सामाजिक परिवर्तन का अर्थ, परिभाषा एवं सिद्धांत

सामाजिक परिवर्तन के अन्तर्गत हम मुख्य रूप से तीन तथ्यों का अध्ययन करते हैं- (क) सामाजिक संरचना में परिवर्तन, (ख) संस्कृति में परिवर्तन एवं (ग) परिवर्तन के कारक। सामाजिक परिवर्तन के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए कुछ प्रमुख परिभाषाओं पर विचार करेंगे। मकीवर एवं पेज (R.M. MacIver and C.H. Page) ने अपनी पुस्तक Society में सामाजिक …

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गैर सरकारी संगठन के अर्थ आवश्यकता तथा प्रकार्य

भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जहाँ जनता के द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन चलाया जाता है। भारत की स्वाधीनता के साथ ही देश के नए भाग्य विधाताओं ने ‘‘कल्याणकारी राज्य’’ की कल्पना को मूर्त रुप प्रदान करने के लिए राज्य और केन्द्र की सरकारों का स्वरुप निर्धारित किया था। इन सरकारों के अन्र्तगत जन …

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ग्रामदान की अवधारणा

यदि किसी गॉव में रहने वाले 80 प्रतिशत भू-स्वामी अपनी भूमि का स्वामित्व भूमिहीनों को प्रदान कर दें तथा प्रदान की गयी यह भूमि सम्पूर्ण भूमि के 51 प्रतिशत से अधिक हो तो गॉव का ग्रामदान में मिली हुयी भूमि का स्वामित्व सम्पूर्ण समुदाय का होता है, किसी एक व्यक्ति का नहीं । ग्रामदान के महत्व …

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सामाजिक क्रिया का अर्थ, परिभाषा एवं प्रारूप

सामाजिक क्रिया समाज कार्य की सहायक प्रणाली है। प्रारम्भ से ही समाज कार्य का आधार मानवता रही है। सामाजिक क्रिया का जिसे प्रारम्भ में समाज सुधार का नाम दिया गया है, समाज कार्य के अभ्यास में एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है।1922 में मेरी रिचमंड ने सामाजिक क्रिया का उल्लेख समाज कार्य की चार प्रमुख प्रणालियों के …

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सहकारी आन्दोलन

सहकारिता के विचार ने भारत में ठोस रूप सबसे पहले उस समय ग्रहण किया जब गॉवों में विधमान ऋृण भार का सामना करने के लिए 1904 में सहकारी ऋण समितियां अधिनियम पारित हुआ। इस अधिनियम में केवल ऋण समितियों की रचना के लिए ही व्यवस्था की गयी थी इसलिए गैर ऋण समितियों की रचना के लिए …

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सामुदायिक विकास कार्यक्रम

सामुदायिक विकास सम्पूर्ण समुदाय के चतुर्दिक विकास की एक ऐसी पद्धति है जिसमें जन-सहभाग के द्वारा समुदाय के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने का प्रयत्न किया जाता है। भारत में शताब्दियों लम्बी राजनीतिक पराधीनता ने यहाँ के ग्रामीण जीवन को पूर्णतया जर्जरित कर दिया था। इस अवधि में न केवल पारस्परिक सहयोग तथा सहभागिता की भावना …

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सर्वोदय की अवधारणा एवं विशेषताएं

महात्मा गांधी जान रस्किन की प्रसिद्व पुस्तक ‘‘अन टू दा लास्ट’’ से बहुत अधिक प्रभावित थे। गांधी जी के द्वारा रस्किन की इस पुस्तक का गुजराती भाशा में सर्वोदय “रीशक से अनुवाद किया गया। इस में तीन आधारभूत तथ्य थे-  सबके हित में ही व्यक्ति का हित निहित है।  एक नार्इ का कार्य भी वकील के …

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सामुदायिक संगठन के प्रारूप,आयाम एवं रणनीतियां

वर्तमान सामुदायिक जीवन के अध्ययन व अवलोकन से ज्ञात होता है कि पूर्व सामुदायिक जीवन की अपेक्षा वर्तमान सामुदायिक जीवन से विभिन्न परिवर्तन हुये है जैसे कि औद्योगीकरण, नगरीकरण, यातायात और संचार की सुविधाओं इत्यादि प्रगति के कारण सामुदायिक जीवन में परिवर्तन सम्भव हुआ है। इन सब प्रगति के फलस्वरूप सामुदायिक जीवन में विघटन, असंतोश, अपराध, बाल …

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विकास के सिद्धान्त का अर्थ, परिभाषा एवं प्रारूप

विकास का व्यक्ति, समूह और समाज पर प्रभाव पड़ता है और सामाजिक परिवर्तन का विकास से सह-सम्बन्ध है। विकास का प्रारूप आर्थिक हो अथवा सामाजिक, राजनैतिक हो अथवा संसथागत, भौतिक हो अथवा अभौतिक जन-भावना की सन्तुश्टीकरण से सैद्धान्तिक रूप से जुड़ा है। विकास के सिद्धान्त का अर्थ एवं परिभाषा विकास एक उध्र्वगामी प्रक्रिया है जिसे नियोजित …

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नगर-निकाय के कार्य एवं शक्तियां

किसी भी संगठन या संस्था के आस्तित्व का कोर्इ औचित्य नहीं है जब तक कि उसे उसके गठन व स्वरूप के अनुरूप कार्यों व शक्तियां प्रदान नहीं की जाती। बिना कार्यों व जिम्मेदारियों के बिना वह संगठन केवल एक ढाँचा मात्र है। 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के अन्र्तगत नगर निकायों को शहरी क्षेत्रों में स्वशासन स्थापित …

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