परामर्श सेवाएं : वैयक्तिक परामर्श, समूह परामर्श, वृत्तिक परामर्श

वैयक्तिक परामर्श आमतौर पर परामर्श व्यक्तिगत रूप से ही सम्पन्न होता है। परामर्श किसी भी प्रकार की आवश्यकता पर व्यक्तिगत रूप में ही दिया जाता है। व्यक्तिगत परामर्श में व्यक्ति की समंजन क्षमता बढ़ाने उसकी निजी समस्याओं का हल ढूढ़ने तथा आत्मबोध की क्षमता उत्पन्न हेतु दी जाने वाली सहायता होती है। यह कहना सर्वथा गलत …

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समूह परामर्श तथा समूह निर्देशन का महत्व

समस्याओं का उत्पन्न होना व्यक्ति के लिए कोई नयी बात नहीं है। व्यक्ति के सम्मुख समस्याएं आती रहती हैं। समस्याओं की गम्भीरता और स्वरूप में अन्तर हो सकता है। लेकिन कोई भी व्यक्ति समस्या समाधान की प्रक्रिया के उपरान्त ही आगे बढ़ पाता है। इन समस्याओं के समाधान सहायता प्रदान करने की दिशा में निर्देशन प्रक्रिया …

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व्यक्तिगत परामर्श क्या है इसकी क्या आवश्यकता है ?

व्यक्तिगत परामर्श, परामर्श की एक प्रविधि है जिसमें व्यक्ति विशेष को उसकी समस्याओं या भावनाओं को बहुत निकटता से सुना व समझा जाता है। व्यक्तिगत परामर्श का मानव जीवन में अधिक महत्व है। शिक्षा के उपरान्त व्यक्तिगत परामर्श ही ऐसी प्रक्रिया है जो व्यक्ति के विकास एवं प्रगति हेतु सर्वाधिक सहायक होती है। इसमें सन्देह नहीं …

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निदेशात्मक परामर्श की विशेषताएं, लाभ, सोपान

निदेशात्मक परामर्श विधि में परामर्शदाता की अहम भूमिका होती है, तथा प्रार्थी गौण रूप से इसमें सम्मिलित होता है। परामर्शदाता अपने विभिन्न अनुभवों तथा कौशलों की सहायता से प्रार्थी की समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करता है। नेडरिक थार्न के अनुसार, परामर्शदाता की यह प्रयास प्रार्थी के व्यक्तिगत विभवों के व्युत्व्मानुपाती होता है। परामर्शदाता इस विधि …

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परामर्श के सिद्धांत, प्रक्रिया और घटक

परामर्श अथवा उपबोधन की प्रक्रिया एक विशिष्ट प्रक्रिया है और इस प्रक्रिया को सम्पन्न करने से पूर्व इसकी प्रक्रिया के प्रमुख अंगों का ज्ञान प्राप्त करना नितान्त आवश्यक है। कोई भी प्रक्रिया किसी न किसी दिशा में एक अथवा अनेक उद्धेश्यों को प्राप्त करने के लिये ही सम्पन्न की जाती है। अत: लक्ष्य अथवा उद्धेश्य किसी …

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परामर्श का अर्थ, परिभाषा, विशेषताएं, आवश्यकता एवं लक्ष्य

परामर्श एक प्राचीन शब्द है और शब्द को परिभाषित करने के प्रयास प्रारम्भ से ही किए गए हैं। वैबस्टर शब्दकोष के अनुसार-’’परामर्श का आशय पूछताछ, पारस्परिक तर्क वितर्क अथवा विचारों का पारस्परिक विनिमय है।’’ इस शाब्दिक आशय के अतिरिक्त परामर्श के अन्य पक्ष भी हैं जिनके आधार पर परामर्श का अर्थ स्पष्ट हो सकता है। उनके …

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बाल्यावस्था क्या है बाल्यावस्था की प्रमुख विशेषताएं?

सामान्य रूप से सभी वैज्ञानिकों ने लगभग 6 वर्ष से 12 वर्ष के बीच की आयु को बाल्यावस्था माना है। इस अवस्था में बालक के जीवन में स्थायित्व आने लगता है और आगे आने वाले जीवन की तैयारी करता है।  हरलाॅक के शब्दों में, बाल्यावस्था 6 वर्ष की आयु से लेकर यौवनारम्भ होने तक ग्यारह और …

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मनोवैज्ञानिक परीक्षण क्या है ? इसकी विभिन्न परिभाषा और उद्देश्यों का विस्तृत विवेचन

मनोविज्ञान व्यावहारिक जीवन का विज्ञान है। यह ज्ञान की वह शाखा है जो प्राणियों के व्यवहार एवं मानसिक प्रक्रियाओं जैसे कि बुद्धि, स्मृति, चिन्तन, सीखना, समस्या समाधान, निर्णय प्रक्रिया, विस्मरण का क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित अध्ययन करती है। भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में प्राणी (मानव एवं पशु दोनों) किस प्रकार का व्यवहार करते है? उनके इस प्रकार व्यवहार करने …

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मनोचिकित्सा का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, विधियां

मनोचिकित्सा शब्दार्थ में मन की चिकित्सा है। मन की प्रवृत्ति को भी सकारात्मक एवं नकारात्मक दो प्रकार का माना जाता है। जब मन की प्रवृत्ति सकारात्मक होती है तब व्यक्ति का सृजनात्मक मानसिक विकास होता है। वहीं जब मन की प्रवृत्ति नकारात्मक हो जाती है तब यही मन रोगमय हो जाता है फलत: इसकी चिकित्सा की …

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अधिगम असमर्थता के कारण और प्रकार

अधिगम विकृति का संबंध सीखने में होने वाली अक्षमता से होता है यह अक्षमता कई प्रकार के कौशलों एवं संज्ञानात्मक विकास से संबंधित हो सकती है। जब किसी बालक को अन्य हमउम्र बालकों की तुलना में पढ़ाई लिखाई अथवा गणित आदि विषयों में पिछड़ा हुआ पाया जाता है। और उसका यह पिछड़ना सामान्य नहीं होता बल्कि …

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