वित्तीय प्रबंध की प्रकृति, क्षेत्र तथा उद्देश्य

मनुष्य द्वारा अपने जीवन काल में प्राय: दो प्रकार की क्रियाएं सम्पादित की जाती है आर्थिक क्रियायें  अनार्थिक क्रियाएं । आर्थिक क्रियाओं के अन्र्तगत हम उन समस्त क्रियाओं को सम्मिलित करते हैं जिनमें प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से धन की संलग्नता होती है जैसे रोटी, कपड़े, मकान की व्यवस्था आदि। अनार्थिक क्रियाओं के अन्तर्गत पूजा-पाठ, व …

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गोबर से खाद बनाने की विधियाँ

गोबर से खाद बनाने की कर्इ विधियाँ प्रचलन में हैं जिनमें सर्वाधिक लोकप्रिय है- इन्दौर विधि, बंगलौर विधि, श्री पुरुषोत्तम राव विधि, श्री प्रदीप तापस विधि, तथा नाडेप विधि। इनमें से सर्वाधिक लोकप्रिय तथा उपयोगी विधि ‘‘नाडेप विधि’’ के प्रमुख विवरण निम्नानुसार हैं- खाद बनाने की नाडेप विधि कम से कम मात्रा में गोबर का उपयोग करके अधिकाधिक …

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संघर्ष प्रबंधन क्या है ?

पूंजीवादी औद्योगिक अर्थव्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता औद्योगिक संघर्ष है। इसका तात्पर्य मालिकों और श्रमिकों के मध्य होने वाले मतभेदों से है जिनका परिणाम हड़ताल, तालाबंदी, काम की धीमी गति, घेराव तथा इस प्रकार की अन्य समस्याओं के रूप में सामने आता है। अत: औद्योगिक संघर्ष वह मतभेद है जो रोजगार देने या न देने अथवा …

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हरी खाद के लाभ एवं बनाने की विधि

हरी खाद से अभिप्राय उन फसलों से तैयार की जाने वाली खाद से है जिन्हें केवल खाद बनाने के उद्देश्य से ही लगाया जाता है तथा इन पर फल-फूल आने से पहले ही इन्हें मिट्टी में दबा दिया जाता है। ये फसलें सूक्ष्म जीवों द्वारा विच्छेदित होकर भूमि में ह्यूमस तथा पौधों की वृद्धि के लिए …

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समन्वय क्या है

किसी भी संगठन में समन्वय एक महत्वपूर्ण प्रकार्य है जो संगन के सभी अंगों को आपस में जोड़कर रखता है। प्रस्तुत इकार्इ में समन्वय का अर्थ, महत्व, सिद्धान्त एवं समन्वय को प्रबन्ध के सार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। समन्वय को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रबन्ध का केन्द्र बिन्दु माना गया है। समन्वय की प्रारम्भिक …

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व्यापार चक्र क्या है ?

आखिर व्यापार-चक्र होता क्या है? व्यापार चक्र की कोर्इ उचित परिभाषा देना सरल कार्य नहीं है। प्रो0 डब्लू0सी0 मिचेल (W.C. Mitchell) के शब्दों में, ‘‘व्यापार चक्रों से आशय संगठित समुदायों की आर्थिक क्रियाओं में होने वाले उच्चावचनों की श्रृंखला से होता है।’’ (Busines cycles are a series of fluctuations in the economic activities of organised communities) …

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विभागीकरण का अर्थ, आवश्यकता एवं महत्व

किसी व्यावसायिक संगठन को विभिन्न विभागों व उप-विभागों में विभक्त करना ही विभागीकरण कहलाता है। किसी निर्माणी संस्था में पाये जाने वाला क्रय विभाग, उत्पादन विभाग, वित्त विभाग, विक्रय विभाग, उत्पादन विभाग, वित्त विभाग, विक्रय विभाग, शोध एवं विकास विभाग, से विवर्गीय विभागीकरण ही है। व्यवसाय की प्रकृति एवं आकार को ध्यान में रखते हुए विभागीय …

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व्यावसायिक सम्प्रेषण क्या है ?

सम्प्रेषण ही वह साधन है जिसके द्वारा व्यवहार को क्रियान्वित किया जाता है, परिवर्तनों को लागू किया जाता है, सूचनाओं को उत्पादक बनाया जाता है एवं व्यावसायिक लक्ष्यों को प्राप्त किया जाता है। सम्प्रेषण में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सूचनाओं का आदान-पद्रान शामिल होता है। आधुनिक संचार क्रान्ति के युग में समस्त व्यावसायिक उपक्रमों …

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निर्णयन का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्व एवं प्रक्रिया

निर्णयन का शाब्दिक अर्थ, किसी निष्कर्ष पर पहुचने से लगाया जाता है। व्यवसाय में प्रवर्तन से समापन तक निर्णय ही लेने पड़ते हैं। प्रबन्धकों को उपलब्ध विभिन्न विकल्पों में से श्रेष्ठतम विकल्प का चयन करना पड़ता है जिससे न्यूनतम लागत पर, कम समय में, कुशलतापूर्वक कार्यों को सम्पन्न किया जा सके। पीटर एफ. ड्रकर के शब्दों …

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लाभांश के प्रकार

लाभांश नीतियों में लाभांश के प्रकारों को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करती है। कम्पनी विभिन्न प्रकार के लाभांश का वितरण कर अंशधारियों को कम्पनी के ्प्रति निष्ठावान होने के लिए प्रेरित करती है। इसमें विभिन्न प्रकार के लाभांशों का वर्णन किया जा रहा है। जो कम्पनी की लाभांश नीतियों को प्रभावित करते हैं। और कम्पनी अपने भावी …

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