मनोवैज्ञानिक परीक्षण क्या है ? इसकी विभिन्न परिभाषा और उद्देश्यों का विस्तृत विवेचन

मनोविज्ञान व्यावहारिक जीवन का विज्ञान है। यह ज्ञान की वह शाखा है जो प्राणियों के व्यवहार एवं मानसिक प्रक्रियाओं जैसे कि बुद्धि, स्मृति, चिन्तन, सीखना, समस्या समाधान, निर्णय प्रक्रिया, विस्मरण का क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित अध्ययन करती है। भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में प्राणी (मानव एवं पशु दोनों) किस प्रकार का व्यवहार करते है? उनके इस प्रकार व्यवहार करने …

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मनोचिकित्सा का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, विधियां

मनोचिकित्सा शब्दार्थ में मन की चिकित्सा है। मन की प्रवृत्ति को भी सकारात्मक एवं नकारात्मक दो प्रकार का माना जाता है। जब मन की प्रवृत्ति सकारात्मक होती है तब व्यक्ति का सृजनात्मक मानसिक विकास होता है। वहीं जब मन की प्रवृत्ति नकारात्मक हो जाती है तब यही मन रोगमय हो जाता है फलत: इसकी चिकित्सा की …

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अधिगम असमर्थता के कारण और प्रकार

अधिगम विकृति का संबंध सीखने में होने वाली अक्षमता से होता है यह अक्षमता कई प्रकार के कौशलों एवं संज्ञानात्मक विकास से संबंधित हो सकती है। जब किसी बालक को अन्य हमउम्र बालकों की तुलना में पढ़ाई लिखाई अथवा गणित आदि विषयों में पिछड़ा हुआ पाया जाता है। और उसका यह पिछड़ना सामान्य नहीं होता बल्कि …

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सामान्यीकृत चिंता विकार क्या है सामान्यीकृत चिंता विकार के कौन से कारण अथवा कारक जिम्मेदार हैं।

जब अधिक चिंता दीर्घकाल तक बनी रहती है तो वह सामान्यीकृत चिंता विकार का रूप ले लेती है। बहुत से मनोवैज्ञानिकों ने सामान्यीकृत चिंता विकार को परिभाषित किया है इन परिभाषाओं के अवलोकन से हम सामान्यीकृत चिंता विकार के संप्रत्यय को भली भॉंति समझ सकते हैं। प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक रोनाल्ड जे कोमर ने अपनी पुस्तक ‘फण्डामेंटल्स ऑफ …

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मनोरोग के प्रकार

अधिकतर शारीरिक स्थितियों को हेतुकी एवं संरचात्मक विकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। कुछ सामान्य चिकित्सकीय स्थितियों जैसे माइग्रेन,ट्राईजेमिनल न्यूरालजिया को अभी तक इस प्रकार से वर्गीकृत नहीं किया जा सका है, जिसके कारण उनका वर्गीकरण केवल लक्षणों के आधार पर ही किया गया है। मानसिक विकार मुख्य रूप से इस दूसरे प्रकार …

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किशोरावस्था की विशेष समस्याऐं है, निम्न समस्याऐं आमतौर पर किशोरों में देखने को मिलती है

किशोरावस्था बालक या बालिकाओं की अवस्था 12 से 18 वर्ष के बीच होती है, विकास एवं वृद्धि की विभिन्न अवस्थाओं में किशोरावस्था अत्यधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। किशोरावस्था मनुष्य के विकास की तीसरी अवस्था है यह बाल्यावस्था के बाद शुरू होकर प्रौढ़ावस्था शुरू होने तक चलती रहती है, परंन्तु जलवायु एवं व्यक्तिगत भेदों के कारण किशोरावस्था …

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मानसिक विकास का सिद्धांत (जीन पियाजे की थ्योरी ऑफ कॉग्निटिव डेवलपमेंट)

मानसिक विकास को संज्ञानात्मक विकास के अध्ययन द्वारा भली प्रकार समझा जा सकता है। तकनीकी रूप में संज्ञानात्मक विकास ही मानसिक विकास है। संप्रत्यय निर्माण, सोचना, तर्क करना, याद रखना, विश्लेषण करना, निर्णय करना यह सब संज्ञानात्मक विकास की ही प्रक्रियाये हैं। इन प्रक्रियाओं को भली प्रकार समझने हेतु मनोवैज्ञानिकों ने बहुत से अनुसंधान किए हैं। …

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मानव विकास की अवस्थाओं को गर्भधारण से लेकर पूरे जीवनकाल को इन भागों में विभाजित किया है।

मानव जीवन के विकास का अध्ययन  के अन्तर्गत किया जाता है। विकासात्मक मनोविज्ञान मानव के पूरे जीवन भर होने वाले वर्धन, विकास एवं बदलावों का अध्ययन करता है।  मानव विकास की विभिन्न अवस्थाएं मानव विकास की अवस्थाओं को गर्भधारण से लेकर पूरे जीवनकाल को इन भागों में विभाजित किया है। पूर्वप्रसूतिकाल – यह अवस्था गर्भधारण से …

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मनोविज्ञान की विधियाँ

मनोविज्ञान बहुत विस्तृत विषय है। इस विषय का गहराई पूर्ण अध्ययन करने के लिए कोई भी एक विधि पर्याप्त नहीं हो सकती है। मनोविज्ञान विषय की विशालता एवं इसकी गंभीरता के कारण यह बहुआयामी विज्ञान है जिसे समझने के लिए विभिन्न प्रकार की अध्ययन विधियों की आवश्यकता होती है इन अध्ययन विधियों में अंतःनिरीक्षण विधि, निरीक्षण …

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चिंता क्या है इसके कारण एवं लक्षणों का विस्तृत वर्णन

चिन्ता अपने आप में एक ऐसा मानसिक रोग है जो व्यक्ति के विचारों में लगकर भीतर ही भीतर उसे खोखला करता जाता है। चिन्ता सामान्यतः अज्ञात, अमूर्त एवं व्यक्तिनिष्ठ परिस्थितियों से सम्बन्धित होती है। जो प्रायः इच्छित वस्तु के न प्राप्त होने की दशा में या फिर उसको प्राप्त करने के मार्ग में आने वाले अवरोधों …

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