दूरस्थ शिक्षा का प्रारूप एवं आवश्यकता

मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा की अवधारणा  दूरस्थ शिक्षा शब्द से ही स्पष्ट है कि दूर से ही स्थान पर प्रदत्त शिक्षा। दूरस्थ शिक्षा से तात्पर्य ऐसे गैर प्रचलित और अपरम्परागत शिक्षा के मानकों पर एक प्रण्न चिन्ह लगाते हुये इनसे अलग विशेषताओं को धारण करने वाली शिक्षा से है। दूरस्थ शिक्षा विविध शैक्षिक पृष्ठभूमि वाले तथा …

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रवीन्द्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय एवं शिक्षा दर्शन

रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म बंगाल के एक अत्यंत ही सम्पन्न एवं सुसंस्कृत परिवार में 6 मर्इ, 1861 को हुआ था। धर्मपरायणता, साहित्य में अभिरूचि तथा कलाप्रियता उन्हें विरासत में मिली। वे महर्षि देवेन्द्रनाथ टैगोर के कनिष्ठ पुत्र थे। महर्षि देवेन्द्रनाथ टैगोर अपने समय के प्रसिद्ध विद्वान एवं उत्साही समाज सुधारक थे। इन्होंने ही सर्वप्रथम 1863 र्इ0 …

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वैयक्तिक एवं सामूहिक परामर्श की अवधारणा व आवश्यकता

वैयक्तिक परामर्श, अवधारणा व आवश्यकता  आमतौर पर परामर्श व्यक्तिगत रूप से ही सम्पन्न होता है। परामर्श किसी भी प्रकार की आवश्यकता पर व्यक्तिगत रूप में ही दिया जाता है। व्यक्तिगत परामर्श में व्यक्ति की समंजन क्षमता बढ़ाने उसकी निजी समस्याओं का हल ढूढ़ने तथा आत्मबोध की क्षमता उत्पन्न हेतु दी जाने वाली सहायता होती है।यह कहना …

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श्री अरविन्द का जीवन परिचय

श्री अरविन्द का जन्म 15 अगस्त, 1872 को कलकत्ता में हुआ था। वे तीन भार्इयों में कनिष्ठ थे। उनके पिता कृष्णधन घोष एक प्रसिद्ध चिकित्सक थे। उन्होंने इंग्लैंड में चिकित्साशास्त्र का अध्ययन किया था। वे पाश्चात्य संस्कृति को श्रेष्ठ मानते थे और उसी रंग में रंगे हुए थे। उनकी माता श्रीमती स्र्वणलता देवी प्रसिद्ध राष्ट्रवादी राजनारायण …

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परामर्श के प्रकार

कुछ विद्वानों ने परामर्श के अन्य तीन प्रकारों का उल्लेख किया है यथा- निदेशात्मक परामर्श-इस प्रकार के परामर्श में परामर्शक ही सम्पूर्ण प्रक्रिया का निर्णायक होता है। प्रत्याशी परामर्शदाता के ओदशों के अनुकूल अपने को ढालता है। इसे कभी-कभी आदेशात्मक परामर्श भी कहते हैं। इस क्रिया के मूल में परामर्शक ही रहता है।  अनिदेशात्मक परामर्श-इस प्रकार के …

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सामुदायिक संगठन में निपुणता

सामुदायिक संगठन समाज कार्य की एक प्रणाली है। एक प्रणाली का अर्थ ज्ञान और सिद्धान्तों का योग ही नही है। प्रणाली का अर्थ ज्ञान और सिद्धान्तों का एक क्रियाकलाप में इस प्रकार प्रयोग कि उससे परिवर्तन हो जाए। यही निपुणता कहलाती है। इसे वर्जीनिया रॉबिन्सन (Virginia Robinson) ने किसी विशेष पदार्थ में परिवर्तन की एक प्रक्रिया …

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एनजीओ (NGO) के गठन हेतु नियम एवं नियमावली

समाज कल्याण का मूल प्रारम्भ स्वयंसेवी क्रिया में देखा जा सकता है जिसने इसे पिछली अनेक शताब्दियों से वर्तमान तक जीवित रखा है। भारत में सामाजिक हित के लिए स्वयंसेवी कार्य की गौरवपूर्ण परम्परा रही है। स्वयंसेवी शब्द लैटिन भाशा के शब्द, जिसका अर्थ है ‘इच्छा’ अथवा ‘स्वतंत्रता’ से लिया गया है। हैराल्ड लास्की ने समुदाय …

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सामुदायिक संगठन की प्रक्रिया

ग्रामीण जीवन पर सामुदायिक योजना के प्रभाव  सामुदायिक विकास योजना ,ग्रामीण जीवन के आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृति विकास में अत्यधिक महत्वपूर्ण सिद्ध हुर्इ है। इस योजना के सामाजिक प्रभावों को केवल इसी तथ्य से समझा जा सकता है कि एक सामान्य ग्रामीण का जीवन पहले की अपेक्षा न केवल काफी खुशहाल और सम्पन्न दिखार्इ देता है …

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समाज कल्याण प्रशासन की अवधारणा, प्रकृति एवं कार्य

समाज के प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताओं की पूर्ति उचित ढ़ग से करना, जिससे कि वह सुखी और सन्तोषजनक जीवन व्यतीत कर सके, कल्याणकारी राज्य का प्रमुख उदेद्श्य है। प्रभावकारी सेवाओं को विस्तृत स्तर पर लागू करने के लिए, योजना, निर्देशन, समन्वय और नियंत्रण का सामूहिक प्रयास किया जाता है। समाज कार्य की सेवाओं को व्यवसायिक स्वरूप …

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सामुदायिक संगठन की प्रणालियां एवं कार्यविधियां

सामुदायिक संगठन के उद्देश्यों की प्राप्ति उन संस्थाओं द्वारा, जो सामुदायिक संगठन में लगी रहती है। विशेष प्रकार के क्रियाकलापों द्वारा की जाती है। क्रियाकलापों और विधि या प्रणाली के भेद को इस प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है। क्रियाकलाप एक विशेष परियोजना या सेवा होती है जो प्रणली के प्रयोग होने के परिणामस्वरूप् की जाती …

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