किशोरावस्था का अर्थ, परिभाषा एवं समस्याएं

किशोरावस्था एडोलसेन्स नामक अंग्रेजी शब्द का हिन्दी रूपान्तरणर है। जिसका अर्थ है परिचक्वता की ओर बढ़ना इस समय बच्चे न छोटे बच्चो की श्रेणी में आतें है और न ही बड़े या अपने शब्दो में कहे तो ये छोटे से बडे बनने की प्रक्रिया की समयावधि से गुजरते है। जर्सिल्ड नामक मनोवैज्ञानिक ने किशोरावस्था का अर्थ …

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जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न समस्याएँ

विश्व के अन्य देशो की अपेक्षा भारत में जनसंख्या वृद्धि तेजी से हो रही है। जिससे अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो रही है। इन समस्याओ के पीछे कोर्इ न कोर्इ वैज्ञानिक कारण भी है। जनसंख्या वृद्धि का सबसे बुरा प्रभाव पर्यावरण पर पड रहा है जिससे जीवन संबंधी अनेक कठिनार्इयाँ उत्पन्न हो रही है। जनसंख्या वृद्धि से …

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जाति और आरक्षण

भारतीय समाज में जाति की भूमिका  किसी भी समाज राजनीतिक ढांचा उस समाज की प्रकृति से प्रभावित होता है। समाज की प्रकृति को समझने के लिये हमें समाजिक संरचना को समझना होगा। भारतीय सामाजिक संरचना को जाति प्रथा के रूप में अच्छी तरह से समझा जा सकता है जहां जाति के अंतर्गत प्रचीन वर्णाश्रम व्यवस्था सन्निहित …

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राष्ट्र और राज्य

आधुनिक राष्ट्र और राज्य को राजनीतिक संगठन के रूप में बदलने में बहुत लम्बा समय लगा। प्राचीन समय में मानव समुदायों में रहता था। स्वभावत: मानव एक सामाजिक प्राणी है जो अकेला नहीं रह सकता। वह समाज का अभिन्न अंग होता हैं अत: अपने जीवन में मानव को कुछ नियमों का पालन करना होता है और …

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उत्पादकता की अवधारणा

सर्वप्रथम उत्पादकता का विचार 1766 में प्रकृतिवाद के संस्थापक क्वेसने के लेख में सामने आया। बहुत समय तक इसका अर्थ अस्पष्ट रहा। एम0एम0 मेहता ने इस संबंध में ठीक ही लिखा है, ‘‘दुर्भाग्य से, उत्पादकता शब्द औद्योगिक अर्थशास्त्र के उन कुछ शब्दों में से है जिन्होनें अनेक विभिन्न एवं विरोधी विवेचन उत्पन्न किये है।’’ उत्पादकता की …

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सम्प्रदायवाद क्या है ?

सम्प्रदायवाद का अर्थ-  सम्प्रदायवाद का अर्थ ‘‘दूसरे समुदाय के लोगो के प्रति धार्मिक भाषा अथवा सांस्कृतिक आधार पर असहिष्णुता की भावना रखना तथा धार्मिक सांस्कृतिक भिन्नता के आधार पर अपने समुदाय के लिए राजनीतिक अधिकार, अधिक सत्ता, प्रतिष्ठा की मांगे रखना और अपने हितो को राष्ट्रीय हितो से ऊपर रखना है। सम्प्रदायवाद की प्रमुख विशेषताएं – …

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ऊर्जा संरक्षण के उपाय

हमें ज्ञात है कि पारिस्थितिक तंत्र एवं जीवधारियों के जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिये ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा हमें मुख्यत: सूर्य से प्राप्त होती हैं। पौधे सौर ऊर्जा का उपयोग करके इसे अन्य रूपों में पौधों के शरीर एवं जीवाश्मीय र्इधनों में संचित करते हैं। हमें विभिन्न कार्यो के संपादन …

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पर्यावरण संरक्षण के उपाय

पर्यावरण संरक्षण पर्यावरण प्राणियों एवं जीवों का एक साथी है जिसकी शक्ति व सुविधा का ज्ञान जैव जगत को तब होता है जबवह किसी कारणवश कुछ हो जाये। खनिजों का शोषण करते समय मानव शायद ही कभी सोचता है कि वह क्या कर रहा है अथवा वायु मण्डल में जहरीली गैसों को छोड़ने से पूर्व वय …

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जातिवाद क्या है ?

वर्ण व्यवस्था भारतीय समाज का एक महत्वपूर्ण अंग रही है। जिसने सामाजिक और राजनीतिक जीवन के सभी पक्षो को प्रभावित किया है। वर्तमान युग में भी व्यक्ति की जाति जन्म से ही निर्धारित होती है न कि कर्म से। इस प्रकार प्राचीन वर्ण व्यवस्था की विकृति के परिणामस्वरूप उत्पन्न हुर्इ जाति व्यवस्था ने ही जातिवाद को …

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वस्त्र परिसज्जा क्या है ?

परिसज्जा द्वारा किसी वस्त्र को अधिक चमकीला मजबूत तथा धोने पर न सिकुड़ने वाला बनाया जा सकता है क्योंकि वस्त्र जब करघे पर मशीनों पर बुन कर आता है तो वह खुरदुरा, गंदा तथा दाग धब्बे वाला होता है उसका परिष्करण आवश्यक होता है तभी वह उपयोग के लायक होता है अत: कहा जा सकता है …

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