हिंदू सामाजिक जीवन में धर्म के महत्व की विवेचना

हिन्दू धर्म अगणित रूपों में हिन्दुओं के सामाजिक जीवन को अनुप्राणित करता रहा है। वह जन्म से लेकर मृत्यु तक सामान्यतः प्रत्येक हिन्दू के जीवन को अनेक धार्मिक विश्वासों, विधि- संस्कारों, आराधना विधियों और कर्तव्य पालन में दृढ़ आस्था आदि रूपों में प्रभावित करता रहा है।  हिंदू सामाजिक जीवन में धर्म का महत्व सामाजिक जीवन में …

Read more

निर्गुण भक्ति धारा की शाखाएँ || निर्गुण भक्तिधारा की विशेषताएं

निर्गुण भक्ति धारा के अन्तर्गत ईश्वर के निराकार रूप की उपासना तथा ज्ञान और प्रेम द्वारा ईश्वर पा्रप्ति की बात कही गयी। तो सगुण भक्ति-धारा में ईश्वर के साकार सगुण रूप की उपासना राम और कृष्ण रूप में भगवान विष्णु के अवतारों की कल्पना करके सख्य और सेवक भाव से भक्ति कर ईश्वर की प्राप्ति का …

Read more

लेखा शास्त्र क्या है? शासकीय लेखा-शास्त्र के सिद्धांत एवं विधियां

लेखा शब्द का वित्तीय तात्पर्य इस प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है कि यह उन तथ्यों का विवरण देता है जो धन सम्बन्धी हैं या उन चीजों से सम्बन्धित हो जिनकी धन में मान्यता हो। वह तथ्य जिन्हें लेखा-शास्त्र के विवरण में सम्मिलित किया जाता है ‘‘कार्यविवरण’’ कहलाते हैं। सभ्यता के प्रारम्भिक चरणों में अभिलिखित …

Read more

समास किसे कहते हैं समास के भेद कितने होते हैं ?

समास का अर्थ है – संक्षिप्तीकरण। जब दो शब्दों को मिलाते हैं तो दोनों के बीच का सम्बन्ध सूचक शब्द लुप्त हो जाता है। इस प्रकार अनेक शब्दों के लिए एक समस्त पद बना लिया जाता है, इसे ही समास कहते है। कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक अर्थ प्रकट करना समास का प्रमुख …

Read more

वर्ग संघर्ष का क्या अर्थ है वर्ग संघर्ष सिद्धांत का महत्व, निष्कर्ष, आलोचना?

वेपर के अनुसार मार्क्स के चिन्तन में वर्ग संघर्ष की धारणा का विशिष्ट महत्व है। उसका वर्ग संघर्ष का सिद्धांत उसकी इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या और अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत पर आधारित है। सेबाइन के अनुसार मार्क्स वर्ग संघर्ष को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम मानता है और आदिकाल में अब तक के समस्त परिवर्तनों को उसी …

Read more

ईसाई धर्म की मुख्य विशेषताएँ

ईसाई धर्म का उल्लेख बाईबिल में मिलता है । ईसाई धर्म अपने अनुयायिओं को दस आदेश का पालन करने का निर्देश देता है । ईसाई धर्म भाईचारा, दया, करूणा और सहिष्णुता का पाठ पढ़ाता है । ईसाई धर्म का मानना है कि ईश्वर समय-समय पर जन-कल्याणार्थ पृथ्वी पर अवतारित होते हैं । यह धर्म भी इस्लाम …

Read more

व्यावहारिक शोध क्या है ?

जब उपयोगितावादी दृष्टिकोण को लेकर उद्योग या प्रशासन के लिए तथ्यों का संकलन किया जाता है एवं नीति-निर्माताओं को इसकी आवश्यकता होती है तो इसे व्यावहारिक शोध के नाम से जाना जाता है। होर्टन तथा हंट ने बताया है कि जब किसी ऐसे ज्ञान की खोज के लिए वैज्ञानिक पद्धति का प्रयोग किया जाता है जिसकी …

Read more

कार्ल मार्क्स के सामाजिक परिवर्तन का सिद्धांत की संक्षिप्त व्याख्या

मार्क्स के अनुसार, समाज कोई अस्थायी ढांचा नहीं बल्कि गतिशील परिपूर्णता है। इस परिपूर्णता को आर्थिक कारक ही गति प्रदान करता है। आर्थिक कारक पर अपने सम्पूर्ण सामाजिक परिवर्तन के सिद्धांत को आधारित करते हुए मार्क्स ने लिखा है, राजनीतिक, न्यायिक, दार्शनिक, साहित्यिक और कलात्मक विकास आर्थिक विकास पर निर्भर होता है। लेकिन ये एक-दूसरे पर …

Read more

पारसी धर्म के संस्थापक कौन थे ?

पारसी धर्म के संस्थापक जरत्रास्ट को माना गया है । इसकी उत्पत्ति ईसा पूर्व 600 वर्ष पूर्व ईरान में हुआ। पारसी धर्मावलम्बियों की संख्या अधिकांशतः महाराष्ट्र में है जो कि कुल जनसंख्या का 6.43 प्रतिशत है । पारसी धर्म में ईश्वर को होरमज्द कहा जाता है । हिन्दू धर्म की धार्मिक पुस्तक वेद की तरह इनकी …

Read more

हीगल कौन थे, हीगल का जन्म कब हुआ था?

हीगल (1770-1831) एक महान् द्वन्द्ववादी विचारक थे जिनकी सृजनात्मक उपलब्धियां दार्शनिक और राजनीतिक विधिक चिन्तन के समूचे इतिहास में एक अत्यन्त महत्वपूर्ण है। उनका नाम जर्मन आदर्शवादी परम्परा के मूल प्रवर्तकों में काण्ट के पश्चात लिया जाता है। उसके ग्रन्थों में राजनीतिक आदर्शवाद अपनी चरम सीमा तक पहुंच गया। हीगल का जन्म जर्मनी के एक नगर …

Read more