बाल्यावस्था में शारीरिक विकास

छ: वर्ष की आयु से लेकर बारह वर्ष की आयु तक की अवधि बाल्यावस्था कहलाती है। बाल्यावस्था के प्रथम तीन वर्षो के दौरान अर्थात 6 से 9 वर्ष की आयु तक शारीरिक विकास तीव्र गति से होता है। बाद में शारीरिक विकास की गति कुछ धीमी हो जाती है। बाल्यावस्था में होने वाले शारीरिक विकास से …

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विशिष्ट बालकों की शिक्षा

विशिष्ट बालक का अर्थ – विशिष्ट बालको को जानने से पूर्व यह जानना आवश्यक है कि सामान्य बालक किसे कहते है। विद्यालय में हर समाज, हर वर्ग तथा भिन्न-भिन्न परिवारो से बालक आते है ये सभी विभिन्न होते हुये भी सामान्य कहलाते है। परन्तु कुछ ऐसे भी होते है तो शारीरिक, मानसिक, शैक्षिक एवं सामाजिक गुणो …

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शैशवावस्था में शारीरिक विकास

सामान्यता: मनोवैज्ञानिकों ने शैशवावस्था का अर्थ उस अवस्था से लगाया जो औसतन जन्म से 5-6 वर्ष तक चलती है। एडलर के अनुसार “शैशवावस्था द्वारा जीवन का पूरा क्रम नििश्न्चत होता है। शैशवावस्था में विशेषकर जन्म से 3 वर्ष तक की आयु होने के दौरान शारीरिक विकास की गति अत्यंत तीव्र रहती है। शैशवावस्था में होने वाले …

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जन्म पूर्व शारीरिक विकास

ज्यों ही अण्ड शुक्राणु से मिलकर निशेचित होता है, त्यों ही मानव जीवन का प्रारम्भ हो जाता है। निशेचित अण्ड सर्वप्रथम दो कोषों में विभाजित होता है, जिसमे से प्रत्येक कोष पुन: दो-दो में विभाजित हो जाते हैं। कोष विभाजन की यह प्रक्रिया अत्यंत तीव्र गति से चलने लगती है। इनमें ये कुछ कोष प्रजनन कोष …

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राष्ट्रीय आय की अवधारणा

राष्ट्रीय आय की सही जानकारी तब तक सम्भव नहीं हो सकती जब तक कि राष्ट्रीय आय से सम्बिन्ध्त कुछ महत्वपूर्ण अवधारणाओं क समुचित अध्ययन कर लिया जाय। राष्ट्रीय आय के विशेषज्ञों ने अर्थव्यवस्था की समस्त आय के विषय में छ: मुख्य अवधारणायें (Concepts) प्रस्तुत की हैं ये हैं सकल राष्ट्रीय उत्पाद (Gross National Product i.e. GNP) …

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लागत-लाभ विश्लेषण विधि का महत्व

सिंचार्इ तथा परिवहन परियोजनाओं में निवेश के मूल्यांकन के लिये लागत-लाभ विश्लेषण तकनीक का विकास अमरीका में किया गया। अल्पविकसित देशों में परियोजनायें अक्सर तदर्थ (Adhoc) आधार पर चुनी जानी है तथा लागतों और लाभों के रूप में उनके मूल्यांकन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है। क्योंकि सभी परियोजनायें विकास के उद्देश्य से सम्बद्ध होती …

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सामाजिक लागत-लाभ विश्लेषण का अर्थ

सामाजिक दृष्टिकोण से परियोजनाओं (Projects) के मूल्यांकन के लिये लागत-लाभ विश्लेषण सबसे उपयुक्त तथा सर्वमान्य तरीका है। यह विश्लेषण परियोजना मूल्यांकन के लिये सर्वाधिक वैज्ञानिक एवं उपयोगी कसौटी भी है। यह योजना प्राधिकरण के लिये इस बात में सहायक है कि वह परियोजनाओं के लाभों और लागतों के वर्तमान मूल्यों के बीच के अन्तर को अधिकतम …

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स्मरण का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं एवं स्मृति प्रभावक तत्व

स्मरण एक मानसिक प्रक्रिया है। जिसमें व्यक्ति धारण की गयी विषय वस्तु का पुन: स्मरण करने चेतना में लाकर उसका उपयोग करता है। किसी विषय वस्तु के धारण के लिए सर्वप्रथम विषय वस्तु का सीखना आवश्यक है। अधिगम के बिना धारण करना असम्भव है। अधिगम के फलस्वरूप प्राणी में कुछ संरचनात्मक परिवर्तन होते हैं जिन्हें स्मृति …

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औषधि और चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम, 1954

भारत में यद्यपि आज शिक्षा का प्रचार प्रसार बहुत हो चुका है और शिक्षा की दर (Literacy rate) भी बढ़ गया है किन्तु इसके बावजूद अवैज्ञानिक उपचार, तंत्र-मंत्र, जादू-टोने इत्यादि के प्रति लोगों में अन्धविश्वास की कमी नहीं है। ऐसे में लोग तमाम लार्इलाज रोगों के उपचार के लिये ऐसे उपायों पर आसानी से विश्वास कर …

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सन्तुलित आहार की परिभाषा

‘‘यह आहार सन्तुलित होता है। जिसमें सभी आहार वर्ग जैसे ऊर्जा देने वाला आहार, शरीर संवर्धन करने वाला आहार और सुरक्षातमक आहार उचित परिणाम में हों। जिससे कि व्यक्ति को सभी पोषक तत्व न्यूनतम मात्रा में प्राप्त हो जाये।’’ C.Gopalan सन्तुलित आहार वह है जो विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थों को ऐसी मात्रा एवं अनुपात में …

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