पर्यावरण शिक्षा क्या है ?

पृथ्वी पर रहने वाले मानव को यह ज्ञान कराना कि इसके कृत्यों से ही पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, विशाल प्राकृतिक संसाधनों के भंडार वाली पृथ्वी रिक्त हो चली है, भविष्य की बात तो दूर, वर्तमान पीढ़ी का जीवन भी कठिन हो गया है। इस स्थिति पर नियंत्रण करके भावी विनाश को रोका जा सकता है। …

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विधवा का अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार

विधवा शब्द ‘वि’ उपसर्ग और ‘धव’ से निर्मित है’ । ‘धव’ शब्द के अनेक अर्थ होते हैं। उदाहरणार्थ- हिलना-डुलना, कम्पन, मनुष्य, पति, मालिक, स्वामी, बदमाश, ठग और एक प्रकार का वृक्ष’। ‘धव’ शब्द से उसका स्त्रीलिंग शब्द ‘धवा’ बनता है । ‘वि’ उपसर्ग लगाने से विधवा शब्द का निर्माण होता है जिसका अर्थ होता है बिना …

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रघुनाथ दास गोस्वामी का जीवन परिचय

रघुनाथ दास गोस्वामी का जन्म 1494 ई. को बंगाल के हुगली जिले के धार्मिक कायस्थ परिवार में यहाँ हुआ था। श्री चैतन्य के चरित्र से प्रभावित होकर इन्होंने गृह त्याग कर दिया था । अनेक कष्ट झेलते हुये भी ये नीलाचल श्री चैतन्य से मिले। श्री चैतन्य ने प्रसन्न होकर अपने अन्तरंग शिष्य दामोदर की देखरेख …

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कवि नाभादास का जीवन परिचय

श्री नाभादास कृत भक्तमाल हिन्दी साहित्य का अत्यन्त महत्वपूर्ण ग्रंथ है। भक्तमाल हिन्दी साहित्य में रामचरितमानस के पश्चात् अपना एक विशेष महत्व रखता है । भक्तमाल बड़ा ही लोकप्रिय ग्रंथ रहा है। भक्त मंडली में इस ग्रंथ का सदैव से ही सम्मान किया गया है। इसकी लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है …

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अपराध और बाल अपराध में अंतर

बाल अपराध (Child crime) कम आयु बालकों द्वारा किए समाज विरोधी कार्यों या अपराधों को बाल अपराध कहते हैं। यह अपराध निश्चित आयु से कम के बच्चों के द्वारा किया जाता है।  बाल अपराधियों की उच्चतम आयु सीमा मिस्र, इराक, लेबनान तथा सीरिया में 15 वर्ष, फिलीपाइन्स, लंका, बर्मा तथा इंग्लैण्ड में 16 वर्ष, भारत में लड़कियों …

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चैतन्य महाप्रभु का जीवन परिचय

महाप्रभु चैतन्य का जन्म 18 फरवरी 14861 ई० को नदिया जिले के मायापुर नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम जगन्नाथ मिश्र तथा माता का नाम शची देवी था। कुछ समय व्यतीत हो जाने के बाद इन्हें पाठशाला भेजा गया। गुरु सुदर्शन की दीक्षा के अनुसार कुछ ही समय में संस्कृत व्याकरण में विशेष …

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जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत

वर्द्धमान महावीर जैन-धर्म के चौबीसवें तीर्थङ्कर थे। जैन परम्परा के अनुसार प्रथम तीर्थङ्कर थे ऋषभदेव और तेईसवें थे पार्श्वनाथ। शेष तीर्थङ्करों के क्रमशः ये नाम मिलते है – अजितनाथ, सम्भवनाथ, अभिनन्दन, सुमतिनाथ, पद्यप्रभ, सुपार्श्वनाथ, चन्द्रप्रभ सुविधिनाथ, शीतलनाथ, श्रेयांशनाथ, वासुपूज्य, मिलनाथ, अनन्तनाथ, धर्मनाथ, शांतिनाथ, कुन्थुनाथ, अरनाथ, मल्लिनाथ, मुनि सुव्रत, नमिनाथ तथा नेमिनाथ ( अरिष्ट नेमिनाथ)  इन तीर्थङ्करों …

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वल्लभाचार्य का जीवन परिचय

मध्ययुगीन जनमानस की वीणा पर कृष्ण भक्ति की जो रागिनी अवतरित हुई, वल्लभाचार्य उसके अमर गायकों में से हैं। वल्लभाचार्य भक्ति सम्प्रदाय के आचार्यों में अंतिम प्रमुख आचार्य है । वल्लभाचार्य ने भक्ति के शास्त्रप्रतिपादित रुप को ही अधिक महत्व दिया। उत्तर भारत में कृष्ण भक्ति के दृढ़ीकरण में आचार्य वल्लभ का योगदान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। …

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इब्नबतूता कौन था वह किस काल में भारत आया था?

इब्नबतूता का जन्म 24 फरवरी, सन् 1304 ई0 को अफ्रीका के तंजा नाम के स्थान पर हुआ था । 1333 ई0 में वह भारत की सैर करने के लिए आया । जब वह मुहम्मद तुगलक के दरबार में पहुँचा तो सुल्तान उससे बहुत प्रसन्न हुआ । अतः उसने इब्नबतूता को 9 जून, 1334 ई0 को दिल्ली …

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ग्वालियर घराने का परिचय, ग्वालियर घराने की विशेषता

ख्याल गायकों के संदर्भ में ग्वालियर घराना सर्व प्रसिद्ध घराना माना जाता है। इस घराने की शुरूआत नत्थन पीरबख्श (लगभग 18वीं शती) से मानी गई है। डॉ० परांजपेजी के अनुसार, “ग्वालियर घराना लखनऊ घराने से निकला। लखनऊ के प्रसिद्ध कव्वाली गायक गुलाम रसूल के प्रपौत्र शक्कर खाँ और मक्खन खाँ लखनऊ के प्रसिद्ध गायक थे । …

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