चक्रवात किसे कहते हैं इन चक्रवातों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है

पवनों का ऐसा चक्र जिसमें अन्दर की और वायुदाब कम और बाहर की ओर अधिक होता है चक्रवात कहलाता है। चक्रवात एक वृहद वायुराशि है जिसमें हवायें निम्न वायुदाब की ओर घूमती हैं।  चक्रवात के प्रकार इन चक्रवातों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है :- उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात 1. उष्ण कटिबन्धीय …

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उत्पाद का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएँ

सामान्य अर्थ में, उत्पाद से तात्पर्य उन सभी वस्तुओं एवं सेवाओं से है, जिनसे उपभोक्ताओं की सन्तुष्टि होती हैं। किन्तु विस्तृत अर्थ में उत्पादन का आशय उन सदृश्य, भौतिक एवं रासायनिक लक्षणों से है जो आसानी से पहचान में आने वाली आकृति, आकार, परिमाण आदि में संग्रहित हो, जैसे साबुन, जूते, टूथपेस्ट, डिटर्जेन्ट पाउडर क्रिकेट बेट …

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लागत अंकेक्षण क्या है?

लागत अंकेक्षण क्या है? सन् 1965 मे भारतीय कम्पनी अधिनियम मे एक क्रांतिकारी परिवर्तन करके लागत अंकेक्षण (cost Audit) के सम्बन्ध में धारा 233 (B) जोडी गई। इस प्रकार भारतवर्ष विश्व में ऐसा देश बन गया जहां लागत अंकेक्षण को सर्वप्रथम वैधानिक मान्यता दी गई। इससे जहां विश्व में इसका गौरव बढा है, वहीं स्वदेश में …

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भूकंप का अर्थ, परिभाषा एवं भूकंप के कारण

भूकंप पृथ्वी की पपड़ी की वह हलचल है जिससे पृथ्वी हिलने लगती है और भूमि आगे पीछे होने लगती हे वास्तव में पृथ्वी के अन्दर होने वाली किसी घटना के परिणाम स्वरूप जब धरातल का कोर भाग अकस्मात कांप उठता है तो उसे भूकंप कहते है। भूकंप का अर्थ भूकम्प शब्द का साधारण अर्थ है- ’पृथ्वी …

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उपभोक्ता व्यवहार का अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएँ

उपभोक्ता व्यवहार विश्व की समस्त विपणन क्रियाओं का केन्द्र बिन्दु उपभोक्ता है। आज विपणन के क्षेत्र में जो कुछ भी किया जा रहा है उसके केन्द्र में कही न कही उपभोक्ता विद्यमान है। इसलिए उपभोक्ता को बाजार का राजा या बाजार का मालिक कहा गया है। सभी विपणन संस्थाएं उपभोक्ता की आवश्यकताओं इच्छाओं, उसकी पसंद एवं …

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अहिंसा का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, आवश्यकता

शाब्दिक रूप से अहिंसा शब्द अ+हिंसा के योग से बना है। अत: अहिंसा का शाब्दिक या सामान्य अर्थ है- जो हिंसा न हो। इस प्रकार किसी की हत्या न करना या किसी प्राणी को कष्ट न पहुंचाना अहिंसा है, जबकि हिंसा का अर्थ इसके ठीक विपरीत यानी किसी की हत्या करना या किसी प्राणी को कष्ट …

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सामाजिक विकास की परिभाषा और इसकी अवस्थाएं

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह दूसरों के व्यवहार को प्रभावित करता है और उसके व्यवहार से प्रभावित होता है। इस परस्पर व्यवहार के व्यवस्थापन पर ही सामाजिक संबंध निर्भर होते हैं। इस परस्पर व्यवहार में रुचियों, अभिवश्त्तियों, आदतों आदि का बड़ा महत्व है। सामाजिक विकास में इन सभी का विकास सम्मिलित है। जब सामाजिक परिस्थिति …

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बाजार विभक्तिकरण का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, महत्व, आवश्यक तत्व

बाजार विभक्तीकरण वह क्रिया है जिसके द्वारा बाजार को विभिन्न खण्डों में बांटाा जाता है। बाजार खण्ड कुल बाजार का ऐसा भाग या हिस्सा है जिससे प्रत्येक ग्राहक के क्रय-व्यवहार में एक समापन या समानता पायी जाती है। इस प्रकार बाजार विभक्तीकरण का उद्देश्य विभिन्न क्रेताओं के बीच जो अन्तर पाये जाते है उनका पता लगाना …

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हिंसा का अर्थ, परिभाषा, रूप एवं प्रकार

हिंसा का अर्थ सामान्य अर्थ में जिस किसी भी बात से दूसरों को पीड़ा पहुँचे वह हिंसा है। किसी किसी प्राणी पर शासन करना, दास बनाना, किसी भी प्रकार की पीड़ा देना, सताना या अशांत करना हिंसा है। हिंसा की परिभाषा हिन्दू धर्म के अनुसार – प्रिय वचन नहीं बोलना, अप्रिय या कड़वे वचन का प्रयोग …

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शिक्षा मनोविज्ञान के सम्प्रदाय और उनका क्रमबद्ध वर्णन

शिक्षा और मनोविज्ञान में घनिष्ठ सम्बन्ध है, इस विषय पर पूर्व अध्यायों में प्रकाश डाला गया है। मनोविज्ञान द्वारा हमें मानव-मस्तिष्क का ज्ञान होता है, अतः शिक्षा से इसका घनिष्ठ सम्बन्ध होना अनिवार्य है। मनोविज्ञान के क्षेत्र में व्यवहार की व्याख्या, मनोवैज्ञानिकों ने भिन्न-भिन्न ढंग से की है। शिक्षा-मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की एक व्यावहारिक शाखा है। शिक्षार्थी …

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