शब्द किसे कहते हैं/शब्द के कितने भेद होते हैं

ध्वनियों के ऐसे समूह को शब्द कहते हैं जिससे कोई अर्थ व्यक्त होता हो। अर्थ ही शब्द का प्रधान लक्षण है। जिस ध्वनि समूह से कोई अर्थ नहीं निकलता वह ध्वनि समूह शब्द नहीं है। उदाहरणत: क, म, ल, ध्वनियाँ हैं जिनका अपने आप में कोई अर्थ नहीं है। किन्तु इन तीनों को मिलाकर “कमल” ध्वनि …

Read more

अभिवृत्ति का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, विशेषताएँ, मापन की विधियां

अभिवृत्ति व्यक्ति के व्यक्तित्व की वे प्रवृत्तियाँ है, जो उसे किसी वस्तु, व्यक्ति आदि के सम्बन्ध में किसी विशिष्ट प्रकार के व्यवहार को प्रदर्शित करने का निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती हैं। अभिवृत्ति का अर्थ  अभिवृत्ति व्यक्तित्व का वह गुण है जो व्यक्ति की पसंद या नापसंद को दर्शाता है। अभिवृत्ति को आंग्ल भाषा में Attitude …

Read more

मानव संसाधन प्रबंधन के कार्य और उद्देश्य

मानव संसाधन प्रबंधन की अवधारणा प्रबंधन के क्षेत्र की एक नूतन अवधारणा है और यह आज सर्वाधिक प्रचलित अवधारणा के रूप में देखी जाती है। आरम्भ में यह अवधारणा रोजगार प्रबंधन, कार्मिक प्रबंधन, औद्योगिक सम्बन्ध, श्रम कल्याण प्रबंधन, श्रम अधिकारी, श्रम प्रबंधक के रूप में थी और 1960 और उसके बाद में मुख्य शब्द कार्मिक प्रबंधक …

Read more

सार्वजनिक ऋण के उद्देश्य

सार्वजनिक ऋण, राज्य द्वारा आय प्राप्त करने का एक साधन है। लोक अथवा सार्वजनिक ऋण उस ऋण को कहते हैं जिसे कि राज्य (state) अपनी प्रजा से अथवा अन्य देशों के नागरिकों से लेता है। सरकार जब उधार लेती है तो उससे लोक ऋण का जन्म होता है। सरकार बैंकों, व्यावसायिक संगठनों, व्यवसाय गृहों तथा व्यक्तियों …

Read more

विटामिन कितने प्रकार के होते हैं और उनके नाम वसा में घुलनशील तथा पानी में घुलनशील विटामिन्स के समूह

Vitamins का आविष्कार C. Funk ने 1911 में किया था। यह एक ऐसा कार्बनिक यौगिक है जिससे शरीर को ऊर्जा प्राप्त नहीं होती है। (वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देते है।)। शरीर का पदार्थों से ऊर्जा प्राप्त करने का क्रम-1. कार्बोहाइड्रेट 2.वसा 3.प्रोटीन विटामिन की खोज करने से कुछ बीमारियों में भी सहायता मिली। स्कर्वी, …

Read more

लोक व्यय क्या है? लोक व्यय में वृद्धि के कारण

लोक व्यय उस व्यय को कहते हैं, जो लोक सनाओं-अर्थात् केन्द्र, राज्य तथा स्थानीय सरकारों के द्वारा या तो नागरिकों की सामूहिक आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के लिए किया जाता है अथवा उन के आर्थिक एवं सामाजिक कल्याण में वृद्धि करने के लिए। आजकल सरकारी व्यय की मात्रा, संसार के प्राय: सभी देशों में निरन्तर बढ़ रही …

Read more

साम्प्रदायिकता का अर्थ, परिभाषा, सम्प्रदाय एवं साम्प्रदायिकता में अंतर

साम्प्रदायिक शब्द की उत्पत्ति समूह अथवा समुदाय से हुई है, जिसका अर्थ होता है व्यक्तियों का ऐसा समूह जो अपने समुदाय को विशेषरूप से महत्व देता है या अपने धर्म या नस्लीय समूह को शेष समाज से अलग हटकर पहचान देता है। एक सम्प्रदाय के दूसरे सम्प्रदाय के विरुद्ध संयुक्त विरोध को साम्प्रदायिकता कहते हैं।  साम्प्रदायिकता …

Read more

भारतीय संविधान की प्रस्तावना की मुख्य विशेषताएं

प्रत्येक संविधान के प्रारंभ में एक प्रस्तावना होती है । जिसमें संविधान के मूल उद्देश्यों एवं लक्ष्यों को स्पष्ट किया जाता है । यह संविधान का मूल्यवान अंग होने के कारण संविधान की आत्मा, कुंजी तथा मानदण्ड है । यह भारत के प्रजातांत्रिक राज्य का एक संक्षिप्त किन्तु सारपूर्ण घोषणा-पत्र है । भारतीय संविधान की प्रस्तावना …

Read more

वाणिज्यवाद क्रांति से क्या अभिप्राय है, इसके उदय और विकास के कारण

व्यापारिक क्रांति ने एक नवीन आर्थिक विचारधारा को जन्म दिया। इसका प्रारंभ सोलहवीं सदी में हुआ। इस नवीन आर्थिक विचारधारा को वाणिज्यवाद, वणिकवाद या व्यापारवाद कहा गया है। फ्रांस में इस विचारधारा को कोल्बर्टवाद और जर्मनी में केमरलिज्म कहा गया। 1776 ई. में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एडम स्मिथ ने भी अपने ग्रथ ‘वेल्थ ऑफ नेशस में इसका …

Read more

भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएं

संविधान को 26 जनवरी, 1950 को देश भर में लागू किया गया । इस सभा का गठन इसलिए किया गया क्योंकि आजादी के बाद भारत के अपने संविधान की आवश्यकता हुई, जिसके लिए एक समिति का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष डाॅ. भीमराव अम्बेडकर थे । किसी भी देश का संविधान उस देश की सर्वोच्च निधि …

Read more