हंटर कमीशन 1882 की सिफारिशें क्या थी ?

हन्टर कमीशन- शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति के लिये एक दूसरा महत्वपूर्ण कदम 1882 में हन्टर कमीशन की नियुक्ति था।  हंटर कमीशन 1882 की सिफारिशें इसने अपनी रिपोर्ट में सिफारिशें पेश कीं-  उच्च शिक्षा संस्थाओं के प्रबन्ध तथा प्रत्यक्ष रूप में सहायता करने से सरकार धीरे-धीरे अपना हाथ खींच ले। यदि सम्भव हो सके तो इसे भारतीयों …

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मथुरा कला शैली की प्रमुख विशेषताएं क्या है

कुषाण काल की कला का दूसरा केंद्र मथुरा था। सहिष्णुता इस काल की एक खास विशेषता थी। यही कारण था कि इस कला शैली में जैन, बौद्ध तथा ब्राह्मण तीनों धर्माें के देवताओं की मूर्तियां बनाई गई।  मथुरा – शैली की मूर्तियों में विविधता है। ये मूर्तियां सफेद चित्तीदार पत्थर पर बनाई गई हैं। इस शैली में …

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परमाणु के सिद्धांत की खोज किसने की

सदियों से लोग इस बात से सहमत थे कि कोई पदार्थ अणुओं से बना होता है, लेकिन किसी ने भी इसका कोई प्रयोगात्मक प्रमाण नहीं दिया था। इस काम के लिए सबसे पहले ब्रिटिश वैज्ञानिक जाॅन डाल्टन ने सफलता हासिल की थी। डाल्टन के सिद्धान्त के दूरगामी परिणाम हुए और हमें इस बात का पता चला …

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बलिया जिला कब बना या बलिया जिले का गठन कब हुआ?

बलिया जिला भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित एक खूबसूरत जिला है। यह उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्थित है और बिहार राज्य के साथ सीमा साझा करता है। यह दो पवित्र नदियों गंगा और सरयू (घाघरा) के बीच स्थित एक शानदार जिला है। बलिया ने हिन्दी साहित्य में बहुत योगदान दिया है, क्योंकि …

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Muntakhab-ul lubab (मुन्तख़ब उल लुबाब) के रचनाकार/लेखककौन है?

मुन्तख़ब उल लुबाब के लेखक का नाम मुहम्मद हाशिम खाँफी खाँ था। जो इतिहास लेखन के रूप में काफी प्रसिद्ध थे। वह एक सुलझा हुआ इतिहासकार था। इस फारसी ग्रंथ मुन्तखव-उल-लुबाब में तैमूर के वंश का इतिहास दिया गया है। यह ग्रंथ तीन भागों में विभक्त है। इसके पहले भाग में तुर्को की भारत विजय से …

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शरीर में फास्फोरस के कार्य

फाॅस्फोरस क्षुद्रान्त में अर्काबनिक फाॅस्फेटों के रूप में अवशोषित होता है। अन्त्र का अम्लीय माध्यम तथा कैल्शियम की उपस्थिति अवशोषण में सहायक होती है। फाॅस्फोरस प्रत्येक कोशिका में होता है। शरीर में इसकी कमी की बहुत कम सम्भावना रहती है। यह फाॅस्फोप्रोटिन के रूप में, दूध की केसिनोजन में फाॅस्फोटाइड के रूप में एवं अण्डे यकृत …

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चंद्रगुप्त द्वितीय की उपलब्धियां का वर्णन

चंद्रगुप्त द्वितीय (375-414ई०) चंद्रगुप्त द्वितीय गुप्त राजवंश का दूसरा महान शासक एवं भारत के योग्य शासकों में से एक था। चंद्रगुप्त द्वितीय ही इतिहास में चंद्रगुप्त ‘विक्रमादित्य’ के नाम से भी प्रसिद्धि प्राप्त है । उसका अन्य नाम ‘देवगुप्त’, ‘देवराज’, ‘देवश्री’ भी थे। वह समुद्रगुप्त का पुत्र था। समुद्रगुप्त की मृत्यु के बाद 375 ई० में चंद्रगुप्त …

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दालचीनी के औषधीय गुण

दालचीनी लगभग हर भारतीय रसोई में आसानी से मिल जाती है, इसका इस्तेमाल खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ साथ औषधि की तरह भी किया जाता है। दालचीनी के औषधीय गुण 1. दालचीनी एंटी-आक्सीडेंट्स से भरपूर होती है।   2. औषधीय पौधों पर किए गये अध्ययन के दौरान दालचीनी में एंटी-इंफ्लामेटरी प्रभाव होने की भी पुष्टि हुई …

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मैडम भीकाजी कामा का जीवन परिचय

मैडम भिखई जी रूस्तम कामा का जन्म सितम्बर 1861 को बम्बई के एक सम्पन्न पारसी परिवार में हुआ था। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के आरंभिक दौर में मेडम कामा ने विदेशों में 35 वर्ष तक क्रांतिकारी कार्यो को जीवित रखा। पारसी क्रांतिकारियों में जमशेदजी टाटा, दादा भाई नौरोजी, दिनशा वांछा, फिरोजशाह मेहता, फिरोज गांधी और भारत …

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दालों में कितने प्रतिशत स्टार्च, प्रोटीन, कैल्शियम पाया जाता है?

हमारे देश में मुख्यतः मूंग, मसूर, उड़द, चना, राजना, लोबिया, सोयाबीन, कुलथ, अरहर की दालों का उत्पादन व उपयोग किया जाता है। इनका उपयोग दो रूप में होता है। साबुत दालें व टूटी हुई दालें। दालें में प्रोटीन एवं पौष्टिक तत्व दालों में 20-25% तक प्रोटीन पाई जाती है, परन्तु इनका जैव मूल्य,, प्राणी जगत से …

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