ऋग्वैदिक कालीन सभ्यता और संस्कृति

ऋग्वैदिक काल भारतीय संस्कृति के इतिहास में वेदों का स्थान अत्यन्त गौरवपूर्ण है । वेद भारत की संस्कृति की अमूल्य सम्पदा है । आर्यो के प्राचीनतम ग्रन्थ भी वेद ही है । भारतीय संस्कृति में वेदो का अत्यधिक महत्व है, क्योंकि हिन्दुओं के आचार विचार, रहन सहन, धर्म कर्म की विस्तृत जानकारी इन्ही वेदो से ही …

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मृदा अपरदन क्या है ?

मृदा को अपने स्थान से विविध रासायनिक, भौतिक एवं जैविक क्रियाओं द्वारा हटाया जाना मृदा अपरदन कहलाता हैं। मृदा अपरदन से मृदा की अनेक समस्यायें उतपन्न हो जाती हैं। उर्वरा शक्ति का ह्रास, नाइट्रोजन की कमी, अत्याधिक पशुचारण, अम्लीय क्षारीय जल का बढ़ना, कॉस खरपतवार का बढ़ना एवं मरूस्थलीय रेत का प्रसार आदि मुख्य हैं। मृदा …

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योग का उद्भव एवं विकास

योग भारतीय संस्कृति का एक आधार स्तम्भ हैं । जो प्राचिन काल से आधुनिक काल तक हमारे काल से जुडा हुआ है । इस योग का महत्व प्राचिन काल से भी था तथा आधुनिक काल में भी इसका महत्व और अधिक बडा है। प्रिय पाठको योग एक ऐसी विद्या है जिसके द्वारा मन को अविद्या,अस्मिता आदि …

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मांग का अर्थ एवं नियम

माँग का अर्थ किसी वस्तु को प्राप्त करने से है। कितुं अर्थशास्त्र में वस्तु को प्राप्त करने की इच्छा मात्र को माँग नहीं कहते बल्कि अर्थशास्त्र का संबध एक निश्चित मूल्य व निश्चित समय से होता है। माँग के, साथ निश्चित मूल्य व निश्चित समय होता है। प्रो. मेयर्स – “किसी वस्तु की माँग उन मात्राओं …

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अपक्षय क्या है ?

अपक्षय एक स्थानीय प्रक्रिया हैं, इसमें शैलो का विघटन और अपघटन मूल स्थान पर ही होता है विघटन तापमान में परिवर्तन और पाले के प्रभाव से होता हैं। इस प्रक्रिया में शैल टुकड़ों में बिखर जाते हैं अपघटन की प्रक्रिया में शैलों के अन्दर रासायनिक परिवर्तन होते है शैलों में विभिन्न प्रकार के खनिज कण एक …

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योग का अर्थ, परिभाषा महत्व और उद्देश्य

ज्ञान का मूल वेदों में निहित है। दार्शनिक चिन्तन तथा वैदिक ज्ञान का निचोड आत्म तत्व की प्राप्ति है। आत्मतत्व की प्राप्ति का साधन योग विद्या के रूप में इनमें (वेद) उपलब्ध है। योगसाधना का लक्ष्य कैवल्य प्राप्ति है। वैदिक ग्रन्थ, उपनिषद्, पुराण और दर्शन आदि में यत्र-तत्र योग का वर्णन मिलता है। जिससे यह पुष्टि …

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समष्टि अर्थशास्त्र क्या है ?

सन् 1929-30 की विश्वव्यापी आर्थिक मंदी की स्थिति और प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों के पूर्ण रोजगार के सिद्धान्त की असफलता के कारण प्रो जे एम. कीन्स ने ‘सामान्य सिद्धान्त’ की रचना की थी। प्रो. कीन्स के अनुसार–“राष्ट्रीय तथा विश्वव्यापी आर्थिक समस्याओं का अध्ययन समष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत किया जाना चाहिए।” इस प्रकार समष्टि अर्थशास्त्र में अर्थव्यवस्था का अध्ययन समग्र …

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शैल के प्रकार एवं आर्थिक महत्व

शैल के प्रकार शैल अपने निर्माण की क्रिया द्वारा तीन प्रकार की होती है- आग्नेय शैल  अवसादी शैल  रूपान्तरिंत शैल 1. आग्नेय शैल आग्नेय शैल जैसा कि नाम से ही स्पष्ठ है कि इस शैल की उत्पत्ति अग्नि से हुर्इ होगी इसी आधार पर इसका नाम आग्नेय शैल रखा गया है यह अति तप्त चट्टानी तरल …

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चिंता का अर्थ, परिभाषा एवं लक्षण

चिन्ता वस्तुत: एक दु:खद भावनात्मक स्थिति होती है। जिसके कारण व्यक्ति एक प्रकार के अनजाने भय से ग्रस्त रहता है, बेचैन एवं अप्रसन्न रहता है। चिन्ता वस्तुत: व्यक्ति को भविष्य में आने या होने वाली किसी भयावह समस्या के प्रति चेतावनी देने वाला संकेत होता है। हममें से प्रत्येक व्यक्ति अपनी दिन-प्रतिदिन की जिन्दगी में अलग-अलग …

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श्री अरविन्द का जीवन-दर्शन एवं शिक्षा-दर्शन

जीवन-दर्शन  श्री अरविन्द ने योग दर्शन के महत्व को रेखांकित करते हुए आधुनिक परिवेश के अनुरूप उसकी पुनव्र्याख्या की। उनके दर्शन को अनुभवातीत सर्वांग योग दर्शन के नाम से जाना जाता है क्योंकि उन्होंने अपने विचार को योग की संकुचित व्याख्या तक सीमित रखने की जगह सत्य तक पहुँचने के लिए विभिन्न मार्गों को समन्वित रूप …

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