सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 क्या है ?

भारत के संविधान के अनुच्छेद 17के अनुशरण में, अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955 अधिनियमित किया गया था और इसे 8-5-1955 को अधिनियमित किया गया तथा वर्ष 1976 में इसमें संशोधन करते हुए इसका नाम बदल कर “सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955” रखा गया। यह अधिनियम समस्त भारत में लागू है और इसमें अश्पृश्यता की पृथा के संबंध …

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शब-ए-बारात क्यों मनाया जाता है?

शबेबरात का त्यौहार मुस्लिम समुदाय में प्रतिवर्ष शाबान के महीने की पन्द्रहवीं रात को मनाया जाता है। मुस्लिम समुदाय के लोग शबेबरात पर्व में मकानों की सफाई करते हैं, तरह-तरह से सजाते है और ‘शीतचंपक’ जलाते हैं। शबेबरात के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग पूरी रात जागकर अल्लाह से प्रार्थना करते हैं तथा पवित्र कुरान की …

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जौहर प्रथा क्या है? जौहर प्रथा का इतिहास

राजपूत जाति की नारियाँ सतीत्व का बहुत अधिक ध्यान रखतीं थीं । इसी कारण उनमें जौहर प्रथा का प्रचलन हुआ । जौहर की प्रथा प्रायः राजपूतों तक ही सीमित थी । यद्यपि अन्य उदाहरण की भी कमी नहीं है ।’ जब युद्ध में राजपूत सरदार और उनके योद्धा पराजय के निकट आ जाते तो वे बहुधा …

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महाराजा रणजीत सिंह का जीवन परिचय

अठारहवीं शती के अंतिम चरण में महाराजा रणजीत सिंह का जन्म सन् 1780 में गुजरांवाला में हुआ था । भारत-विभाजन के बाद यह क्षेत्र पाकिस्तान में चला गया । पंजाब पर उन दिनों सिखों और अफगानों की हुकूमत चलती थी । उस समय पूरा इलाका कई मिसलों में बँटा हुआ था । उन्हीं मिसलों में एक …

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जयपुर घराने का इतिहास, जयपुर घराने की विशेषताएँ

जयपुर घराना का आरम्भ जयपुर के करामत अली और मुबारक अली (लखनऊ वालों) से माना जा सकता है। ये दोनों महाराज रामसिंह के दरबारी गायक थे। कोल्हापुर के सुप्रसिद्ध गायक स्व. अल्लादिया खाँ जयपुर के माने हुए कलाकार थे। ये ध्रुवपद की डागुरवाणी के कलाकारों के वंषज थे। इस घराने में जयपुर, ग्वालियर और लखनऊ घरानों …

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चित्रकूट का सामान्य परिचय

प्राकृतिक सौन्दर्य एवं खनिज सम्पदाओं से भरपूर जनपद – चित्रकूट भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक आस्था का प्राचीन केन्द्र रहा है। चित्रकूट का वर्णन सृष्टि के आदिकाल से मिलता है। त्रेता युग में इच्छवाकु की 65वीं पीढी में उत्पन्न बनवासी श्री राम की लगभग साढ़े ग्यारह वर्ष तक यह पावन स्थली कर्मस्थली रही है। चित्रकूट अपनी प्रभु विस्मयता …

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महमूद गजनी ने भारत पर आक्रमण क्यों किया इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?

महमूद का जन्म ६७१ ई० में हुआ था। उनकी माता जाबुलिस्तान के एक सरदार की कन्या थीं। किशोरावस्था में ही उसने हिरात, खुरासान, नेशापुर आदि के विरूद्ध तथा पंजाब के जयपाल के खिलाफ युद्धों में अपने पिता को सक्रीय सहयोग दिया था । वह युद्धकला एवं राजकौशल में अत्यंत प्रवीण था। सुबुक्तगीन की मृत्यु के पश्चात् …

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दिल्ली घराना का इतिहास, दिल्ली घराने की विशेषताएँ

यह घराना मुहम्मदशाह रंगीले के दरबार में पनपा । मुहम्मदशाह रंगीले के दरबारी गायक नियामत खाँ, जिन्हें सदारंग तथा अदारंग के नाम से जाना जाता है, अनेक ख्याल बनाए, बल्कि भातखण्डे क्रमिक पुस्तक मालिका में सदारंग और अदारंग के नाम से सैकड़ों ख्यालों का संग्रह विद्यमान है। ये दोनों गायक ध्रुवपद कलाकार थे साथ ही उत्तम कोटि …

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वर्ण व्यवस्था का अर्थ और प्राचीन भारतीय साहित्य में वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति

प्राचीन हिन्दू शास्त्रकारों ने वर्ण व्यवस्था का विधान समाज की विभिन्न श्रेणियों के लोगों में कार्यो का उचित बँटवारा करके सामाजिक संगठन बनाए रखने के लिए किया ताकि प्रत्येक मनुष्य अपने-अपने निर्दिष्ट कर्तव्यों का पालन करते हुए आपसी मतभेदों एवं वैमनस्य से मुक्त होकर अपना तथा समाज का पूर्ण विकास कर सके। यह सामूहिक पद्धति से …

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व्रत या उपवास कितने प्रकार के होते हैं ?

सांस्कृतिक भारतीयता में व्रतों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए उनके प्रकारों में विभिन्नता होना स्वाभाविक है। व्रत और उपवास का परस्पर अन्योन्याश्रित सम्बद्ध होता है। उनमें मूलभूत अंतर यह है कि जहां व्रत में भोजन (अन्न) का सेवन किया जा सकता है, वहीं उपवास में पूर्ण रूप से निराहार रहना पड़ता है। उचित विधि-विधान से …

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