पत्रकारिता : अर्थ, परिभाषा, कार्य, सिद्धांत, क्षेत्र

पत्रकारिता शब्द अंग्रेजी के ‘जर्नलिज्म’ का हिन्दी रूपांतर है। ‘जर्नलिज्म’ शब्द ‘जर्नल’ से निर्मित है और इसका अर्थ है ‘दैनिकी’, ‘दनैन्दिनी’, ‘रोजनामचा’ अर्थात जिसमें दैनिक कार्यों का विवरण हो। आज जर्नल शब्द ‘मैगजीन’, ‘समाचार पत्र’, ‘दैनिक अखबार’ का द्योतक हो गया है।  ‘जर्नलिज्म’ यानी पत्रकारिता का अर्थ समाचार पत्र, पत्रिका से जुड़ा व्यवसाय, समाचार संकलन, लेखन, …

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जिला पंचायत सदस्य के कार्य और अधिकार

73वें संविधान संशोधन के अन्र्तगत त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में जिला स्तर पर जिला पंचायत के गठन का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक जिले के लिए एक जिला पंचायत होगी जिसका नाम उस जिले के नाम पर होगा। जिला पंचायत पूरे जिले से आयी प्राथमिकताओं व लोगों की जरूरतों का समेकन कर एक जिला योजना तैयार करती …

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कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 कुछ महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 कुछ महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ  समुचित सरकार- केन्द्रीय सरकार या रेलवे-प्रशासन के नियंत्रण में प्रतिष्ठानों, महापत्तनों, खानों या तेलक्षेत्रों के संबंध में समुचित सरकार केन्द्रीय सरकार तथा सभी प्रतिष्ठानों के संबंध में समुचित सरकार राज्य सरकार है। कर्मचारी- ‘कर्मचारी’ का अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है, जो अधिनियम के अधीन आने वाले किसी कारखाना या …

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कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम 1923 क्या है?

कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम 1923 क्या है? i. अस्थायी आंशिक अशक्तता- अस्थायी आंशिक अशक्तता वह अशक्तता है, जिससे कर्मकार की उस नियोजन में उपार्जन क्षमता अस्थायी अवधि के लिए कम हो जाती है, जिसमें वह दुर्घटना के समय लगा हुआ था। ii. स्थायी आंशिक अशक्तता – स्थायी आंशिक अशक्तता वह अशक्तता है, जिससे कर्मकार की हर ऐसे …

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प्रबंधकीय प्रतिवेदन का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, सिद्धान्त

प्रबंध हेतु प्रतिवेदन या प्रबंधकीय प्रतिवेदन प्रणाली प्रबंधकीय लेखाविधि का एक महत्वपूर्ण अंग है। किसी भी संस्था से सम्बन्धित सभी अधिकारियों के समक्ष भिन्न-भिन्न प्रकार की सूचनाओं को प्रस्तुत किया जाता है जिनके आधार पर ही वे उचित व सही निर्णय लेते हैं और नीति निर्धारण करते हैं। यह कार्य प्रतिवेदनों एवं अन्य विवरण पत्रों के …

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मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936 क्या है?

मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936 प्रारंभ में यह अधिनियम कारखानों और रेलवे-प्रशासन में काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों के साथ लागू था, जिनकी मजदूरी 200 रुपये प्रतिमाह से अधिक नहीं थी। बाद में इसे कई अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों तथा नियोजनों में लागू किया गया। इनमें मुख्य हैं –  ट्राम पथ सेवा या मोटर परिवहन-सेवा,  संघ की सेना …

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Rajbhasha Niyam 1976/ राजभाषा नियम 1976 क्या है

राजभाषा नियम, 1976 सा. का. नि. 1052 केन्द्रीय सरकार -राजभाषा अधिनियम, 1963(1963 का 19) की धारा 3 की उपधारा (4) के साथ पठित धारा 8 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित नियम बनाती है इन नियमों का संक्षिप्त नाम राजभाषा (संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग) नियम, 1976 है। इनका विस्तार, …

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श्रम विधान का अर्थ, उद्देश्य, महत्त्वपूर्ण सिद्धांत

श्रम विधान सामाजिक विधान का ही एक अंग है। श्रमिक समाज के विशिष्ट समूह होते हैं। इस कारण श्रमिकों के लिये बनाये गये विधान सामाजिक विधान की एक अलग श्रेणी में आते हैं।  औद्योगिक के प्रसार, मजदूरी अर्जकों के स्थायी वर्ग में वृद्धि, विभिन्न देशों के आर्थिक एवं सामाजिक जीवन में श्रमिकों के बढ़ते हुये महत्व …

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राजभाषा हिंदी संबंधी समितियां

राजभाषा हिंदी संबंधी समितियां हिन्दी सलाहकार समितियाँ  संसदीय राजभाषा समिति  केन्द्रीय राजभाषा  नगर राजभाषा  राजभाषा कार्यान्वयन समितियाँ 1. हिन्दी सलाहकार समितियाँ – भारत सरकार की राजभाषा नीति के सूचारू रूप से कार्यान्वयन के बारे में सलाह देने के उद्देश्य से विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में हिन्दी सलाहकार समितियों की व्यवस्था की गई। इस समितियों के अध्यक्ष सम्बन्धित मंत्री होते …

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सामाजिक सुरक्षा से आप क्या समझते हैं भारत में सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता ?

‘सामाजिक सुरक्षा’ शब्द का उद्गम औपचारिक रूप से सन् 1935 से माना जाता है, जबकि प्रथम बार अमरीका में सामाजिक सुरक्षा अधिनियम पारित किया गया। इसी वर्ष बेरोजगारी, बीमारी तथा वृद्धावस्था बीमा की समस्या का समाधान करने के लिए सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन किया गया। तीन वर्ष बाद सन् 1938 में ‘सामाजिक सुरक्षा’ शब्द का …

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