समास किसे कहते हैं कितने प्रकार के होते हैं?

दो या अधिक शब्दों का मिलकर इस प्रकार एक हो जाना कि उनके बीच के संयोजक शब्दों और कारक चिह्नों का लोप हो जाए, समास कहलाता है। समास का तात्पर्य है संक्षिप्त रूप में समीपस्थ हो जाना। संस्कृत में इनका विशेष महत्व है, पर हिंदी में भी समास पदों का काफी प्रयोग होता है। समास में …

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उपसर्ग किसे कहते हैं इसके प्रकार और उनके उदाहरण

शब्दों के आरंभ में लगाकर ( सु + पुत्र = सुपुत्र) शब्दों के अर्थ को सर्वथा परिवर्तित कर देने वाले शब्दांश उपसर्ग कहे जाते हैं। उपसर्ग शब्दों जैसे अ, कु, अधि, अति आदि का स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता लेकिन इनके योग से शब्दों के अर्थ में विशेषता उत्पन्न हो जाती है। तीन प्रकार के उपसर्गो का प्रयोग …

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प्रत्यय किसे कहते हैं प्रत्यय मुख्यतः कितने प्रकार के होते हैं ?

नवीन शब्द का निर्माण करने के लिए शब्दों के अंत में जोडे़ गए शब्दांशों को प्रत्यय कहते हैं। जैसे कृ + त्वा = कृत्वा (करके) । प्रत्यय दो प्रकार के होते है:- कृत प्रत्यय तद्धित प्रत्यय प्रत्यय किसे कहते हैं वे शब्दांश जो किसी शब्द के अन्त में लगकर उस शब्द के अर्थ में परिवर्तन कर …

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शब्द शक्ति किसे कहते हैं शब्द शक्ति के भेद?

शब्द से अर्थ का बोध होता है। इसमें शब्द बोधक है और अर्थ बोध्य। ‘गाय का दूध पीओ’ में गाय और दूध शब्द हैं, इनसे गाय-पशु और दूध-वस्तु का बोध कराया जाता है। प्रयोग या उपयोग में अर्थ (वस्तु) ही आता है, शब्द नहीं। शब्द अर्थ (वस्तु) का बोध कराकर निवृत्त हो जाता है। इसलिए भाषा …

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वाक्य किसे कहते हैं रचना के आधार पर वाक्य के कितने भेद हैं?

भाषा की सबसे छोटी इकाई है वर्ण। वर्णों के सार्थक समूह को शब्द कहते हैं तथा शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य। अर्थात् वाक्य शब्द-समूह का वह सार्थक विन्यास होता है, जिससे उसके अर्थ एवं भाव की पूर्ण एवं सुस्पष्ट अभिव्यक्ति होती है। अत: वाक्य में आकांक्षा, योग्यता, आसक्ति एवं क्रम का होना आवश्यक है। यह …

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हिंदी की उपभाषाएँ कितनी है?

हिन्दी-क्षेत्र अति विस्तीर्ण है। ढाई लाख वर्गमील से अधिक क्षेत्र में फैली जनसंख्या द्वारा हिन्दी का प्रयोग होता है। इतने बड़े भू-भाग में हिन्दी का प्रयोग स्वाभाविक रूप से अनेक बोलियों के माध्यम से होता है। बोलीपरक अनेकरूपता में कुछ ऐतिहासिक कारण हैं तो कुछ क्षेत्रीय।  हिन्दी की चहुँमुखी व्याप्ति का सीमांकन डाॅ. ग्रियर्सन आदि भाषाविदों …

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भाषा कौशल का अर्थ एवं विशेषताएँ

भाषा कौशल भाषा का व्यावहारिक पक्ष है। तथ्यों, भावों, विचारो तथा कौशल में शारीरिक अंगो, ज्ञान-इन्द्रियों, कर्म-इन्द्रियो को क्रियाशील रहना पडता है। भाषा कौशल मुख माध्यम का कार्य करती है। भाषा कौशल के मुख के अंगो को अधिक क्रियाशील होना पड़ता है। शारीरिक अंगो के साथ ज्ञान-इन्द्रियॉं तथा कर्म-इन्द्रियॉं भी सक्रिय रहती है। इस प्रकार भाषा …

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निबंध का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, अंग, विशेषताएं

निबंध शब्द का साधारण शब्दों में अर्थ है- ‘‘बन्धन में बँधी हुई वस्तु।’’ ‘निबंध’ शब्द से निगूढ बन्धन का बोध होता है। यह मूलत: संस्कृत का शब्द है, जो कि हिन्दी में लिया गया है। निबन्ध एक ऐसी रचना है, जिसने विषय विशेष पर व्यक्ति अपने विचार सुनियोजित विधि से लिखित रूप में अभिव्यक्ति करता है। …

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भाषा किसे कहते हैं भाषा के संबंध में कुछ प्रमुख विद्वानों ने परिभाषाएं दी हैं, वे इस प्रकार हैं

मानव जिसकी सहायता से अपने भावों एवं विचारों को व्यक्त करता है, वही भाषा है। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए व्यक्ति जिन व्यक्त ध्वनि संकेतों को नित्य व्यवहार के लिए स्वीकार करता है, उसको भाषा कहते हैं भाषा विचारों को व्यक्त करने वाली ध्वनियों और वाक्यों का एक समूह होता है। सामान्य रूप से …

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निबंध का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, विशेषताएं एवं अंग

निबंध का अर्थ निबंध शब्द ‘नि+बंध’ से बना है, जिसका अर्थ है अच्छी तरह से बँधा हुआ। इनकी भाषा विषय के अनुकूल होती है। निबंध की शक्ति है अच्छी भाषा। भाषा के अच्छे प्रयोग द्वारा ही भावों विचारों और अनुभवों को प्रभावशाली दंग से व्यक्त किया जा सकता है। निबंध की परिभाषा बाबू गुलाबराय ने निबंध …

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