अधिगम (सीखने) का अर्थ एवं सिद्धान्त

सीखने का अर्थ  सीखना अनुभव व प्रशिक्षण द्वारा व्यिक्त्त के व्यवहार में परिवर्तन है। अनुभव दो प्रकार का हो सकता है, प्रथम प्रकार का अनुभव बालक स्वयं ग्रहण करता है जबकि दूसरे प्रकार का अनुभव, अन्य लोगों के अनुभव से लाभ उठाने की श्रेणी में आता है। प्रशिक्षण के अन्तर्गत औपचारिक शिक्षा आती है। एक माँ …

Read more

वृद्धि एवं विकास

अभिवृद्धि व्यक्ति के स्वाभाविक विकास को अभिवृद्धि कहते है। गर्भाशय में भ्रूण बनने के पश्चात जन्म होते समय तक उसमें जो प्रगतिशील परिवर्तन होते है वह अभिवृद्धि है। इसके अतिरिक्त जन्मोपरान्त से प्रौढावस्था तक व्यक्ति में स्वाभाविक रूप से होने वाले परिवर्तन, जो अधिगम एवं प्रशिक्षण आदि से प्रभावित नही है, और ऊध्र्ववर्ती है, भी अभिवृद्धि …

Read more

स्वामी विवेकानन्द का जीवन परिचय एवं शिक्षा दर्शन

12 जनवरी, 1863 को स्वामी विवेकानन्द का जन्म कलकत्ता के एक प्रसिद्ध वकील विश्वनाथ दत्त के घर हुआ। माता प्रेम से उन्हें वीरेश्वर कहती थी पर नामकरण संस्कार के समय उनका नाम नरेन्द्रनाथ रखा गया। बचपन से ही नरेन्द्रनाथ में विलक्षण प्रतिभा के लक्षण दिखते थे। एक तरफ वे अत्यंत ही चंचल थे तो दूसरी तरफ …

Read more

परामर्श की प्रक्रिया

मिस ब्रेगडन ने इन परिस्थितियों के उत्पन्न होने पर परामर्श की आवश्यकता को इंगित किया है- वह परिस्थिति जब कि व्यक्ति न केवल सही सूचनायें चाहता है वरन् अपने व्यक्तिगत समस्याओं का भी समाधान चाहता है। जब विद्याथ्री अपने से अधिक बुद्धिमान श्रोता चाहता है जिससे वह अपनी समस्याओं का समाधान और भविष्य के लिये परामर्श …

Read more

स्वामी दयानंद सरस्वती का जीवन परिचय

स्वामी दयानन्द सरस्वती के बचपन का नाम मूलशंकर था। उनका जन्म सन् 1824 में गुजरात प्रांत के काठियावाड़ सम्भाग में मोरवी राज्य (अब जिला राजकोट) के एक छोटे-से गाँव टंकारा के एक समृद्ध सनातनी परिवार में हुआ था। पिता का नाम करसन लाल जी तिवारी था। वे शैवमत के कट्टर अनुयायी थे। बालक मूलशंकर कभी स्कूल …

Read more

परामर्श की परिभाषा एवं विशेषताएँ

परामर्श शब्द एक प्राचीन शब्द है फलत: इसकी अनेक परिभाषायें हैं। राबिन्सन के अनुसार-’परामर्श शब्दो व्यक्तियों के सम्पर्क में उन सभी स्थितियों का समावेश करता है जिसमें एक व्यक्ति को उसके स्वयं के एवं पर्यावरण के बोध अपेक्षाकृत प्रभावी समायोजन प्राप्त करने में सहायता की जाती है।’ कार्ल रोजर्स ने परामर्श को आत्मबोध की प्रक्रिया में …

Read more

सर टी0 पी0 नन का जीवन परिचय

प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री सर टी0 पी0 नन का जन्म 1870 में, इंग्लैंड में हुआ था। नन अध्यापकों के परिवार से जुड़े थे। उनके पिता और पितामह ने ब्रिस्टल नामक स्थान पर एक विद्यालय की स्थापना की थी। बाद में इसे वेस्टन-सुपर-मेयर नामक स्थान में स्थानान्तरित कर दिया गया। सोलह वर्ष की आयु से ही टी0 पी0 नन …

Read more

कैरियर या वृत्तिक निर्देशन एवम स्थापन्न

वृत्तिक विकास वास्तव में मानसिक विकास के समानान्तर चलता है। बूलर (1933) द्वारा किये गये वृत्तिक विकास के सिद्धान्तों को सुपर (1957) ने प्रयोग किया। सम्पूर्ण वृत्तिक विकास के चरणों में उत्पित्त, व्यवस्थित, रख-रखरखाव एवं पतन की अवस्था मुख्य केन्द्र बिन्दु हैं। जिन्जबर्ग (1951) ने वृत्तिक चयन की अवस्था को निम्न चरणों में बांटा। 1) कल्पना अवस्था …

Read more

हरबर्ट स्पेन्सर के प्रमुख कार्य एवं सिद्धान्त

हरबर्ट स्पेन्सर का जन्म इंग्लैंड के डर्बी नामक स्थान में, 1820 र्इ0 में हुआ था। माता एवं पिता दोनों ही तरफ से वह विद्रोही एवं सुधारवादी धर्मावलम्बियों एवं प्रगतिशील राजनीतिक परिवारों से जुड़ा था। हरबर्ट स्पेन्सर के पिता, विलियम जार्ज स्पेन्सर में यह विरोध का भाव अधिक था। उन्हें दर्शन, साहित्य, विज्ञान आदि का ज्ञान था। …

Read more

व्यावसायिक निर्देशन क्या है ?

यूरोप तथा पश्चिम के अन्य देशों में औद्योगिक क्रान्ति के कारण भौतिकता की लहर समग्र विश्व में दौड़ गयी। अमेरिका जैसे सुविकसित महादेश ने प्रयोजनवादी दर्शन अपनाया जिसके कारण उसके सम्मुख मुख्य समस्या राष्ट्र की सम्पत्ति के पूर्ण उपभोग की हुर्इ। किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए आवश्यक है कि उसकी मानवीय एवं प्राकृतिक पूँजी …

Read more