विज्ञापन का इतिहास
आदिकाल से ही भारत में विभिन्न अवसरों पर विज्ञापन अपने किसी न किसी स्वरूप में उपस्थित रहा है। आध्यात्मिक से लेकर पौराणिक कहानियों में अनेक घटनाओं का उल्लेख मिलता है जिससे बड़े आधार पर ‘विज्ञापन’ के लिए तत्कालीन प्रचार-माध्यमों का प्रयोग किया गया था। ढोल-नगाड़ों के साथ मुनादी करवाना या डुगडुगी बजाकर राजाओं के निर्देशों के …