गांधीवाद क्या है गांधीवाद के प्रमुख सिद्धांत और आलोचना

महात्मा गांधी के विचारो को गांधीवाद कहा जाता है। गांधीवाद के सम्बन्ध मे सर्वप्रथम प्रश्न यह है कि क्या गांधीवाद नाम की कोई वस्तु है तो निश्चित रूप से गांधीवाद जैसी कोई वस्तु नही हे। क्योंकि गांधीजी ने राजनीति सम्बन्धी क्रमबद्ध सिद्धांत प्रस्तुत नही किया है और न किसी वाद का संस्थापन ही किया।  गांधी जी ने …

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मौलिक अधिकार क्या है और कितने हैं ?

वे अधिकार या व्यवस्थाएं जो व्यक्ति के जीवन के लिए मौलिक और अनिवार्य होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं मौलिक अधिकार कहलाते हैं। मौलिक अधिकार क्या है वे अधिकार या व्यवस्थाएं जो व्यक्ति के जीवन के लिए मौलिक और अनिवार्य होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं …

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संविधान के 11 मौलिक कर्तव्य कौन कौन से हैं?

‘‘यदि प्रत्येक व्यक्ति केवल अपने अधिकार का ही ध्यान रखे एवं दूसरों के प्रति कर्तव्यों का पालन न करें तो शीघ्र ही किसी के लिए भी अधिकार नहीं रहेंगे।’’ करने योग्य कार्य ‘कर्तव्य’ कहलाते है किसी भी समाज का मूल्यांकन करते हुए ध्यान केवल अधिकारों पर ही नहीं दिया जाता है वरन् यह भी देखा जाता …

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भारतीय संघवाद की विशेषताएं एवं स्वरूप

भारतीय संघवाद की विशेषताएं लिखित संविधान कठोर संविधान  शक्तियों का विभाजन  द्वैध शासन प्रणाली संविधान की सर्वोच्चता  उच्चतम न्यायालय की विशेष स्थिति  1. लिखित संविधान – किसी भी संघ का सबसे प्रमुख लक्षण होता है। कि उनके पास एक लिखित संविधान हो जिससे कि जरूरत पड़ने पर केन्द्र तथा राज्य सरकार मार्ग दर्शन प्राप्त कर सकें। भारतीय …

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संघीय सरकार (Federal Government) किसे कहते हैं

संघवाद के अंग्रेजी रूपांतर Federalism का विकास लेटिन भाषा के शब्द ‘फोइडस’ (Foedus) से हुआ है जिसका अर्थ है संधि अथवा समझौता। किसी भी संघीय व्यवस्था की स्थापना के लिए कुछ स्वतंत्र राज्य अपने-आपको अलग-अलग रखते हुए भी सामान्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक संघ के रूप में संयुक्त कर लेते है। ये राज्य अपने कुछ …

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स्थानीय स्वशासन का अर्थ, परिभाषा, प्रकार (पंचायती राज व्यवस्था)

स्थानीय स्वशासन का अर्थ स्थानीय संस्थाओं द्वारा संचालित वह शासन हे जिन्हें स्थानीय स्तर पर क्षेत्र की जनता द्वारा चुना जाता है। तथा इनको राष्ट्रीय सरकार के नियंत्रण में रहते हुए भी कुछ मामलों में अपनी स्वायत्तता, अधिकार तथा जिम्मेदारी प्राप्त हो जिसका उपयोग किसी सर्वोच्च अधिकारी के नियंत्रण के बिना अपने विवेक से कर सकें। …

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सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार और शक्तियों का वर्णन

संपूर्ण न्यायव्यवस्था तीन स्तरों में विभाजित है। सबसे ऊपर सर्वोच्च न्यायालय है, इसके नीचे उच्च न्यायालय तथा सबसे नीचे सत्र न्यायालय स्थापित है। सर्वोच्च न्यायालय कानून का सर्वोत्तम न्यायालय है। भारत का उच्चतम न्यायालय दिल्ली में स्थित है। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या अधिनियम 1985 के द्वारा वर्तमान में न्यायाधीशों की संख्या कुल 26 है …

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High Court – उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार व शक्तियाँ

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 के द्वारा भारतीय संघ के प्रत्येक राज्य के लिये एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था की गयी है। परंतु संविधान के अनुच्छेद 231 के अनुसार यदि संसद चाहे तो कानून के द्वारा दो या दो से अधिक राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्रों के लिये एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना कर सकती …

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अधीनस्थ न्यायालय किसे कहते हैं adhinasth nyayalaya kise kahate hain

उच्च न्यायालय के अंतर्गत एक प्रकार की क्रमबद्धता है। इसे संविधान में भी दर्शाया गया है जिन्हें हम अधीनस्थ न्यायालय कहते हैं। क्योंकि ये न्यायालय राज्य सरकार के कानूनों द्वारा बनाये गये है इसलिए इनका नाम एवं पद अलग-अलग राज्य में अलग-अलग है। लेकिन, इनके मूल ढाँचे में एकरूपता होती है। राज्य जिलों में विभाजित होता …

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जातिवाद का क्या अर्थ है जातिवाद को दूर करने के उपाय

जातिवाद एक जाति के हित के सम्मुख अन्य जातियों के सामान्य हितों की अनादर और हनन करने की प्रवृत्ति है। जातिवाद या जातीयता एक ही जाति के लोगों की वह भावना है। जो अपनी जाति विशेष के हितों की रक्षा के लिये अन्य जातियों के हितों की अवहेलना और उनका हनन करने के लिये प्रेरित करती …

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