पर्व का अर्थ, परिभाषा, स्वरूप, वर्गीकरण

व्रत, पर्व का प्रवर्तन हमारे प्राचीन समय से प्रारंभ हुआ था। ‘पर्व’ का शाब्दिक अर्थ है ‘गाँठ’ अर्थात् सन्धिकाल । हिन्दूपर्व सदैव सन्धिकाल में ही पड़ते है। पूर्णिमा, अमावस्या, अष्टमी तथा सक्रान्ति आदि को शास्त्रों में पर्व कहा गया है।  संपूर्ण भारतीय सांस्कृतिक को पारंपरिक पर्व के रूप में भारत को जाना जाता है क्योंकि ये …

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गुरु ग्रंथ साहिब क्या है?

सिखों का प्रमुख धर्मग्रंथ है ‘गुरुग्रंथ साहिब’ । इसे ‘आदिग्रंथ’ भी कहा जाता है ‘गुरुग्रंथ साहिब’ का पहला प्रकाशन 16 अगस्त 1604 को हरिमंदिर साहिब, अमृतसर में हुआ था । सन् 1705 में दमदमा साहिब में सिखों के अंतिम गुरु गोविंद सिंह जी ने इसमें गुरु तेग बहादुर जी के 116 शब्द जोड़कर इसे पूर्ण किया …

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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता क्या है? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आवश्यकता क्यों है?

भारत का संविधान एक धर्मनिरपेक्ष, सहिष्णु और उदार समाज की गारंटी देता है। संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मनुष्य का एक सार्वभौमिक और प्राकृतिक अधिकार है। लोकतंत्र में विश्वास रखने वालों का कहना है कि कोई भी राज्य और धर्म इस …

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चिकित्सा का अर्थ, लक्ष्य एवं प्रकार

किसी रोग का उपचार चिकित्सा कहलाता है। अस्वस्थ्य शरीर को स्वस्थ्य बनाना चिकित्सा कहलाता है। रोग से अरोग्यता की ओर बढ़ना, शरीर को निरोगी बनाना, चिकित्सा शब्द के ही प्र्याय है। जब “स्व” अपनी जगह पर स्थित न हो अर्थात् व्यक्ति बीमार हो तो उस रूकावट को दूर करना चिकित्सा है। चिकित्सा का लक्ष्य  चिकित्सा का …

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राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3) – Official Language Act 1963

संविधान के अनुच्छेद 343(3) के अनुसार संसद को यह शक्ति प्रदान की गई थी कि वह अधिनियम पारित करके 26 जनवरी, 1965 के बाद भी विनिर्दिष्ट सरकारी कार्य में अंग्रेजी का प्रयोग जारी रख सकती है। इस शक्ति का उपयोग करके राजभाषा अधिनियम 1963 पारित किया गया, जिसे बाद में 1967 में संशोधित किया गया। राजभाषा …

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हठयोग साधना का ऐतिहासिक विकास एवं परम्परा

सामान्यतया हठयोग का अर्थ सामान्य जन जबरदस्ती किए जाने वाले शरीर की शक्ति के विपरीत बल लगाकर किए जाने वाले योग के अर्थ में लेते है, परंतु यह उचित नहीं है। ‘हठ’ शब्द का अर्थ शास्त्रों में प्रतीकात्मक रूप से लिया गया है। शरीर, मन व प्राण को वश में करना हठयोग का लक्ष्य है, क्योंकि …

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रासायनिक बंध किसे कहते हैं?

रासायनिक बंध किसे कहते हैं? परमाणु का स्वतंत्र रूप में पाया जाना संभव नहीं है, वे किसी न किसी रूप में संयुक्त अवस्था में पाये जाते हैं। परमाणओं के परस्पर संयोग से अणुओं का निर्माण होता है। किसी अणु में उपस्थित परमाणुओं के मध्य आकर्षण पाया जाता है जिसे रासायनिक बंध कहते हैं। चूंकि परमाणु बंधित …

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सामाजिक विकास की प्रकृति क्या है?

सामाजिक संरचना के उन विभिन्न पहलुओं और सामाजिक कारकों का अध्ययन है जो समाज के त्रीव विकास में बाधा उत्पन्न करते है। इसका उद्देश्य किसी समुदाय के समक्ष उस आदर्श प्रारूप को भी प्रस्तुत करना है जो उस समुदाय के लोगों को विकास की ओर अग्रसर कर सके। जब से विभिन्न देशों में, विशेषत: तृतीय विश्व …

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किशोरावस्था का अर्थ, किशोरावस्था में शारीरिक विकास का वर्णन

किशोरावस्था विकास की अत्यंत महत्वपूर्ण सीढ़ी है। किशोरावस्था का महत्व कई दृष्टियों से दिखाई देता है प्रथम यह युवावस्था की ड्योढी है जिसके ऊपर जीवन का समस्त भविष्य पाया जाता है। द्वितीय यह विकास की चरमावस्था है। तृतीय यह संवेगात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। किशोरावस्था का अर्थ किशोरावस्था के लिए अंग्रेजी का शब्द …

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बाल्यावस्था किसे कहते हैं ? इसकी विशेषताओं का वर्णन।

6 से 12 वर्ष की अवस्था को बाल्यावस्था कहते हैं । बालक के विकास की दूसरी अवस्था बाल्यावस्था है। शैशवावस्था के पश्चात बालक बाल्यावस्था में प्रवेश करता है। जब शैशवावस्था होती है तो बालक का शरीर एवं मन दोनों ही अविकसित होते हैं। जैसे ही वह बाल्यावस्था में प्रवेश करता है उसका पर्याप्त तथ सर्वांगीण विकास होता …

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