डॉ0 भीमराव अम्बेडकर का जीवन परिचय

भारतीय संविधान के निर्माता और स्वतन्त्र भारत के प्रथम विधि मंत्री डॉ0 भीमराव अम्बेडकर का नाम अछूतों के मसीहा व एक कर्मठ व्यक्ति के रूप में जाना जाता हैं। डॉ0 अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रेल, 1891 को महू (मध्य प्रदेश) में हुआ था। उनके पिता का नाम रामजी सकपाल तथा माता का भीमाबार्इ था। वे अपने …

Read more

कर्मचारी भविष्य-निधि एवं प्रकीर्ण प्रावधान अधिनियम, 1952

अधिनियम का नाम, विस्तार, उद्देश्य तथा लागू होना  औद्योगिक विकास के साथ ही कुछ नियोजकों ने अपने कर्मकारों के कल्याण के लिए भविष्य निधि स्कीम लागू किये। लेकिन ऐसी योजनाएं शुद्ध रूप से प्राइवेट और ऐच्छिक थीं। छोटे उद्योगों में कार्यरत मजदूर इस लाभ से वंचित थे। इससे असन्तोष और र्इश्र्या होना स्वाभाविक था। ऐसी योजना …

Read more

राजभाषा नियम, 1976 में ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ क्षेत्र का भौगोलिक विभाजन

राजभाषा नियम, 1976  राजभाषा नियम, 1976 सा. का. नि. 1052 केन्द्रीय सरकार -राजभाषा अधिनियम, 1963(1963 का 19) की धारा 3 की उपधारा (4) के साथ पठित धारा 8 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात् :-1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ-  इन नियमों का संक्षिप्त नाम राजभाषा (संघ के …

Read more

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 क्या है ?

कुछ महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ  1. समुचित सरकार-  केन्द्रीय सरकार या रेलवे-प्रशासन के नियंत्रण में प्रतिष्ठानों, महापत्तनों, खानों या तेलक्षेत्रों के संबंध में समुचित सरकार केन्द्रीय सरकार तथा सभी प्रतिष्ठानों के संबंध में समुचित सरकार राज्य सरकार है। 2. कर्मचारी-  ‘कर्मचारी’ का अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है, जो अधिनियम के अधीन आने वाले किसी कारखाना या स्थापन में …

Read more

राजभाषा अधिनियम, 1963 क्या है ?

संविधान के अनुच्छेद 343(3) के अनुसार संसद को यह शक्ति प्रदान की गर्इ थी कि वह अधिनियम पारित करके 26 जनवरी, 1965 के बाद भी विनिर्दिष्ट सरकारी कार्य में अंग्रेजी का प्रयोग जारी रख सकती है। इस शक्ति का उपयोग करके राजभाषा अधिनियम, 1963 पारित किया गया, जिसे बाद में 1967 में संशोधित किया गया। राजभाषा …

Read more

कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 क्या है ?

अस्थायी आंशिक अशक्तता- अस्थायी आंशिक अशक्तता वह अषक्कतता है, जिससे कर्मकार की उस नियोजन में उपार्जन क्षमता अस्थायी अवधि के लिए कम हो जाती है, जिसमें वह दुर्घटना के समय लगा हुआ था। स्थायी आंशिक अशक्तता – स्थायी आंशिक अशक्तता वह अशक्तता है, जिससे कर्मकार की हर ऐसे नियोजन में उपार्जन-क्षमता स्थायी रूप में कम हो …

Read more

राजभाषा हिंदी सम्बन्धी विभिन्न समितियां

हिन्दी सलाहकार समितियाँ  भारत सरकार की राजभाषा नीति के सूचारू रूप से कार्यान्वयन के बारे में सलाह देने के उद्देश्य से विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में हिन्दी सलाहकार समितियों की व्यवस्था की गर्इ। इस समितियों के अध्यक्ष सम्बन्धित मंत्री होते हैं और उनका गठन ‘केन्द्रीय हिन्दी समिति’ (जिसके अध्यक्ष माननीय प्रधानमंत्री जी हैं) सिफारिश के आधार पर बनाए …

Read more

मजदूरी से संबंधित अधिनियम

श्रमिकों के लिए केवल मजदूरी की मात्रा ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उसकी अदायगी के तरीके, मजदूरी-भुगतान के अंतराल, उससे कटौतियां तथा उसके संरक्षण से संबद्ध अन्य कर्इ बातें भी महत्वपूर्ण होती है। मजदूरी की संरक्षा से संबद्ध कानूनों के बनाए जाने के पहले मजदूरी के भुगतान में कर्इ तरह के अनाचार हुआ करते थे। उदाहरणार्थ, …

Read more

संविधान में हिन्दी (अनुच्छेद 343 से 351 तक)

स्वतंत्रता संग्राम के दिनों अंग्रेजों के क्रूर अत्याचार व दमनात्मक शासन के कारण भारतीय जनमानस में अंग्रेजों के प्रति गहरी घृणा छा गर्इ थी। विदेशियों से मुक्ति पाने की छटपटाहट से राष्ट्रीय आन्दोलन का सूत्रपात हुआ। स्वराज्य का सपना, स्वदेशी की चाहत, स्वभाषा की मिठास और स्वतंत्रता की आकांक्षा इसी समय की उपज है। ‘स्वदेशी का …

Read more

श्रम विधान क्या है ?

आधुनिक प्रचलन में ‘विधान’ शब्द से उच्च प्राधिकार से युक्त तथा जनता का प्रचुरता से प्रतिनिधित्व करने वाले विशिष्ट राजकीय अभिकरणों द्वारा बनाए गए विधि के नियमों का बोध होता है। इस दृष्टिकोण के अनुसार, विधान के अन्तर्गत मुख्यत: जनता के समर्थन प्राप्त विधानमंडलों तथा अन्य मान्यता प्राप्त सक्षम प्राधिकारियों द्वारा बनाए गए कानून सम्मिलित होते …

Read more