बैंक की स्थापना का मूल उद्देश्य और इसके कार्य

विश्व बैंक की स्थापना 1944 में अमेरिका के ब्रेटन बुडस शहर में IMF के अलावा जिस अन्य संस्था की स्थापना हुई वह अन्तर्राष्ट्रीय पुनर्निमाण एवं विकास बैंक (International Reconstruction and Development Bank – IRDB) था। इसे विश्व बैंक (World Bank) भी कहा जाता है। इस बैंक की स्थापना का मूल उद्देश्य अपने प्रतिनिधि सदस्य राष्ट्रों के …

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अवमूल्यन का अर्थ, परिभाषा, कारण

प्राय: किसी भी देश की मुद्रा की विनिमय-दर उसकी “स्वाभाविक विनिमय-दर” नहीं कही जा सकती है। वास्तविक विनिमय-दर देश की अपनी तथा उसके साथ आर्थिक सम्बन्ध रखने वाले अन्य देशों की आर्थिक, वित्तीय तथा मौद्रिक नीतियों पर निर्भर करती है। प्रत्येक देश अपनी मुद्रा के लिए एक उपर्युक्त विनिमय दर निर्धारित करता है और उसे निश्चित …

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निजीकरण का क्या अर्थ है निजीकरण के उद्देश्य

निजीकरण का अर्थ है, कि निजी क्षेत्र की कम्पनियों को उन वस्तुओं ओर सेवाओं के उत्पादन की अनुमति प्रदान करना, जिनकी पहले अनुमति नहीं थी । इसमें सरकारी क्षेत्र की कम्पनियों की सम्पति एव संचालन को निजी क्षेत्र को सोपना भी सम्मिलित है। निजीकरण का अर्थ  निजीकरण का अर्थ है सरकार के नियंत्रण से बाहर रहकर …

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प्लेटो का न्याय सिद्धांत | Plato’s Theory of Justice

प्लेटो का न्याय सिद्धांत उसके दर्शन की आधारशिला है। ‘रिपब्लिक’ में वर्णित आदर्श राज्य का मुख्य उद्देश्य न्याय की प्राप्ति है। ‘रिपब्लिक’ में प्लेटो न्याय के स्वरूप तथा निवास स्थान (Nature and Habitation) की विस्तृत चर्चा करता है। ‘रिपब्लिक’ का प्रारम्भ और अन्त न्याय की चर्चा से होता है। प्लेटो ने न्याय को कितना महत्त्व दिया …

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औद्योगिक नीति 1980 क्या है इसके प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं

23 जुलाई, 1980 को कांग्रेस के पुन: सत्ता में आने के कुछ माह पश्चात ही नयी औद्योगिक नीति की घोषणा की गयी। नया नीति प्रस्ताव मूलत: 1956 की औद्योगिक नीति प्रस्ताव के अधीन ही बनाया गया। नये नीति प्रस्ताव के प्रस्ताव में यह उल्लेख किया गया कि 1956 का औद्योगिक नीति प्रस्ताव हमारे देश की मूल्य …

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हीगल का जीवन परिचय एवं उसकी प्रमुख रचनाएँ

जर्मनी के प्रसिद्ध आदर्शवादी दार्शनिक हीगल का जन्म 1770 ई0 में स्टटगार्ट नामक नगर में हुआ। हीगल के पिता वुर्टमवर्ग राज्य में एक सरकारी कर्मचारी थे। वे हीगल को धार्मिक शिक्षा दिलाना चाहते थे। 18 वर्ष की आयु तक हीगल ने स्टटगार्ट के ‘ग्रामर स्कूल’ में शिक्षा ग्रहण की।  1788 ई0 में उसने ट्यूबिनजन के विश्वविद्यालय …

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जॉन स्टुअर्ट मिल का जीवन परिचय, महत्त्वपूर्ण रचनाएँ

जॉन स्टुअर्ट मिल का जीवन परिचय उपयोगितावाद के अन्तिम प्रबल समर्थक जॉन स्टुअर्ट मिल का जन्म 20 मई, सन् 1806 ई0 को लन्दन में हुआ। वह अपने पिता जेम्स मिल (1773-1836) की प्रथम सन्तान था। उसके पिता स्वयं उपयोगितावादी सुधारक होने के नाते उसे उपयोगितावादी शिक्षा देना चाहते थे। जॉन स्टुअर्ट मिल स्वयं भी एक प्रतिभाशाली …

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जेरेमी बेंथम का जीवन परिचय एवं बेंथम की प्रमुख रचनाएँ

जेरेमी बेंथम का जन्म 15 फरवरी 1748 ई0 को लन्दन के एक प्रतिष्ठित वकील परिवार में हुआ। उसने 13 वर्ष की आयु में मैट्रिक तथा 15 वर्ष की आयु में 1763 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षाएँ उत्तीर्ण कीं। उसके बाद उसने ‘लिंकन्स इन’ में कानून का अध्ययन किया और वहाँ से कानून का अध्ययन …

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रूसो का सामाजिक समझौते का सिद्धांत

रूसो रूसो ने सामाजिक समझौता सिद्धांत का वर्णन अपनी पुस्तक ‘सोशल कांट्रेक्ट’ (सामाजिक समझौता) में किया है। इस रचना में रूसो ने आदर्श समाज की स्थापना की युक्ति सुझाई है, जिससे मानव जाति की मानव जाति को प्राकृतिक अवस्था के कष्टों से मुक्ति मिल सके। जिस प्रकार हॉब्स व लॉक ने राज्य की उत्पत्ति का कारण …

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ईश्वर किसे कहते हैं ईश्वर की परिभाषा क्या है?

शब्द व्युत्पत्ति की दृष्टि से ईश्वर शब्द ईश धातु में वरच् प्रत्यय लगाकर बना है जिसका अर्थ है ऐश्वर्य युक्त, समर्थ, शक्तिशाली, स्वामी, प्रभु, मालिक, राजा, शासक आदि। हिन्दी संस्कृत कोश के अनुसार ईश्वर शब्द का प्रयोग परमेश्वर, जगदीश्वर, परमात्मन, परमेश, स्वामी, शिव आदि अनेक रूपों में किया गया है। ऋग्वेद में ईश धातु का प्रयोग …

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