जैन धर्म की उत्पत्ति एवं सिद्धान्त
वैदिक काल के अन्तिम चरण में हमें जटिल और महंगे कर्मकाण्ड, पशु-बलि, ब्राम्हणों की सर्वोच्चता और वर्ण व्यवस्था द्वारा समाज में, पैदा किये गये भेद-भाव के प्रति उग्र प्रतिक्रिया दिखार्इ पड़ती है । धार्मिक सुधार का यह बिलकुल सही अवसर था । र्इसा पूर्व छठी शताब्दी के दौरान वैदिक धर्म की औपचारिक और कर्मकाण्ड की व्यवस्थाओं …