भारत में पंचायती राज की स्थिति व सुदृढ़ीकरण के प्रयास

स्वतन्त्रता पूर्व पंचायतों की मजबूती व सुदृढ़िकरण हेतु विशेष प्रयास नहीं हुए इसके विपरीत पंचायती राज व्यवस्था लड़खड़ाती रही। मध्य काल में मुस्लिम राजाओं का शासन भारत के विभिन्न हिस्सों में फैल गया। यद्यपि स्थानीय शासन की संस्थाओं की मजबूती के लिए विशेष प्रयास नहीं किये गये परन्तु मुस्लिम शासन ने अपने हितों में पंचायतों का …

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परिवेदना क्या है ?

हर संगठन में नियोक्ता, प्रबन्धन व कर्मचारी वर्ग सम्मिलित होता है। इन वर्गों के अन्दर भी गुटवाजी एवं व्यक्तियों अथवा गुटों में टकराव पाया जाता है। ये अक्सर एक दूसरे के प्रति असंतोष व्यक्त करते रहते हैं तथा एक दूसरे की अवसर पाते ही शिकायत भी करते हैं। उनमें अक्सर मतभेद, लड़ार्इ-झगड़ा तथा तीब्र असंतोष दिखाइर् …

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पंच प्रणाली व पंचायतों का स्वरूप

पंचायती राज का इतिहास कोर्इ नया नहीं अपितु यह आदिकाल से हमारी पुरातन धरोहर है। भारतीय ग्रामीण व्यवस्था में सामुदायिकता की भावना प्राचीन काल से विद्यमान रही है। इसी सामुदायिकता व परम्परागत संगठन के आधार पर पंचायत व्यवस्था का जन्म हुआ। इसीलिए हमारे देश में पंचायतों की व्यवस्था भी सदियों से चली आ रही है। भारतीय …

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औद्योगिक संबंध की अवधारणा, प्रकृति व अर्थ

औद्योगिक श्रम, वास्तव में, वृहत् समाज का ही एक अंग है। श्रमिक के रूप में वह उत्पादन का सक्रिय साधन है, किन्तु साथ ही, वह उपभोक्ता भी है। समाज में भी उसकी प्रतिष्ठा व भूमिका है। अस्तु, उसे उद्योग, परिवार व बृहत् समाज के अंग के रूप में एक ही साथ भूमिका का निर्वाह करना होता …

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विकास की अवधारणा

परिवर्तन प्रकृति का नियम है। परिवर्तन सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही हो सकते हैं। किसी भी समाज, देश, व विश्व में कोर्इ भी सकारात्मक परिवर्तन जो प्रकृति और मानव दोनों को बेहतरी की ओर ले जाता है वही वास्तव में विकास है। अगर हम विश्व के इतिहास में नजर डालें तो पता चलता है कि विकास …

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निष्पादन मूल्यांकन क्या है ?

निष्पादन मूल्यांकन के लिए अनेक पर्यायवाची शब्दों का भी प्रयोग किया जाता है, जैसे-कर्मचारी मूल्यांकन, कर्मचारी निष्पादन,समीक्षा,कार्मिक मूल्यांकन, निष्पादन मूल्यांकन तथा कर्मचारी मूल्यांकन आदि। ये सभी शब्द समानार्थक हैं। निष्पादन मूल्यांकन की कुछ प्रमुख परिभाषायें निम्नलिखित प्रकार से है: डेल एस. बीच के अनुसार, ‘‘ निष्पादन मूल्यांकन किसी व्यक्ति का कार्य पर उसके निष्पादन तथा उसके …

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श्रम की अवधारणा एवं विशेषताएं

उद्योग एवं श्रम परस्पर सम्बन्धित हैं। बिना श्रम के उद्योग की कल्पना नहीं की जा सकती। यह श्रम शारीरिक एवं मानसिक दोनों तरह का होता था। पहले उद्योग में शारीरिक श्रम को महत्ता प्राप्त थी, परन्तु अब अत्यधिक विकसित प्रौदयोगिकी के कारण मानसिक श्रम ने अत्यधिक महत्व प्राप्त किया है। यद्यपि शारीरिक श्रम अभी भी पूर्णतया …

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समाचार तथा जनमत के लिए लोगों का साक्षात्कार

आज के जमाने में जन संचार के विभिन्न माध्यमों के कारण हमारी जिन्दगी पर गहरा असर पड़ रहा है। हमारा समाज, हमारी संस्कृति, हमारी जीवन शैली, हमारी विचारधारा यानी हर एक चीज को जनसंचार के अलग-अलग माध्यम गहरार्इ से प्रभावित कर रहें हैं । जनसंचार के अलग-अलग माध्यम जैसे रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट और समाचार पत्र-पत्रिकाएं जिस …

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प्रशिक्षण क्या है ?

साधारण शब्दों में, प्रशिक्षण किसी कार्य विशेष को सम्पन्न करने के लिए एक कर्मचारी के ज्ञान एवं निपुणताओं में वृद्धि करने का कार्य है। प्रशिक्षण एक अल्पकालीन शैक्षणिक प्रक्रिया है तथा जिसमें एक व्यवस्थित एवं संगठित कार्य-प्रणाली उपयोग में लायी जाती हैं, जिसके द्वारा एक कर्मचारी किसी निश्चित उद्देश्य के लिए तकनीकी ज्ञान एवं निपुणताओं को …

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सामाजिक समूह कार्य का अर्थ, परिभाषा

जहॉ सामाजिकता ने मनुष्य को अस्तित्व प्रदान किया है वही पर दरिद्रता, निर्धनता, बेरोजगारी, स्वास्थ, विचलन, सामायोजन सम्बन्धी समस्याओं का विकास हुआ। जिसके फलस्वरूप समाज अनेक प्रकार के सुरक्षात्मक कदम उठायें। सामाजिक सामूहिक सेवाकार्य द्वारा सामाजिक जीवन-धारा में भाग लेने के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करने वाली व्यक्ति को सम्बन्ध सम्बन्धी समस्याओं को सामूहिक प्रक्रिया के …

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