मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936

प्रारंभ में यह अधिनियम कारखानों और रेलवे-प्रशासन में काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों के साथ लागू था, जिनकी मजदूरी 200 रुपये प्रतिमाह से अधिक नही थी। बाद में इसे कर्इ अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों तथा नियोजनों में लागू किया गया। इनमें मुख्य हैं –(1) ट्राम पथ सेवा या मोटर परिवहन-सेवा,(2) संघ की सेना या वायुसेना या भारत …

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सामाजिक शोध का अर्थ, उद्देश्य एवं चरण

सामाजिक शोध के अर्थ को समझने के पूर्व हमें शोध के अर्थ को समझना आवश्यक है। मनुष्य स्वभावत: एक जिज्ञाशील प्राणी है। अपनी जिज्ञाशील प्रकृति के कारण वह समाज वह प्रकृति में घटित विभिन्न घटनाओं के सम्बन्ध में विविध प्रश्नों को खड़ा करता है। और स्वयं उन प्रश्नों के उत्तर ढूढने का प्रयत्न भी करता है। …

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जनतंत्र का अर्थ, परिभाषा एवं उद्देश्य

आधुनिक युग जनतंत्र व्यवस्था का युग है। जनतांत्रिक शासन व्यवस्था सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। वर्तमान जनतंत्र साम्राज्यवादी प्रशासन के पश्चात् आया जबकि सम्पूर्ण विश्व औद्योगिक एवं भूमण्डलीकरण के प्रभाव में आया तो मनुष्य के अस्तित्व व अधिकारों में सर्वोच्चता आयी और विभिन्न देशों ने जनतंत्र शासन व्यवस्था को सहृदय होकर स्वीकारा। वैसे यह भी सत्य है …

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राज्य के नीति निर्देशन तत्व

‘‘राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों का उद्देश्य जनता के कल्याण को प्रोत्साहित करने वाली सामाजिक अवस्था का निर्माण करना है।’’ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के अनुसार – ‘‘राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों का पालन करके भारत की भूमि को स्वर्ग बनाया जा सकता है।’’  एम. सी. छागला के अनुसार – भारतीय संविधान का लक्ष्य न केवल राजनीतिक प्रजातन्त की …

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सामुदायिक विकास का अर्थ, परिभाषा

शाब्दिक रूप से सामुदायिक विकास का अर्थ- समुदाय का विकास या प्रगति। इसके पश्चात भी सामुदायिक विकास की अवधारणा इतनी व्यापक और जटिल है कि इसे केवल परिभाषा द्वारा ही स्पष्ट कर सकना बहुत कठिन है। जो परिभाषा दी गयी है, उनमें किसी के द्वारा एक पहलू पर अधिक जोर दिया गया है और किसी में …

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श्री बगलामुखी स्तोत्रं

विनियोग:- ॐ अस्य श्री बगलामुखी-स्तोत्रस्य भगवान नारद ऋषिः, बगलामुखी देवता, मम सन्निहितानामादुष्टानां विरोधिनाम वंग मुख- पद-जिव्हा बुद्धिना स्तंभनार्थे श्री बगलामुखी प्रसाद सिध्यर्थे पत्थे विनियोगः कर – न्यास:ॐ ह्लीं अंगुष्ठाभ्यं नमः.ॐ बगलामुखी तर्जनीभ्यां नमः.ॐ सर्व दुष्टानां मध्यमाभ्यां वषट्.ॐ वाचां मुखं पदं स्तम्भय अनामिकाभ्यां हूंॐ जिव्हां कीलय कनिष्ठिकाभ्यां वौषट.ॐ बुद्धिम विनाशय ह्लीं ॐ स्वः करतल कर पृष्ठाभ्यां नमः हृदयादि-न्यास: …

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स्वतंत्रता का अर्थ

व्यक्ति या कोर्इ भी सजीव प्राणी जीवन मेंं जो भी करता है या सोचता है उसमें अपनी इच्छा को ही प्रमुख मानता है। व्यक्ति अपनी इच्छा को किसी के अधीन नहीं रखना चाहता है और अपनी स्वतंत्र क्रियाओं में बाधा उसकी मनोवृत्ति एवं उपलब्धि को प्रभावित करती है और मनुष्य की स्वतंत्रता उसकी मनोवृत्ति से सम्बंधित …

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भारतीय संविधान की प्रस्तावना एवं विशेषताएं

‘‘प्रस्तावना भारतीय संविधान का सबसे बहुमूल्य अंग है, यह संविधान की आत्मा है, यह संविधान की कुंजी है यह वह उचित मापदण्ड है, जिसमें संविधान की सहजता नापी जाती है, यह स्वयं में पूर्ण है। हम चाहेंगे कि संविधान के सभी उपबन्धों को इसी प्रस्तावना की कसौटी से जांचना चाहिए और तभी यह निर्णय करना चाहिए …

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महिलाओं से संबंधित कानून

महिलाओं से संबंधित कानून 1. मातृत्व लाभ अधिनियम (1961) – यह अधिनियम पूरे भारत वर्ष में महिला कर्मचारियों पर लागू होता है। यह अधिनिमय अधिकतम 12 सप्ताह का अवकाश उन महिलाओं को प्रदान करता है जो मातृत्व सुख प्राप्त करती है। यह लाभ प्राप्त करने वाली महिला माँ बनने के दिन के ठीक पहले 6 सप्ताह तथा …

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संप्रत्यात्मक विकास क्या है ?

सभी प्रकार के सीखने का आधार प्रत्यय है। शैशवावस्था से वृद्धावस्था तक मनुष्य अनेक नए प्रत्ययों का निर्माण करता है तथा प्रतिदिन के जीवन में पुराने निर्मित प्रत्ययों का प्रयोग करता है। व्यक्ति स्वयं आयु, अनुभव व बुद्धि के आधार पर प्रत्यय निर्माण के अलग-अलग स्तर पर होते है। उदाहरणार्थ – एक चार साल के बच्चे …

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