मनुस्मृति की रचना कब और किसने की? || मनुस्मृति की संरचना एवं विषयवस्तु

वैदिक वाड़्मय में मानव जाति के आदि पिता प्रजापति के रूप में मनु का उल्लेख मिलता है। इसमें मनु का अर्थ मनुष्य से किया गया है। मनु में पिता शब्द जुड़ा हुआ है जिससे यह अनुमान किया गया है कि मनुष्य के पिता मनु हुये जिन्होंने सृष्टि को उत्पन्न किया तथा मनुस्मृति की रचना की। शतपथ …

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तुलसीदास का जीवन परिचय और उनकी रचनाएँ

तुलसीदास भक्त कवि हैं। ‘मूलगोसाइर्ंचरित’ में तुलसीदास का जन्म संवत् 1554 (1497 ई.) में माना गया है। विल्सन तथा गार्सा द तासी ने उनका जन्म संवत् 1600 (1543 ई.) में माना है। डा. ग्रियर्सन आदि ने तुलसीदास का जन्म संवत् 1589 (1532 ई.) माना है तथा इसे ही सर्वाधिक स्वीकृति प्राप्त हुई है। तुलसीदास ने अपनी …

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सम्बन्धित साहित्य का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य एवं स्रोत

सम्बन्धित साहित्य से तात्पर्य अनुसंधान की समस्या से सम्बन्धित उन सभी प्रकार की पुस्तकों, ज्ञान, कोषों, पत्र-पत्रिकाओं, प्रकाशित शोध एवं अभिलेखों से है, जिनके अध्ययन से अनुसंधानकर्त्ता को अपनी समस्या का चयन, परिकल्पना, निर्माण व अध्ययन की रूपरेखा तैयार करने में सहायता मिलती है। सम्बन्धित साहित्य की परिभाषा टे्रवर्स के अनुसार :- ‘‘किसी भी क्षेत्र की समस्याओं …

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भाषा का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्व

भाषा शब्द संस्कृत के भाषा धातु से बना हुआ है। इसका अर्थ होता है, बोलना; इस प्रकार इसका सामान्य अर्थ है, अपने विचारों या भावों को प्रकट करना। भाषा अपने सामान्य अर्थ में विचारों या भावों को आदान-प्रदान करने का माध्यम है। मनुष्य या मनुष्येतर प्राणी कुछ विशेष ध्वनियों तथा संकेतों से एक दूसरे की बात …

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रामायण में कितने कांड है उनके नाम

रामायण  रामायण के 7 कांड के नाम सम्पूर्ण रामायण 7 कांड में विभक्त है- बालकांड,  अयोध्याकांड,  अरण्यकांड,  किष्किन्धाकांड,  सुन्दरकांड,  लंकाकांड एवं  उतरकांड !  इसके प्रत्येक कांड में अनेक सर्ग हैं। जैसे,  बाल में 77,  अयोध्या में 119  अरण्य में 75  किष्किन्धा में  67 सुन्दर में  68 लंका में  128 तथा  उत्तर में 111  इसमें राम की मुख्य कथा …

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उपपुराण के नाम एवं उपपुराण की संख्या

पुराणों की भांति उपपुराणों की भी गणना की गयी है। विद्वानों का विचार है कि पुराणों के बाद ही उपपुराणों की रचना हुई है, पर प्राचीनता अथवा मौलिकता के विचार से उपपुराणों की महत्ता पुराणों के समान है। उपपुराणों में स्थानीय सम्प्रदाय तथा पृथक् पृथक् सम्प्रदायों की धार्मिक आवश्यकता पर अधिक बल दिया गया है।  उपपुराणों …

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18 पुराणों के नाम और सभी पुराणों का संक्षिप्त परिचय

यास्क के निरुक्त के अनुसार, ‘पुराण’ की व्युत्पत्ति है- ‘पुरा नव’ भवति अर्थात् जो प्राचीन होकर भी नया होता है। इन व्युत्पत्तियों की मीमांसा करने से स्पष्ट होता है कि ‘पुराण’ का वर्ण्य विषय प्राचीनकाल से सम्बद्ध था। प्राचीन ग्रन्थों में पुराण का सम्बन्ध ‘इतिहास’ से इतना घनिष्ठ है कि दोनों सम्मिलित रूप से ‘इतिहास-पुराण’ नाम …

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अनुवाद प्रक्रिया क्या है अनुवाद की प्रक्रिया एवं प्रविधि

अनुवाद प्रक्रिया एक संश्लिष्ट प्रक्रिया है। इसमें क्रिया व्यापार का स्वरूप दोहरा होता है। कृष्ण कुमार गोस्वामी के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया से तात्पर्य अनुवाद की विधि अथवा प्रविधि से है जिसमें एक भाषा से दूसरी भाषा में संदेश और संरचना का अंतरण होता है। संदेश लक्ष्य है और संरचना माध्यम है तथा अंतरण प्रक्रिया। इन तीनों …

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अनुवाद के प्रकार तथा वर्गीकरण

जब अनुवाद में दो भाषाओं का प्रस्ताव होता है, तो किसी एक ही पद्धति में उसका अनुवाद नहीं हो पाता।रचना, विषय, अनुवाद सिद्धातों आदि के विभिन्न रूपों के कारण विभिन्न प्रकारों में अनुवाद करना पड़ता है।अनुवाद प्रकारों के निर्धारण का उद्देश्य अनुवाद प्रणालियों के विविध प्रकारों में एक स्पष्ट विभाजक रेखा खींचनाभी है ताकि अनुवाद विषयक …

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रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय, भाव पक्ष और कला पक्ष

रामधारी सिंह दिनकर प्रतिभा-सम्पन्न व्यक्ति थे। रामधारी सिंह दिनकर का जन्म बिहार प्रान्त में सिमरिया नामक ग्राम में 30 सितम्बर 1908 ई. मे हुआ था। रामधारी सिंह दिनकर के पिता श्री रवि सिंह साधारण स्थिति से किसान थे। वे इतने सरल एवं साधु प्रवृति के व्यक्ति थे कि उनकी उदारता और सरलता की कहानियाँ सिमरिया में …

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