स्वदेशी आंदोलन क्या है?

स्वदेशी आंदोलन क्या है? बंगाल – विभाजन आंदोलन अंतत: स्वदेशी आंदोलन में परिणत हो गयां बंगालियों ने महसूस किया कि संवैधानिक आंदोलन अर्थात् जनसभाओं में भाषण देना, प्रेस द्वारा प्रचार, निवेदन, आवेदन-पत्र एवं सम्मेलन आदि बेकार है। ब्रिटिश सरकार का विरोध बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलन द्वारा किया जाना चाहिए। बहिष्कार के मलू में आर्थिक अवधारणा हैं …

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अधिनायकतंत्र अर्थ, परिभाषा, लक्षण, गुण एवं दोष

आधुनिक युग को ‘लोकतंत्र का युग’ कहा जाता है। परन्तु शायद सत्य बात है कि यह युग अधिनायकतंत्र‘ का युग बनता जा रहा है। यद्यपि हमने लोकतंत्र का मूल्यांकन करते समय यह निष्कर्ष निकाला है कि सुदूर भविष्य में लोकतंत्र व्यवस्थाएं ही लोकप्रिय होंगी, फिर भी आज दुनिया के अनेक राज्य लोकतंत्र शासन प्रतिमान के प्रतिकूल …

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लोकतंत्र का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, गुण एवं दोष

लोकतंत्र का उदय यूनान में हुआ, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि 500 ई.पू. के आस-पास यूनान में पहली लोकतान्त्रिक सरकार बनी थी। ‘डेमोक्रेसी’ शब्द का उद्भव यूनानी शब्द ‘डेमोक्राटिया’ (Demokratia) से हुआ है। जो कि दो यूनानी शब्दों ‘demos’ अर्थात् ‘लोग’ और ‘kratos’ अर्थात् ‘शक्ति’ से मिलकर बना है। इस प्रकार लोकतंत्र का मतलब ‘लोगों …

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राजनीतिक समाजशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, क्षेत्र, प्रकृति l

19वीं शताब्दी में राज्य और समाज के आपसी सम्बन्ध पर वाद-विवाद शुरू हुआ तथा 20वीं शताब्दी में, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सामाजिक विज्ञानों में विभिन्नीकरण और विशिष्टीकरण की उदित प्रवृत्ति तथा राजनीति विज्ञान में व्यवहारवादी क्रान्ति और अन्त: अनुशासनात्मक उपागम के बढ़े हुए महत्व के परिणामस्वरूप जर्मन और अमरीकी विद्वानों में राजनीतिक विज्ञान के समाजोन्मुख अध्ययन …

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साम्राज्यवाद से आप क्या समझते हैं साम्राज्यवाद के सिद्धांत

साम्राज्यवाद के अर्थ को समझना आसान नहीं है। अलग-अलग विद्वानों ने अनेकों तरह से इसके सार को समझानें की कोशिश कर इसे काफी कठिन कर दिया है। फिर भी इसके अर्थ को सरल भाषा में कहें तो वह, यह है कि, पूंजीवाद जब अपने विकास के चर्मोत्कर्ष पर पहुंच जाता है तो, वह साम्राज्यवाद में परिवर्तित …

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राष्ट्रवाद का अर्थ, परिभाषा, अनिवार्य तत्व

राष्ट्रवाद लोगों में किसी समूह की उस आस्था को कहते हैं, जिनमें इतिहास, भाषा, जातीयता एवं संस्कृति के आधार पर एकजुट हों। इन्हीं बंधनों के कारण वे इस निष्कर्ष पर पहुँचते है कि अपने राजनीतिक समुदाय अर्थात राष्ट्र की स्थापना करने का आधार हो। हालांकि दुनिया में ऐसा कोई राष्ट्र नहीं है जो इन कसौटियों पर …

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संसद के कितने अंग होते हैं उनके नाम

संविधान के अनुच्छेद 79 के अंतर्गत भारतीय संसद का गठन किया गया है। भारतीय संसद के अंतर्गत राष्ट्रपति और संसद के दो सदन सम्मिलित है। पहला सदन लोक सभा है जिसे निम्न सदन भी कहा जाता है जबकि दूसरा सदन राज्य सभा है जिसे उच्च सदन कहा जाता है। लोक सभा अस्थायी सदन हैं, जिसे कभी …

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संविधान में उपराष्ट्रपति के कार्य का वर्णन

भारतीय संविधान के अनुसार भारत के लिए एक उपराष्ट्रपति की भी व्यवस्था की गई है। भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा, संविधान का अनुच्छेद (63) इसकी व्यवस्था करता है। उपराष्ट्रपति के पद की संकल्पना को संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से ली गई। वहां की शासन व्यवस्था भारतीय शासन व्यवस्था से भिन्न है। भारतीय राजनीतिक व्यवस्था ने कुछ …

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भारत के राष्ट्रपति की शक्तियां और कार्य

राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनेां सदनों के चयनित सदस्य समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार राज्यों में विधान सभा के सदस्यों के द्वारा एकल अंतरणीय मत के द्वारा होता है । राज्यो के बीच परस्पर एकरूपता लाने के लिए तथा सम्पूर्ण रूप से राज्यों और केंद्र के …

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भारतीय संविधान में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया

न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया एक स्वस्थ एवं निष्पक्ष न्यायपालिका का सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। जितने श्रेष्ठ व्यक्ति इस प्रक्रिया द्वारा चुने जायेंगे उतना ही न्यायपालिका का स्तर बेहतर होगा। संविधान निर्माण के समय से ही इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ, जो अभी भी जारी है। न्यायाधीशों की निष्पक्षता न सिर्फ न्यायपालिका पर प्रभाव …

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