नियोजन का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्व एवं सिद्धान्त

नियोजन भविष्य में किये जाने वाले कार्य के सम्बन्ध में यह निर्धारित करता है कि अमुक कार्य को कब किया जाय, किस समय किया जाय कार्य को कैसे किया जाय कार्य में किन साधनों का प्रयोग किया जाय, कार्य कितने समय में हो जायेगा आदि । उदाहरण : श्री शिवम से उनके व्यवसायिक सहयोगी श्री सत्यम …

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लाभांश नीति का अर्थ, आवश्यक तत्व एवं प्रकार

लाभांश नीति एक बहुत ही लोचपूर्ण एवं व्यापक शब्द है। लाभांश नीति दो शब्दों लाभांश नीति से मिलकर बना है। लाभांश से अभिप्राय कम्पनी की आय में से अंशधारियो को मिलने वाले हिस्से से नीति से अभिप्राय ‘व्यवहार के तरीके’ या ‘कार्य करने के सिद्धान्तों’ से होता है। अत: लाभांश नीति का अर्थ लाभांश वितरित करने …

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प्रबंध के सिद्धांत

सिद्धान्त शब्द का प्रयोग प्राय: एक मूलभूत सार्वभौमिक सच्चार्इ अथवा तर्कयुक्त वाक्य से होता है जो कार्य तथा कारण के बीच सम्बन्ध को स्थापित करता है तथा विचार उद्देश्य और कार्य का पथ प्रर्दशन करता है। इस प्रकार सिद्धान्त समझने तथा किन कार्यों से क्या परिणाम होंगे, का पूर्वानुमान लगाने में सहायक होते हैं। इस प्रकार …

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सर्वोच्च न्यायालय का गठन, कार्य व शक्तियाँ

‘‘कोर्इ भी समाज बिना विधायी व्यवस्था के रह सकता है यह बात तो समझ में आ एकता है, परन्तु किसी ऐसे समय राज्य की कल्पना नहीं की जा सकती, जिसमें न्यायापालिका या न्यायाधिकरण की कोर्इ व्यवस्था न हो ।’’ भारत का सर्वोच्च न्यायालय देश का उच्चतम् न्यायालय है, यह भारतीय न्याय व्यवस्था की शीर्षक संख्या है। …

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भोज्य पदार्थों में मिलावट के कारण, प्रभाव, मिलावट से बचने के उपाय

मिलावट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा भोज्य पदार्थों की प्रकृति गुणवत्ता तथा पौष्टिकता में बदलाव आ पाता है। यह मिलावट उपज फसल काटने के समय संग्रहित करते समय, परिवाहन और वितरण करते समय किसी भी समय हो सकती है। ‘खाद्य पदार्थ में कोर्इ मिलता जुलता पदार्थ मिलाने अथवा उसमें से कोर्इ तत्व निकालने या उसमें …

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कर्मचारी लाभ से संबंधित कानून और नियम

श्रमिक क्षतिपूर्ति संशोधित अधिनियम, 1984  यह अधिनियम मार्च 1923 में पारित किया गया और 1 जुलार्इ 1924 से लागू हुआ। इसमें अब तक कर्इ बार संशोधन किये जा चुके है। और अन्तिम संशोधन 1984 में किया गया है। इन संशोधनों का उद्देश्य अधिनियम के सीमा-क्षेत्र को बढ़ाना व व्यवस्था को अधिक उपयोगी तथा प्रभावशाली बनाना रहा …

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स्थानीय स्वशासन क्या है ?

‘‘स्थानीय स्वशासन एक ऐसा शासन है, जो अपने सीमित क्षेत्र में प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करता हो।’’ भारत एक विशाल जनसंख्या वाला लोकतांत्रिक देश है। लोकतंत्र की मूल भूत मान्यता है कि सर्वोच्च शक्ति जनता में होनी चाहिए । सभी ब्यिकृ इस व्यवस्था से प्रत्यक्षत: जुडंकर शासन कार्य से सम्बद्ध हो सकें इस प्रकार का अवसर …

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वर्ज्य पदार्थ क्या है ?

हमारे समाज में कुछ ऐसे पदार्थो का प्रचलन है। जो कि व्यक्ति के स्वस्थ के लिए अत्यधिक हानिकारक होते है। इन्हें वर्ज्य पदार्थ या निषिद्ध भोज्य पदार्थ कहते है। जैसे-मदिरा, धूम्रपान, तम्बाकू, अफीम, चरस आदि। मदिरा-  ये गेहूँ, जौ, चावल, अंगूर आदि के सड़ने के उपरान्त बनायी जाती है। इसमें हानीकारक पदार्थ एल्कोहल पाया जाता है। …

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भारतीय संघ व्यवस्था में आपातकालीन प्रावधान (व्यवस्था)

आपातकालीन प्रावधान (व्यवस्था)  भारतीय संविधान द्वारा आकस्मिक आपातो तथा संकटकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए राष्ट्रपति को अपरिमित शक्तियां दी गयी हैं। संविधान के अनुच्छेद 352 से 360 तक तीनप्रकार के संकटों का अनुमान किया गया है 1. युद्ध बाह्य आक्रमण या आंतरिक संकट –  संविधान के अनुच्छेद 352 में लिखा है कि यदि राष्ट्रपति …

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भोज्य विषाक्तता क्या है ?

सामान्य तौर पर भोजन करने के पश्चात व्यक्ति अच्छा अनुभव करता है। उसे संतुष्टि प्राप्त होती है। किन्तु कभी-कभी कर्इ कारणों से भोजन प्रदूषित हो जाता है। जिससे उसे ग्रहण करने के पश्चात व्यक्ति अस्वस्थ महसूस करता है भोजन का दूषित होना ही भोज्य विषाक्तता का कारण बनता है।‘‘व्यक्ति द्वारा भोजन ग्रहण करने के तुरन्त बाद …

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