श्रम का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं विशेषताएँ

शारीरिक या मानसिक रुप से किया गया कोई भी कार्य श्रम ही है, जिसके बदले में मजदूरी की प्राप्ति होती है। यदि कोई प्राणी अगर किसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मानसिक या शारीरिक कार्य किया जाता है, तो वह श्रम कहलाता हैं।  श्रम की परिभाषा थामस के अनुसार :- “श्रम से मानव के उन सभी …

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श्रम-कल्याण क्या है ? इसकी क्या विशेषताएं हैं ? इसकी आवश्यकता क्यों है ?

कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों के कल्याण, उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न पहलुओं को नियमित करने का दायित्व सरकार अपने ऊपर लेती है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने के लिए भारत सरकार ने कारखाना अधिनियम, 1948 (Factory Act, 1948) प्रतिपादित किया। इसका उद्देश्य श्रमिकों को औद्योगिक और व्यावसायिक खतरों …

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श्रम कल्याण के सिद्धांत

कोई भी श्रम कल्याण सम्बन्धी योजना अथवा कार्यक्रम तब तक प्रभावपूर्ण रूप से नही बनाया जा सकता जब तक कि समाज के नीति निर्धारक श्रम कल्याण की आवश्यकता को स्वीकार करते हुये इसके सम्बन्ध में उपयुक्त नीति बनाते हुए अपने इरादे की स्पष्ट घोषणा न करें और इसे कार्यान्वित कराने की दृष्टि से राज्य का समुचित …

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श्रमिक शिक्षा क्या है भारत में श्रमिक शिक्षा के उद्देश्य ?

श्रमिक शिक्षा पर विचार देश में प्रचलित शिक्षा के सन्दर्भ में किया जाता है, किन्तु स्कूल व कॉलेजों में दी जाने वाली शिक्षा और श्रमिक शिक्षा में एक आवश्यक अन्तर यह है कि जब पहले की तरह शिक्षा शैक्षिक सिद्धान्तों और व्यवहारों से जो हमें आज तक विरासत में मिले हैं, सम्बन्धित है, श्रमिक शिक्षा श्रमिकों …

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मजदूरी एवं वेतन का अर्थ, परिभाषा, लक्षण अथवा विशेषताएं

मजदूरी – मजदूरी से आशय उस भुगतान से है जो कर्मचारियों को कार्य के पारिश्रमिक के रूप में दिया जाता है। जो साप्ताहिक, पाक्षिक या मासिक होता है। मजदूरी की राशि में अन्तर कार्य के घण्टों में परिवर्तन के अनुरूप होता है। मजदूरी प्राप्त करने वाले व्यक्तियों की श्रेणी में सामान्यतः कारखानों में कार्य करने वाले …

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सामाजिक सुरक्षा से आप क्या समझते हैं भारत में सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता ?

‘सामाजिक सुरक्षा’ शब्द का उद्गम औपचारिक रूप से सन् 1935 से माना जाता है, जबकि प्रथम बार अमरीका में सामाजिक सुरक्षा अधिनियम पारित किया गया। इसी वर्ष बेरोजगारी, बीमारी तथा वृद्धावस्था बीमा की समस्या का समाधान करने के लिए सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन किया गया। तीन वर्ष बाद सन् 1938 में ‘सामाजिक सुरक्षा’ शब्द का …

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श्रम विधान का अर्थ, उद्देश्य, महत्त्वपूर्ण सिद्धांत

श्रम विधान सामाजिक विधान का ही एक अंग है। श्रमिक समाज के विशिष्ट समूह होते हैं। इस कारण श्रमिकों के लिये बनाये गये विधान सामाजिक विधान की एक अलग श्रेणी में आते हैं।  औद्योगिक के प्रसार, मजदूरी अर्जकों के स्थायी वर्ग में वृद्धि, विभिन्न देशों के आर्थिक एवं सामाजिक जीवन में श्रमिकों के बढ़ते हुये महत्व …

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मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936 क्या है?

मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936 प्रारंभ में यह अधिनियम कारखानों और रेलवे-प्रशासन में काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों के साथ लागू था, जिनकी मजदूरी 200 रुपये प्रतिमाह से अधिक नहीं थी। बाद में इसे कई अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों तथा नियोजनों में लागू किया गया। इनमें मुख्य हैं –  ट्राम पथ सेवा या मोटर परिवहन-सेवा,  संघ की सेना …

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कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम 1923 क्या है?

कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम 1923 क्या है? i. अस्थायी आंशिक अशक्तता- अस्थायी आंशिक अशक्तता वह अशक्तता है, जिससे कर्मकार की उस नियोजन में उपार्जन क्षमता अस्थायी अवधि के लिए कम हो जाती है, जिसमें वह दुर्घटना के समय लगा हुआ था। ii. स्थायी आंशिक अशक्तता – स्थायी आंशिक अशक्तता वह अशक्तता है, जिससे कर्मकार की हर ऐसे …

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कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 कुछ महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 कुछ महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ  समुचित सरकार- केन्द्रीय सरकार या रेलवे-प्रशासन के नियंत्रण में प्रतिष्ठानों, महापत्तनों, खानों या तेलक्षेत्रों के संबंध में समुचित सरकार केन्द्रीय सरकार तथा सभी प्रतिष्ठानों के संबंध में समुचित सरकार राज्य सरकार है। कर्मचारी- ‘कर्मचारी’ का अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है, जो अधिनियम के अधीन आने वाले किसी कारखाना या …

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