राष्ट्रभाषा और राजभाषा किसे कहते हैं?

हिन्दी ग्यारहवीं सदी से ही अक्षुण्ण रूप से इस देश की राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित रही है, भले ही राजकीय प्रशासन के स्तर पर कभी संस्कृत, कभी फारसी और अंग्रजी की मान्यता रही हो, लेकिन समूचे राष्ट्र के जन-समुदाय के आपसी सम्पर्क, संवाद-संचार विचार-विमर्श, सांस्कृतिक ऐक्य और जीवन-व्यवहार का माध्यम हिन्दी ही रही। वस्तुतः आदिकाल …

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राजभाषा हिंदी संबंधी समितियां

राजभाषा हिंदी संबंधी समितियां हिन्दी सलाहकार समितियाँ  संसदीय राजभाषा समिति  केन्द्रीय राजभाषा  नगर राजभाषा  राजभाषा कार्यान्वयन समितियाँ 1. हिन्दी सलाहकार समितियाँ – भारत सरकार की राजभाषा नीति के सूचारू रूप से कार्यान्वयन के बारे में सलाह देने के उद्देश्य से विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में हिन्दी सलाहकार समितियों की व्यवस्था की गई। इस समितियों के अध्यक्ष सम्बन्धित मंत्री होते …

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Rajbhasha Niyam 1976/ राजभाषा नियम 1976 क्या है

राजभाषा नियम, 1976 सा. का. नि. 1052 केन्द्रीय सरकार -राजभाषा अधिनियम, 1963(1963 का 19) की धारा 3 की उपधारा (4) के साथ पठित धारा 8 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित नियम बनाती है इन नियमों का संक्षिप्त नाम राजभाषा (संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग) नियम, 1976 है। इनका विस्तार, …

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प्रबंधकीय प्रतिवेदन का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, सिद्धान्त

प्रबंध हेतु प्रतिवेदन या प्रबंधकीय प्रतिवेदन प्रणाली प्रबंधकीय लेखाविधि का एक महत्वपूर्ण अंग है। किसी भी संस्था से सम्बन्धित सभी अधिकारियों के समक्ष भिन्न-भिन्न प्रकार की सूचनाओं को प्रस्तुत किया जाता है जिनके आधार पर ही वे उचित व सही निर्णय लेते हैं और नीति निर्धारण करते हैं। यह कार्य प्रतिवेदनों एवं अन्य विवरण पत्रों के …

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लाभांश नीति का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, उद्देश्य, एक सुदृढ़ लाभांश नीति के आवश्यक तत्व

लाभांश नीति का अर्थ है कि वितरण और बकाया कोष रखने के लिए एक नियमित पहुंच को अपनाना कि वर्ष दर वर्ष किसी अस्था्ई निर्णय को लेना। यह लाभांश की अदायगी के समय और मूल्य पर भी ध्यान देती है । उपयुक्त लाभांश नीति बनाना प्रबन्ध् के लिए बड़ा सोच विचार का कार्य है क्योंकि इससे …

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व्यक्ति अध्ययन विधि की प्रकृति, व्यक्ति-अध्ययन के गुण एवं दोष #शिक्षा मनोविज्ञान

व्यक्ति अध्ययन विधि एक ऐसी विधि है जिसमें किसी सामाजिक इकाई के जीवन की घटनाओं का अन्वेषण तथा विश्लेषण किया जाता है। सामाजिक इकाई के रूप में किसी एक व्यक्ति, एक परिवार, एक संस्था, एक समुदाय आदि के बारे में अध्ययन किया जा सकता है। व्यक्ति-अध्ययन का उद्देश्य वर्तमान को समझना, उन भूतकालीन घटनाओं का पहचानना …

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उपचारात्मक आहार क्या है आहार संशोधन करते समय ध्यान रखने योग्य बाते?

वह आहार जो रूग्णावस्था में किसी व्यक्ति को दिया जाता है। ताकि वह जल्दी सामान्य हो सके यह सामान्य भोजन का संशोधित रूप होता है। उपचारात्मक आहार कहते है। क्योंकि बीमार पड़ने पर व्यक्ति के शरीर को कोई भाग रोग ग्रसित हो जाता है। जिससे उसकी पोषण आवश्यकता में परिवर्तन आ जाता है। जैसे मधुमेह में …

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भोज्य ग्राहिता क्या है भोज्य पदार्थों का ग्रहण करना या स्वीकारना इन बातों पर निर्भर करता है

भोज्य ग्राहिता क्या है? ‘‘किसी भी भोज्य पदार्थ को बिना चखे उसके रंग, रूप, बनावट, सुगंध के द्वारा ही उसके स्वाद को निर्धारित कर लेते है तथा उसे ग्रहण करने की स्वीकृति प्रदान कर देते है। यही गुण भोज्य ग्राहिता कहलाता है।’’ किसी व्यक्ति द्वारा भोज्य पदार्थो का ग्रहण करना या स्वीकारना निम्न बातों पर निर्भर …

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भोज्य विषाक्तता क्या है भोज्य विषाक्तता दो कारणों से पायी जाती है –

सामान्य तौर पर भोजन करने के पश्चात व्यक्ति अच्छा अनुभव करता है। उसे संतुष्टि प्राप्त होती है। किन्तु कभी-कभी कई कारणों से भोजन प्रदूषित हो जाता है। जिससे उसे ग्रहण करने के पश्चात व्यक्ति अस्वस्थ महसूस करता है भोजन का दूषित होना ही भोज्य विषाक्तता का कारण बनता है। ‘‘व्यक्ति द्वारा भोजन ग्रहण करने के तुरन्त …

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वर्ज्य पदार्थ क्या है इसकी अधिक मात्रा उपयोग करने पर हानिकारक प्रभाव

हमारे समाज में कुछ ऐसे पदार्थों का प्रचलन है। जो कि व्यक्ति के स्वस्थ के लिए अत्यधिक हानिकारक होते है। इन्हें वर्ज्य पदार्थ या निषिद्ध भोज्य पदार्थ कहते है। जैसे- मदिरा धूम्रपान तम्बाकू अफीम चरस आदि। 1. मदिरा – ये गेहूँ, जौ, चावल, अंगूर आदि के सड़ने के उपरान्त बनायी जाती है। इसमें हानीकारक पदार्थ एल्कोहल …

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