क्षेत्र पंचायत का गठन, चुनाव प्रणाली, अधिकार एवं शक्तियां

तिहत्तरवें संविधान संषोधन के अन्र्तगत नर्इ पंचायत राज व्यवस्था में पंचायतें तीन स्तरों पर गठित की गर्इ है। विकेन्द्रीकरण की नीति ही यह कहती है कि सत्ता, शक्ति व संसाधनों का बंटवारा हर स्तर पर हो। तीनों स्तर पर पंचायतों के द्वारा लोगों की प्राथमिकताओं के अनुसार विकास योजनायें बनाइर् जाती है। पंचायतों को इस व्यवस्था …

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अनुवाद की प्रकृति और प्रकार

अनुवाद की प्रकृति (अर्थात् अनुवाद-क्रिया कला के अन्तर्गत आता है या विज्ञान के या शिल्प के) के साथ-साथ अनुवाद के विविध प्रकार एवं प्रभेद की भी चर्चा की जा रही है। अनुवाद की प्रकृति  ‘अनुवाद’ एक कर्म के रूप में बेहद जटिल क्रिया है और एक विधा के रूप में बहुत संश्लिष्ट। यही कारण है कोर्इ …

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ग्राम पंचायत का गठन, चुनाव प्रणाली, कार्य, एवं शक्तियां

संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को मजबूती प्रदान की गर्इ है। इस अधिनियम के द्वारा स्थानीय स्वशासन व विकास की इकार्इयों को एक पहचान मिली है। त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में ग्राम पंचायत ग्राम विकास की पहली इकार्इ मानी गर्इ है। गांव के लोगों के सबसे नजदीक होने के कारण इसका अत्यधिक महत्व …

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अनुवाद का अर्थ, परिभाषा एवं क्षेत्र

भारत में अनुवाद की परम्परा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। कहते हैं अनुवाद उतना ही प्राचीन जितनी कि भाषा। आज ‘अनुवाद’ शब्द हमारे लिए कोर्इ नया शब्द नहीं है। विभिन्न भाषायी मंच पर, साहित्यिक पत्रिकाओं में, अखबारों में तथा रोजमर्रा के जीवन में हमें अक्सर ‘अनुवाद’ शब्द का प्रयोग देखने-सुनने को मिलता है। …

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ग्राम सभा की बैठक एवं कार्य

नयी पंचायत व्यवस्था के अन्र्तगत ग्राम सभा को एक महत्वपूर्ण इकार्इ के रूप में माना गया है। एक आदर्श पंचायत की नींव ग्राम सभा होती है। अगर नींव मजबूत है तो सारी व्यवस्था उस पर टिकी रह सकती है अगर नींव ही कमजोर या ढुलमुल है तो व्यवस्था किसी भी समय ढहनी निश्चित है। अत: एक …

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सामूहिक सौदेबाजी का अर्थ

ऐतिहासिक दृष्टि से सामूहिक सौदेबाजी की अवधारणा का विकास सामूहिक सम्बन्धों के विकास के तृतीय चरण में हुआ। उत्पादन कार्य को प्रारम्भिक स्थिति में फल की प्राप्ति शक्ति के आधार पर की जाती थी दूसरी स्थिति में सामाजिक विधान के आधार पर और तीसरे तीसरी स्थिति में पारस्परिक विचार-विमर्श एवं समझौते के आधार पर सामूहिक समझौते …

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स्थानीय स्वशासन का अर्थ और पंचायतें

स्थानीय स्वशासन लोगों की अपनी स्वयं की शासन व्यवस्था का नाम है। अर्थात् स्थानीय लोगों द्वारा मिलजुलकर स्थानीय समस्याओं के निदान एवं विकास हेतु बनार्इ गर्इ ऐसी व्यवस्था जो संविधान और राज्य सरकारों द्वारा बनाए गये नियमों एवं कानून के अनुरूप हो। दूसरे शब्दों में ‘स्वशासन’ गांव के समुचित प्रबन्धन में समुदाय की भागीदारी है। यदि …

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औद्योगिक सम्प्रेषण या औद्योगिक संचार

सम्प्रेषण विचारों के आदान-पद्रान की ऐसी प्रणाली है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है, उसके विचार समझ सकता है तथा दूसरे को अपने बारे में या अपने विचारों से अवगत करा सकता है। इस प्रकार, सम्प्रेषण एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे एक व्यक्ति को किसी वक्ता के …

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विकेन्द्रीकरण की अवधारणा, आवश्यकता एवं महत्व

आज विश्व स्तर पर विकेन्द्रीकरण की सोच को विषेश महत्व दिया जा रहा है। प्रशासन एवं अभिशासन में आम जन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विकेन्द्रीकरण की व्यवस्था को अपनाना वर्तमान समय की बहुत बड़ी आवश्यकता है। भारत के सन्दर्भ में विकेन्द्रीकरण की व्यवस्था सम्पूर्ण शासन प्रणाली के समुचित संचालन के लिए बहुत जरूरी …

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प्रबंध में श्रमिकों की सहभागिता का अर्थ

औद्योगिक संबंध के दो महत्वपूर्ण पहलू होते है। ये है- संघर्ष तथा सहयोग के पहलू। आधुनिक उद्योग प्रबंध और श्रम के सहयोग के कारण ही चलते रहते हैं यह सहयोग नियोजन में अनौपचारिक रूप से स्वत: होता रहता है। उद्योगों का चलते रहना दोनों के हितों में आवश्यक है। साथ ही, नियोजन और श्रमिकों के कुछ …

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