ह्वेनसांग का यात्रा वृतांत एवं जीवन परिचय

ह्वेनसांग का यात्रा वृतांत हर्ष के शासन काल में चीनी यात्री ह्वेनसांग भारत के विभिन्न भागों की यात्रा की और चीन लौटने के पश्चात उसने अपनी यात्रा वृतांत संस्मरणों को लेखबद्ध किया । अतएव उसका विवरण हर्षकालीन इतिहास पर अत्यन्त महत्वपूर्ण प्रकाश डालता है । ह्वेनसांग का जीवन परिचय  ह्वेनसांग का जन्म चीन के होननफू नामक …

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भारत का भौतिक स्वरूप

प्राचीन काल से भारत सोने की चिड़िया व दूध की नदियों का देश कहा जाता था और अब वह दिन दूर नहीं जब कि वह पूर्ण विकसित होकर पुन: धन धान्य की स्थिति प्राप्त कर लेगा। वर्तमान में केवल भारत वर्ष तथा इंडिया शब्द संवैधानिक रूप से अधिकृत है। आकार की दृष्टि से भारत संसार का …

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मौर्य युग

नन्द वंश के पतन के पश्चात मगध में मौर्य वंश की सत्ता स्थापित हुर्इ । मौर्य वंश का संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य (321 र्इ.पू.) था । यूनानी लेखकों ने उसे सेन्ड्रोकोट्स या एण्ड्रोकोट्स कहा है । इस राजवंश का भारतीय इतिहास में विशिष्ट महत्व है । मौर्य शासकों ने छोटे छोटे राज्यों को समाप्त करके एक वृहद …

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जीवोम क्या है ?

जीवोम का अर्थ –  ‘‘जीवोम’’ शब्द घर का संक्षिप्त रूप है।। जहॉं तक जीवोम की परिभाषा एवं वर्गीकरण का संबंध हैं, वैज्ञानिक इस संदर्भ में एकमत नहीं हैं। जीवोम को एक वृहत् प्राकृतिक पारितंत्र के रूप में परिभाषित किया जा सकता हैं। जिससे हम पौधो औ र जानवरों के समुदायों के कुल संकलन का अध्ययन करते …

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फारसी यूनानी आक्रमण का प्रभाव

फारसी साम्राज्य साइरस महान और टेरियस के नेतृत्व में फारसी या इखमनी साम्राज्य विश्व के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक हो गया । बाद के साम्राज्यों ने इसे अनेक मामलों में आदर्श बनाया । साइरस द्वारा अपनार्इ गर्इ नीति के अनुसार सम्राट की शक्ति लागू करने में है। उसने विजित लोगों का े अपने  रिवाज …

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भूकंप के कारण और प्रभाव

भू-पृष्ठ के हिलने या कांपने को भूकम्प कहते है। ये हल्के से कम्पन से लेकर भवनों को तेज हिलाकर रख देने वाले होते है। भूकम्प लहरों की गति की ऊर्जा का एक रूप है जो पृथ्वी की धरातलीय परत से संप्रेषित होती है। सभी भूकम्प समान तीव्रता वाले नहीं होते इनमें से कुछ भूकम्प बहुत भयंकर …

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योगवशिष्ठ में योग का स्वरूप

योगवशिष्ठ में योग का स्वरूप  योग वशिष्ठ योग का एक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। अन्य योग ग्रन्थों की भाँति योग वशिष्ठ में भी योग के विभिन्न स्वरूप जैसे- चित्तवृत्ति, यम-स्वरूप, नियम-स्वरूप, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, ध्यान, समाधि, मोक्ष आदि का वर्णन वृहद् रूप में किया गया है। योग वशिष्ठ के निर्वाण-प्रकरण में वशिष्ठ मुनि श्री राम जी को …

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वेदों का महत्व

वैदिक लोगों के आर्थिक और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो रहे थे । पशु-चारण व्यवस्था धीरे-धीरे कृषि अर्थव्यवस्था द्वारा विस्थापित होती जा रही थी, जो नियमित खेती और शिल्प तथा व्यापार के विकास पर आधारित थी । जनजातियों का बटवारा हुआ और वस्तुत: हमें एक सम्पूर्ण वर्ण-व्यवस्था देखने को मिलती है । इस समय में …

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मृदा संरक्षण के उपाय

मृदा संरक्षण से तात्पर्य उन विधियों से है ,जो मृदा को अपने स्थान सें रोकता है।  मृदा संरक्षण के उपाय- फसल चक्र का उपयोग करना चाहिये।  प्रत्येक स्थान पर वृक्षारोपण करना चाहिये।  मिट्टी के रासायनिक परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जायें।  वृक्षों की कटार्इ एवं अनियंत्रित पशुचारण पर रोक लगार्इ जायें।  तटबांध का निर्माण किया जाना …

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योग में साधक एवं बाधक तत्व

योग शब्द का अर्थ संस्कृत भाषा के युज् धातु से निश्पन्न होने के साथ विभिन्न ग्रन्थों के अनुसार योग की परिभाषाओं का अध्ययन किया गया। योग साधना के मार्ग में साधक के लिए साधना में सफलता हेतु सहायक तत्वों तथा साधना में बाधक तत्वों की चर्चा विभन्न ग्रन्थों के अनुसार की गर्इ है। वास्तविकता में योग …

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