भारत छोड़ो आंदोलन के कारण और परिणाम

भारत छोड़ो आंदोलन 8 अगस्त, 1942 ई. को ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव पास हुआ और 9 अगस्त की रात को गांधीजी सहित कांग्रेस के समस्त बड़े नेता बन्दी बना लिए गये । गाँधीजी के गिरफ्तार होने के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने एकसूत्रीय कार्यक्रम तैयार किया और जनता को भारत छोड़ो आंदोलन में सम्मिलित होने के …

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भारत में मुसलमान कब और कैसे आए?

इस्लाम धर्म के उदय के पूर्व अरबवासी मूर्तिपूजक थे । वे अनेक कबीलों में बंटे हुए थे । प्रत्येक कबीले का एक नेता (सरदार) था । मुहम्मद साहब का जन्म (570-632 ई) हुआ था । उन्होंने इस्लाम नामक नए धर्म की शिक्षा दी । इस धर्म ने अरब लोगों के अतिरिक्त, विश्व के अन्य भागों में …

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सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाए जाने के मुख्य कारण क्या था?

असहयोग आन्दोलन के बाद लगभग 8 वर्ष तक देश के राजनीतिक जीवन में शिथिलता रही । काँग्रेस ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध कोई कदम नहीं उठाया, केवल स्वराज्य पार्टी ने विधायिकाओं में पहुँचकर अपनी असहयोग नीति को कार्यान्वित किया और जब जहाँ अवसर मिला संविधान में गतिरोध उत्पन्न किया । इस बीच कुछ ऐसी परिस्थितियाँ बनीं …

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चोल वंश का इतिहास | chola dynasty

पल्लव और पाण्डय जैसे अधिक शक्तिशाली राज्यों के उदय के कारण चोल वंश को अनेक वर्षो तक ग्रहण सा लगा रहा । इन शक्तियों के पतन के साथ ही चोल एक बार फिर उभरे । नवीं से बारहवीं शताब्दी तक यह राज्य दक्षिण में सर्वाधिक शक्तिशाली बना रहा । चोल शासकों ने केवल सुदृढ शासन व्यवस्था …

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नियोजन क्या है नियोजन की विशेषताओं का वर्णन

नियोजन मूलतः लक्ष्य एवं उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किए गये प्रयास है। भविष्य की योजनाएं बनाना, भविष्य के लिए सोचना, तैयार करना, कार्यक्रम बनाना, स्रोतों को आंकना और मूल्यांकन करके पूरा एक प्रलेख तैयार करना है। जब कोई व्यक्ति किसी कार्य को कब करना है ? कैसे करना है ? कहां करना हैं ? …

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असहयोग आंदोलन के कारण, कार्यक्रम, प्रभाव, परिणाम

भारतीयों को प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात अंग्रेजों द्वारा स्वराज्य प्रदाय करने का आश्वासन दिया गया था, किन्तु स्वराज्य की जगह दमन करने वाले कानून दिये गये तो उनके असन्तोष का ज्वालामुखी फूटने लगा । ऐसी स्थिति में गाँधीजी के विचारों में परिवर्तन होना स्वाभाविक था ।  भारतीय जनता को असहयोग आंदोलन के पक्ष …

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पल्लव वंश का इतिहास – Pallava Vansh Ka Itihas

पल्लव भी स्थानीय कबीले के लोग थे । इन्होंने दक्षिणी आंध्र और उत्तरी तमिलनाडु में अपना राज्य स्थापित किया था । वे स्वयं को ब्राम्हण मानते थे । इन्होंने कांचीपुरम को अपनी राजधानी बनाया । यह वैदिक ज्ञान का एक बड़ा केन्द्र बन गया । पल्लवों का राजनैतिक इतिहास स्पष्ट नहीं है । प्रारम्भिक राजा पाण्ड्य …

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उद्यमिता क्या है? इसके सिद्धांत एवं कार्यों की विस्तृत व्याख्या

उद्यमी द्वारा किय गये कार्य को उद्यमिता कहते हैं। उद्यमिता एक आर्थिक क्रिया है जो बाजार में व्याप्त सम्भावनाओं को पहचानने की प्रक्रिया है। आर्थिक क्षेत्र में परम्परागत रूप में उद्यमिता का अर्थ व्यवसाय एवं उद्योग में निहित विभिन्न अनिश्चितताओं एवं जोखिम का सामना करने की योग्यता एवं प्रवृत्ति है। उद्यमिता समाज के लोगो में नये …

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भक्ति आंदोलन क्या है, भक्ति आंदोलन की मुख्य विशेषताएं

सल्तनत काल से ही हिन्दू मुस्लिम संघर्ष का काल था । दिल्ली सुल्तानों ने हिन्दू धर्म के प्रति अत्याचार करना आरंभ कर दिये थे । उन्होंने अनेक मंदिरेां और मुर्तियों को तोड़ने लगे थे । जिससे हिन्दुओं ने अपने धर्म की रक्षा के लिए एकेश्वरवाद को महत्व दिया और धर्म सुधारक ने एक आंदोलन चलाया यही …

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वाकाटक वंश का इतिहास History Of Vakataka Dynasty

वाकाटक राज्य प्राचीन दक्षिण भारत का एक मजबूत राज्य था। तीसरी शताब्दी ई0 से छठी शताब्दी तक दक्षिण भारत में जिन राजवंशों का उदय हुआ, उनके वाकाटक राजवंश सर्वश्रेष्ठ था।’’ उत्तर भारत में सबसे शक्तिशाली गुप्त साम्राज्य के साथ-साथ दक्षिण भारत में वाकाटक साम्राज्य बना रहा। वाकाटक प्रारंभ में सातवाहनों के सामन्त थे। वाकाटकों का प्रारंभ …

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