आंग्ल सिक्ख युद्ध के कारण, घटनाएँ एवं परिणाम

प्रथम आंग्ल-सिक्ख युद्ध (1845 ई.) के कारण 1. रानी झिन्दन की कूटनीति- रणजीतसिंह की मृत्यु के बाद सिक्ख सेना के अधिकारियों ने उत्तराधिकारी-युद्ध में और दरबार के षड्यंत्रो में अत्यन्त सक्रियता से भाग लिया। उनकी शक्ति और उच्छृंखलता इतनी बढ़ गयी थी कि शासन और राज परिवार के लागे उनसे आतंकित हो गये थे। उन्हें नियंत्रित करना …

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मराठों के पतन के प्रमुख कारण क्या थे?

मराठों के पतन के प्रमुख कारण मराठों के पतन के प्रमुख कारण क्या थे एकता का अभाव दृढ़ संगठन का अभाव योग्य नेतृत्व का अभाव दूरदर्शिता और कूटनीतिक अयोग्यता आदर्शो का त्याग दोषपूर्ण सैन्य संगठन कुप्रशासन और दूशित अर्थव्यव्स्था भारतीय राज्यो से शत्रुता अंग्रेजो की सार्वभौमिकता 1. एकता का अभाव- मराठों में एकता का सर्वदा से अभाव …

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प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध के कारण, घटनाएँ एवं परिणाम

प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध (1824-1826 ई.) के कारण युद्ध का वास्तविक कारण अंग्रेजों और साम्राज्यवादी तथा व्यापारिक आकांक्षाएँ थीं। इसके अतिरिक्त अन्य कारण भी थे – बंगाल और अराकान की सीमायें निर्धारित नहीं थी। बर्मियों द्वारा जीते हुए प्रदेश से लुटेरे भाग कर अंग्रेजी क्षेत्र में शरण लेते थे। बर्मी सरकार उनके समर्पण की माँग करती थी …

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1857 के विद्रोह का प्रारंभ, प्रसार, कारण, परिणाम, क्षेत्र

सन् 1757 ई. में प्लासी के युद्ध के बाद भारत में अंग्रेजी साम्राज्य की स्थापना हुई थी। इसके सौ वर्षों बाद 1857 ईस्वी तक ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपना अधिकार धीरे-धीरे व्यापार के माध्यम से शुरू किया किन्तु भारतीयों के आपस के झगड़ों का लाभ उठाकर मुट्ठी भर अंग्रेजों ने एक खुशहाल और समृद्धशाली देश को …

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स्थाई बंदोबस्त क्या था स्थाई बंदोबस्त को लागू करने के उद्देश्य

स्थाई बंदोबस्त क्या था? ब्रिटिश कंपनी (ईस्ट इण्डिया कंपनी) द्वारा बंगाल में 1793 ई. में इस्तमरारी स्थायी बंदोबस्त लागू किया। इस व्यवस्था के अंतर्गत कंपनी द्वारा निश्चित की गई राशि को प्रत्येक जमींदार द्वारा रैयतों से एकत्रित कर जमा करनी होती थी। गाँव से राजस्व एकत्रित करने का कार्य जमींदार द्वारा नियुक्त अधिकारी ‘अमला’ किया करता …

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रैयतवाड़ी व्यवस्था क्या है, रैयतवाड़ी व्यवस्था कब लागू की गई?

रैयतवाड़ी व्यवस्था 1792 ई. में मद्रास प्रेसीडेन्सी के बारामहल जिले में सर्वप्रथम लागू की गई। थॉमस मुनरो 1820 ई. से 1827 ई. के बीच मद्रास का गवर्नर रहा। रैयतवाड़ी व्यवस्था के प्रारंभिक प्रयोग के बाद कैप्टन मुनरो ने इसे 1820 ई. में संपूर्ण मद्रास में लागू कर दिया। इसके तहत कंपनी तथा रैयतों (किसानों) के बीच …

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संतुलित आहार का अर्थ, परिभाषा, प्रमुख घटक, महत्व

ऐसा आहार जिसमें वे सभी चीजें उचित मात्रा में मौजूद हों जो शरीर निर्वाह के लिए आवश्यक है। ऐसे ही भोजन से शरीर का भली-भाँति पोषण होता है। उससे पर्याप्त शक्ति और ताप की उपलब्धि होती है तथा स्वास्थ्य एवं आयु की वृद्धि होती है। संतुलित आहार में कार्बोज, वसा, प्रोटीन, खनिज लवण, जल तथा सभी प्रकार के विटामिन उचित मात्रा में होते हैं जिनसे शरीर …

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स्वस्थ व्यक्तियों पर मूत्र चिकित्सा का प्रभाव रोगी व्यक्तियों पर मूत्र चिकित्सा का प्रभाव

शाब्दिक रुप से देखने पर मूत्र चिकित्सा का अर्थ स्वत: ही स्पष्ट हो जाता है-’’ मूत्र द्वारा विविध रोगों की चिकित्सा करना मूत्र चिकित्सा कहलाता है। इसके अन्तर्गत प्रमुख रुप से स्वमूत्र एवं गौमूत्र द्वारा चिकित्सा करने का वर्णन आता है। मूत्र चिकित्सा को प्राचीन शास्त्रों में शिवाम्बु कल्प का नाम देते हुए कहा गया है …

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मूलानुपाती सूत्र और आणविक सूत्र क्या है मूलानुपाती सूत्र और अणु सूत्र में सबंध?

मूलानुपाती सूत्र या सरल सूत्र किसी यौगिक का वह सूत्र जो उस यौगिक के अणु में उपस्थित तत्वों के परमाणुओं की संख्याओं का सरलतम पारस्परिक अनुपात व्यक्त करता है, मूलानुपाती सूत्र या सरल सूत्र कहलाता है। लेकिन इस सूत्र सें यौगिक के अणु में उपस्थित तत्वों के परमाणुओं के वास्तविक संख्या का ज्ञान नहीं होता। 👉 उदाहरणार्थ- …

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मोल सिद्धांत क्या है?

परमाणु द्रव्यमान इकाई (Atomic mass unit or amu)- तत्वों के परमाणु द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए आजकल कार्बन (जिसका परमाणु-द्रव्यमान 12 होता है) परमाणु के द्रव्यमान के 12 वे भाग को इकाई मान लिया गया है। इसे परमाणु-द्रव्यमान इकाई कहते है। परमाणु द्रव्यमान इकाई के अनुसार परमाणु द्रव्यमान की परिभाषा इस प्रकार दी जाती है- किसी तत्व …

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