औद्योगिक नीति 1977 क्या है?

इस नीति की चर्चा करने से पूर्व 1970 और 1973 की घोषणाओं को स्पष्ट करना आवश्यक हो जाता है। 1956 से लेकर 1973 तक अनेक महत्वपूर्ण घटनाएँ घटित हुई और कुछ ऐसी आर्थिक दशाएँ उत्पन्न हो गयी जिसके कारण यह आवश्यक हो गया कि सरकार अपनी पूर्व घोषित (1956) औद्योगिक नीति के व्यावहारिक स्वरूप में परिवर्तन …

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औद्योगिक नीति 1985 क्या है?

देश में आर्थिक विकास की प्रक्रिया को गतिमान करने, औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि करने तथा राष्ट्रीय संसाधनों के उच्चतम प्रयोग की दृष्टि से वर्ष 1985 में महत्वपूर्ण घोषणाएँ एवं निर्णय किये गये। इस दशक के प्रारम्भ से ही सरकार ने औद्योगिक नीति को अत्यन्त विवेकपूर्ण बनाने का प्रयास किया है। इस औद्योगिक नीति के प्रमुख लक्ष्य …

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औद्योगिक नीति 1980 क्या है, औद्योगिक नीति, 1980 के प्रमुख उद्देश्य

23 जुलाई, 1980 को कांग्रेस के पुन: सत्ता में आने के कुछ माह पश्चात् ही नयी औद्योगिक नीति की घोषणा की गयी। नया नीति प्रस्ताव मूलत: 1956 की औद्योगिक नीति प्रस्ताव के अधीन ही बनाया गया। नये नीति प्रस्ताव के प्रस्ताव में यह उल्लेख किया गया कि 1956 का औद्योगिक नीति प्रस्ताव हमारे देश की मूल्य …

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निजीकरण का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य एवं लाभ

निजीकरण का अर्थ अनेक प्रकार से व्यक्त किया जाता है। संकुचित दृष्टि से निजीकरण का अभिप्राय सार्वजनिक स्वामित्व के अन्तर्गत कार्यरत उद्योगों में निजी स्वामित्व के प्रवेश से लगाया जाता है। विस्तृत दृष्टि से निजी स्वामित्व के अतिरिक्त (अर्थात् स्वामित्व के परिवर्तन किये बिना भी) सार्वजनिक उद्योगों में निजी प्रबन्ध एवं नियन्त्रण के प्रवेश से लगाया …

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अवमूल्यन का अर्थ, परिभाषा, कारण एवं दोष

प्राय: किसी भी देश की मुद्रा की विनिमय-दर उसकी “स्वाभाविक विनिमय-दर” नहीं कही जा सकती है। वास्तविक विनिमय-दर देश की अपनी तथा उसके साथ आर्थिक सम्बन्ध रखने वाले अन्य देशों की आर्थिक, वित्तीय तथा मौद्रिक नीतियों पर निर्भर करती है। प्रत्येक देश अपनी मुद्रा के लिए एक उपर्युक्त विनिमय दर निर्धारित करता है और उसे निश्चित …

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निर्यात-आयात नीति 2002 की विशेषताएँ

राष्ट्रीय नीति को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण से, भारत सरकार द्वारा 31 मार्च, 2002 को, वित्तीय वर्ष 2000-01 के लिए नवीन निर्यात-आयात नीति की घोषणा की गई। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री श्री मुरोसोली मारन की ओर से घोषित इस नीति में दूध, कागज, सादा नमक, सिगरेट और इलेक्ट्रोनिक सामानों के आयात पर से मात्रात्मक-प्रतिबन्ध हटा दिया गया …

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अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्य

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से विश्व-आर्थिक परिदृश्य पर विचार विमर्श करने के उद्देश्य से 1945 में बेटनबुडस सम्मलेलन में अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा परिषद की बैठक में 44 मित्र राष्ट्रों के प्रतिनिधित्व ने विश्व-स्तरीय दो मौद्रिक संस्थाओं-अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की स्थापना का प्रस्ताव रखा। यह कोष एक तरह से विश्वस्तरीय केन्द्रीय बैंक के रूप …

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विश्व बैंक के कार्य, एवं उद्देश्य

अमेरिका के ब्रेटन बुडस शहर में IMF के अलावा जिस अन्य संस्था की स्थापना हुई वह अन्तर्राष्ट्रीय पुनर्निमाण एवं विकास बैंक (International Reconstruction and Development Bank – IRDB) था। इसे विश्व बैंक (World Bank) भी कहा जाता है। इस बैंक की स्थापना का मूल उद्देश्य अपने प्रतिनिधि सदस्य राष्ट्रों के आर्थिक विकास के लिये दीर्घकालीन ऋण …

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आर्थिक समस्या की परिभाषा एवं आर्थिक समस्या के कारण

प्रत्येक अर्थव्यवस्था की कुछ आधारभूत आर्थिक समस्याएं हैं। इन आधारभूत समस्याओं की विस्तृत विवेचना करने से पहले यह जानना आवश्यक है कि आर्थिक समस्या से अभिप्राय क्या है। प्रत्येक मनुष्य की आवश्यकताएं असीमित हैं परंतु उन्हें संतुष्ट करने वाले अधिकतर साधन सीमित हैं। एक अर्थव्यवस्था के लिये यह सम्भव नहीं है कि वह प्रत्येक नागरिक के …

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भारत पर अरबों के आक्रमण का वर्णन

भारत पर अरब आक्रमण 8वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र पर अरबों ने आक्रमण किया। सन 712 में भारत पर किए गए आक्रमण का नेतृत्व उमैयद खलीफा के सेनापति मुहम्मद बिन कासिम ने किया था। भारत में हुए आक्रमण का उद्देश्य अरब राज्य का विस्तार था। अरब में इस्लाम के उदय ने एक …

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