ज्ञानयोग क्या है ?

यदि हम इस तथ्य पर विचार करें कि यह ज्ञानयोग वस्तुत: है क्या? तो हम कह सकते हैं कि यह ध्यानात्मक सफलता की एक ऐसी प्रक्रिया है, जो हमे अपनी आन्तरिक प्रकृति के अत्यधिक पास लाकर हमारी आत्मिक ऊर्जा का हमें भान कराती है अर्थात स्वयं में छिपी हुर्इ अनंत संभावनाओं का साक्षात्कार कर ब्रह्मा में …

Read more

आधुनिक युग का प्रारंभ

पंद्रहवीं सदी के उत्तरार्ध और सोलहवीं सदी के पूर्वार्द्ध से यूरोप में आधुनिक युग का प्रारंभ होता है। इस काल के बाद यूरोप में महत्वपूर्ण और युगांतरकारी घटनाएं हुर्इ। मध्ययुग में यूरोप में जीवन का मूल आधार था – धर्म का प्रभुत्व और अपरिवर्तनशीलता, पर आधुनिक युग में जीवन का मूलतंत्र हो गया- स्पंदन, चैतन्यता, विकास …

Read more

एडलर का व्यक्तित्व सिद्धांत

एडलर का व्यक्तित्व सिद्धान्त ‘‘नवमनी विश्लेषणात्मक उपागम’’ पर आधारित है। एडलर यद्यपि फ्रायड के काफी नजदीक थे, किन्तु वे व्यक्तित्व के सम्बन्ध में फ्रायड के कुछ विचारों से सहमत नहीं थे। इसलिये उन्होंने फ्रायड से पृथक होकर एक नये व्यक्तित्व सिद्धान्त को जन्म दिया, जिसका नाम रखा – ‘‘वैयक्तित्व मनोविज्ञान का सिद्धान्त’’ इस सिद्धान्त की खास …

Read more

भक्तियोग क्या है ?

जिज्ञासु पाठको भक्ति शब्द से आप निश्चित परिचित होंगे। आपने-अपने घर के मन्दिर में, उपासना गृहों में तीर्थो में, लोगों को पूजा पाठ करते देखा होगा। भारतीय चिन्तन में ज्ञान तथा कर्म के साथ भक्ति को कैवल्य प्राप्ति का साधन माना है। आपको कुछ प्रश्न अवश्य उत्तर जानने के लिए प्रेरित कर रहे होंगे जैसे भक्ति …

Read more

सामंतवाद क्या था ? इसके पतन के कारण

सामंतवाद एक ऐसी मध्ययुगीन प्रशासकीय प्रणाली और सामाजिक व्यवस्था थी, जिसमें स्थानीय शासक उन शक्तियों और अधिकारों का उपयागे करते थे जो सम्राट, राजा अथवा किसी केन्द्रीय शक्ति को प्राप्त होते हैं। सामाजिक दृष्टि से समाज प्रमुखतया दो वर्गों में विभक्त था- सत्त्ाा ओर अधिकारों से युक्त राजा और उसके सामंत तथा अधिकारों से वंचित कृशक …

Read more

फ्रायड का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त

मनोविज्ञान के क्षेत्र में सिगमण्ड फ्रायड के नाम से प्राय: सभी लोग परिचित है। फ्रायड ने व्यक्तित्व के जिस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया, उसे व्यक्तित्व का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त कहा जाता है। फ्रायड का यह सिद्धान्त उनके लगभग 40 साल के वैदानिक अनुभवों पर आधारित है। क्या आप जानते हैं कि व्यक्तित्व का अध्ययन करने वाला सर्वप्रथम …

Read more

कर्मयोग क्या है ?

कर्म शब्द कृ धातु से बनता है। कृ धातु में ‘मन’ प्रत्यय लगने से कर्म शब्द की उत्पत्ति होती है। कर्म का अर्थ है क्रिया, व्यापार, भाग्य आदि। हम कह सकते हैं कि जिस कर्म में कर्ता की क्रिया का फल निहित होता है वही कर्म है। कर्म करना मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। तथा कर्म …

Read more

हड़प्पा सभ्यता का उद्भव, विस्तार, नगर-योजना

हड़प्पा सभ्यता का उद्भव हड़प्पा सभ्यता के उद्भव सम्बन्धी मतों में भिन्नता का कारण है कि इस सभ्यता के अवशेष जहाँ कहीं भी मिले हैं। अपनी पूर्ण विकसित अवस्था में मिले हैं। सुमेरियन से उद्भव का मत – सर जॉन मार्शल, गार्डन चाइल्ड, सर मार्टीमी ह्वीलर आदि पुराविदों का कहना है कि हड़प्पा सभ्यता का उद्भव …

Read more

मोक्ष क्या है ?

मोक्ष का सामान्य अर्थ दुखों का विनाश है। दुखों के आत्यन्तिक निवृत्ति को ही मोक्ष या कैवल्य कहते हैं। प्राय: सभी भारतीय दर्शन यह मानते हैं कि संसार दुखमय है। दुखों से भरा हुआ है। किन्तु ये दुख अनायास नहीं है, इन दुखों का कारण है। उस कारण को समाप्त करके हम सभी प्रकार के दुखों …

Read more

अष्टांग योग क्या है ?

अष्टांग योग महर्षि पतंजलि द्वारा रचित व प्रयोगात्मक सिद्धान्तों पर आधारित योग के परम लक्ष्य की प्राप्ति हेतु एक साधना पद्धति है। महर्षि पतंजलि से भी पूर्व योग का सैद्धान्तिक एवं क्रियात्मक पक्ष विभिन्न ग्रंथों में उपलब्ध था परन्तु उसका स्वरूप बिखरा हुआ था। बिखरे हुए योग के ज्ञान को सूत्र में एक करने का कार्य …

Read more