योगवशिष्ठ में योग का स्वरूप || योगवशिष्ठ में यम नियम निरूपण

योगवशिष्ठ में योग का स्वरूप  योग वशिष्ठ योग का एक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। अन्य योग ग्रन्थों की भाँति योग वशिष्ठ में भी योग के विभिन्न स्वरूप जैसे- चित्तवृत्ति, यम-स्वरूप, नियम-स्वरूप, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, ध्यान, समाधि, मोक्ष आदि का वर्णन वृहद् रूप में किया गया है। योग वशिष्ठ के निर्वाण-प्रकरण में वशिष्ठ मुनि श्री राम जी को …

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जैन दर्शन में योग का स्वरूप || जैन दर्शन में यम नियम निरुपण

जैन दर्शन में योग का स्वरूप  भारतवर्ष में जिस समय बौद्ध दर्शन का विकास हो रहा था उसी समय जैन दर्शन भी विकसित हो रहा था। दोनों दर्शन छठी शताब्दी में विकसित होने के कारण समकालीन दर्शन कहे जा सकते हैं। जैन मत के विकास और प्रचार का श्रेय अन्तिम तीर्थंकर महावीर को दिया जाता है। …

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सांख्य दर्शन क्या है सांख्य दर्शन ने कितने तत्व को माना है?

सांख्य दर्शन के अनुसार प्रकृति और पुरुष दो मूल तत्व हैं और प्रकृति की 23 विकृतियाँ हैं और इस प्रकार कुल 25 तत्व हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार तत्वों की संख्या बताने के कारण ही इस दर्शन को सांख्य दर्शन कहा जाता है। अन्य विद्वानों के अनुसार सांख्य का अर्थ है-विवेक ज्ञान, प्रकृति-पुरुष के भेद का …

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आयुर्वेद और योग (आयुर्वेद में योग के प्रकार, आयुर्वेद में वर्णित प्राणायाम)

आयुर्वेद और योग दोनों ही अत्यन्त प्राचीन विद्यायें हैं। दोनों का विकास और प्रयोग समान उद्देश्य के लिए एक ही काल में मनुष्य मात्र के दु:खों को दूर करने के लिए हुआ। आयुर्वेद का शाब्दिक अर्थ जीवन का विज्ञान है। इसे एक बहु उद्देश्यीय विज्ञान के रूप में विकसित किया गया है। योग के अनुसार पुरुषार्थ …

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अष्टांग योग क्या है अष्टांग योग कितने प्रकार के होते हैं?

अष्टांग योग महर्षि पतंजलि द्वारा रचित व प्रयोगात्मक सिद्धान्तों पर आधारित योग के परम लक्ष्य की प्राप्ति हेतु एक साधना पद्धति है।  महर्षि पतंजलि ने अपने योगसूत्र नामक ग्रंथ में तीन प्रकार की योग साधनाओं का वर्णन किया है।‘अष्टांग’ शब्द दो शब्दों के मेल से बना है अर्थात् अष्ट + अंग, जिसका अर्थ है आठ अंगों …

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आदि शंकराचार्य का जीवन परिचय || Aadi shankaracharya ka jivan parichay

आदि शंकराचार्य का जन्म केरल के कालरी गांव में सन् 684 ई. में हुआ था, उनके पिता का नाम शिवगुरू तथा माता का नाम सती था। शंकराचार्य ने बाल्यकाल से ही सन्यास ले लिया था और वेदान्त की शिक्षा प्राप्त करने के लिए वे महात्मा गोविन्दाचार्य के पास चले गए थे। शिक्षा प्राप्त करने के बाद …

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पतंजलि योगसूत्र का परिचय || पतंजलि योग सूत्र के चार अध्याय

योगसूत्र ग्रंथ महर्षि पतंजलि द्वारा रचित है। यह ग्रंथ सूत्रों के रूप में लिखा गया है। सूत्र-शैली भारत की प्राचीन दुर्लभ शैली है जिसमें विषय को बहुत संक्षिप्त शब्दों में प्रस्तुत किया जाता है। यह चार पादो में विभाजित है जिसमें 196 सूत्र निबद्ध है। इस ग्रंथ में महर्षि पतंजलि ने यथार्थ रूप में योग के आवश्यक आदर्शों …

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क्रिया योग क्यों किया जाये क्रियायोग का फल या क्रियायोग का उद्देश्य

क्रिया योग क्यों किया जाये इस प्रश्न का उत्तर महर्षि ने देते हुए कहा है- समाधिभावनार्थ: क्लेशतनूकरणार्थश्च क्रिया योग का अभ्यास क्लेशों को तनु करने के लिए एवं समाधि भूमि प्राप्त करने के लिये कहा जा रहा है। क्लेश- अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेश और अभिनिवेश हैं।  क्रिया योग के प्रकार क्रिया योग के तीन प्रकार महर्षि …

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आसन का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्व, उद्देश्य, विधि व लाभ

आसन का अर्थ है- यह शरीर और मन पर नियंत्रण हेतु विभिन्न शारीरिक मुद्राओं का अभ्यास। आसन शब्द कई अर्थों में प्रयुक्त होता है जैसे शरीर के द्वारा बनाये गये विशेष स्थिति, बैठने का विशेष तरीका, हाथी के शरीर का अगला भाग, घोडे़ का कन्धा आदि परन्तु हठयोग में आसन शब्द का अर्थ मन को स्थिर …

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प्राणायाम का अर्थ, परिभाषा, भेद और महत्व

प्राणायाम शब्द संस्कृत व्याकरण के दो शब्दों ‘प्राण’ और ‘आयाम’ से मिलकर बना है। संस्कृत में प्राण शब्द की व्युत्पत्ति ‘प्र’ उपसर्गपूर्वक ‘अन्’ धातु से हुई है। ‘अन’ धातु जीवनीशक्ति का वाचक है। इस प्रकार ‘प्राण’ शब्द का अर्थ चेतना शक्ति होता है। ‘आयाम’ शब्द का अर्थ है- नियमन करना। इस प्रकार बाह्य श्वांस के नियमन …

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