमार्क की प्रमुख परिभाषाएं

Trademark एक ब्राण्ड है जिसे वैधानिक संरक्षण प्राप्त होता है। जब किसी ब्राण्ड का सरकार में पंजीयन करा लिया जाता है तो वह ट्रेडमार्क बन जाता है, जैसे खजूर छाप डालडा घी, ए. सी. सी. ब्राण्ड सीमेण्ट, टिक्काछाप दियासलाई, ऊॅट छाप स्याही, बच्चे के हाथ में ब्रूस लिए हुए छाप एशियन पेण्ट्स। कभी-कभी ट्रेडमार्क ब्राण्ड नाम …

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Brand ब्रांड क्या है एक अच्छे ब्रांड में ये विशेषताएं होती है

Brand का मुख्य उद्देश्य एक पहचान निश्चित करना होता है। ब्रांड (Brand) कोई भी व्यापारिक चिन्ह है जिसके माध्यम से किसी उत्पाद को सही तरीके से पहचाना जाता है ब्रांड (Brand) में ऐसी कोई उपाय सम्मिलित है, जिससे उत्पाद की पहचान करवायी जाती है। इसमें वे शब्द, लेख या अंक सम्मिलित है, जिनका उच्चारण हो सकता …

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शिक्षा और विज्ञान

विज्ञान की अवधारणा एवं औचित्य विज्ञान एक चिन्तन की प्रविधि है, नवीन ज्ञान अर्जित करने की विधि है। ‘विज्ञान’ शब्द मे मूल शब्द ज्ञान और ‘वि’ उपसर्ग है इसका अभिप्राय है विशुद्ध ज्ञान, पूर्णतया जॉचा-परखा ज्ञान, तर्कसंगत ज्ञान। वर्तमान के प्रयोगवादी एवं यथार्थवादी युग में उस ज्ञान को प्रश्रय दिया जाने लगा जो कि वास्तविक जीवन …

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शिक्षा का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, कार्य, आवश्यकता एवं महत्व

शिक्षा का अंग्रेजी पर्यायवाची शब्द ’Education’ है। हमारा ’शिक्षा’ शब्द भी संस्कृत की शिक्षा धातु से निकला है जिसका अर्थ है, सीखना और सिखाना। शिक्षा में सीखने – सिखाने की क्रिया होती है। शिक्षा का अर्थ शिक्षा का शब्दिक अर्थ होता है सिखाना व आगे बढाना होता है, शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जो जीवन भर …

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शिक्षा दर्शन का अर्थ, परिभाषा, स्वरूप, कार्य, आवश्यकता

शिक्षा दर्शन दर्शन की वह शाखा है जिसमें मनुष्य और उसकी शिक्षा के स्वरूप की व्याख्या विभिन्न दार्शनिक मतों के आधार पर की जाती है और उसकी शिक्षा संबंधी समस्याओं के दार्शनिक हल प्रस्तुत किए जाते हैं। दर्शन का वह भाग जिसमें शिक्षा की समस्याओं का अध्ययन किया जाता है और उन समस्याओं का हल प्रस्तुत किया जाता है, …

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शिक्षा मनोविज्ञान के सम्प्रदाय और उनका क्रमबद्ध वर्णन

शिक्षा और मनोविज्ञान में घनिष्ठ सम्बन्ध है, इस विषय पर पूर्व अध्यायों में प्रकाश डाला गया है। मनोविज्ञान द्वारा हमें मानव-मस्तिष्क का ज्ञान होता है, अतः शिक्षा से इसका घनिष्ठ सम्बन्ध होना अनिवार्य है। मनोविज्ञान के क्षेत्र में व्यवहार की व्याख्या, मनोवैज्ञानिकों ने भिन्न-भिन्न ढंग से की है। शिक्षा-मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की एक व्यावहारिक शाखा है। शिक्षार्थी …

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सामाजिक विकास की परिभाषा और इसकी अवस्थाएं

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह दूसरों के व्यवहार को प्रभावित करता है और उसके व्यवहार से प्रभावित होता है। इस परस्पर व्यवहार के व्यवस्थापन पर ही सामाजिक संबंध निर्भर होते हैं। इस परस्पर व्यवहार में रुचियों, अभिवश्त्तियों, आदतों आदि का बड़ा महत्व है। सामाजिक विकास में इन सभी का विकास सम्मिलित है। जब सामाजिक परिस्थिति …

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