पोटेशियम के कार्य

पोटेशियम शरीर की प्रत्येक कोशिका के संगठन में होता है। अतः शरीर में इसकी अल्पता की सम्भावना कम रहती है। यह लगभग प्रत्येक आहार द्रव्य में होता है। इसकी दैनिक आवश्यकता लगभग 4 मिलीग्राम होती है। 100 मिली लीटर रक्त में पोटेशियम की मात्रा 200 मिलीग्राम होती है। इसका अधिकांश भाग लोहित कोशिकाओं तथा शरीर की …

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भुजंगासन करने की विधि तथा इसके लाभों का वर्णन

इसे सर्पासन या सर्प मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है। यह स्त्री-पुरुष दोनों के लिए लाभकारी है। इससे आध्यात्मिक व भौतिक दोनों प्रकार के लाभ मिलते है। हठयोग और घेरंड संहिता में इस आसन को कुंडलिनी जागरण करने का साध्य माना जाता है। इस आसन को बच्चे, बूढ़े, जवान, रोगी व निरोगी सभी कर …

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विटामिन B12 के स्रोत, कार्य, कमी से होने वाले रोग

विटामिन B12 (सायनोकोबेलामिन) इस विटामिन के जल में घुलनशील लाल वर्ण के क्रिस्टल होते हैं। विटामिन B12 के स्रोत यह दूध, माँस, अण्डे, यकृत, वृक्क आदि में मिलता है। आमाशय में केवल अन्तःस्थ कारक की उपस्थिति में इसका अवशोषण होता है। अतः इस विटामिन को बहिरस्थ कारक भी कहते है। अवशोषित होकर यह विटामिन यकृत में …

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गुरु नानक का जीवन परिचय

गुरूनानक जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 को तलवण्डी (पाकिस्तान) में हुआ था। आज यह स्थान ‘ननकाना साहिब’ के नाम से जाना जाता है। गुरूनानक जी की माता का नाम तृप्ता था। गुरूनानक जी के पिता का नाम मेहता कल्याणदास था। बड़ी बहन ‘नानकी’ के अनुकरण पर गुरूनानक जी का नाम ‘नानक’ रखा गया। कुछ लोग इसे …

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निष्पादन बजट क्या है? निष्पादन बजट एवं परम्परागत बजट के अन्तर

निष्पादन बजट शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग सन् 1949 में संयुक्त राज्य अमेरिका में हूवर कमीशनने अपनी रिपोर्ट में किया था, जिसमें यह उल्लेख किया गया कि बजट ऐसा होना चाहिए, जो कार्यों, कार्यक्रमों एवं क्रियाकलापों पर आधारित हो। वास्तव में निष्पादन बजट की अवधारणा प्रबन्धकीय कुशलता में वृद्धि से सम्बन्धित है, जो कार्यों एवं कार्यक्रमों पर …

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संगीत में श्रुति की परिभाषा और प्रकार

संगीतोपयोगी नाद जो कान को साफ-साफ सुनाई पड़े ‘श्रुति’ कहलाती है। शास्त्रकार श्रुति की परिभाषा इस प्रकार करते हैं- ‘‘ श्रुयते इति श्रुतिः’’ अर्थात जो आवाज कान को सुनाई दे वह ‘श्रुति’ है। ध्यान से देखें तो यह परिभाषा अपने में पूर्ण नही है, क्योंकि संगीतोपयोगी आवाज को छोड़कर और भी आवाजें कान को सुनाई पड़ती …

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फतवा ए जहांदारी के लेखक कौन है ?

इस कृति के रचनाकार के रूप में जियाउद्दीन बरनी जाने जाते हैं। बरनी ने इस गंन्थ में अलाउद्दीन के अनेक आर्थिक सुधार एवं सिद्धान्तों को लिखा गया है। फतवा-ए-जहांदारी की केवल एक हस्तलिखित प्रति इण्डिया आफिस के पुस्तकालय में मिलती है। इसमें 248 पृष्ठ हैं। कही-कही पृष्ठों के बीच का भाग मिट गया है। बरनी ने …

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राजा राममोहन राय का जीवन परिचय एवं उनके द्वारा लिखित पुस्तकें

राजा राममोहन राय का जन्म 1774 ई. में बंगाल में हुआ था। उन्होंने अरबी, फारसी, संस्कृत के अलावा अंग्रेजी, फ्रेंच, ग्रीक, लैटिन,जर्मन और हिबू भाषाऐं भी सीखी। राजा राममोहन का जब जन्म हुआ तब बंगाल आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक दृष्टि से आडंबरों से ग्रसित था। हिन्दू धर्म के प्रमुख ग्रंथों का उन्होंने अध्ययन किया और भारत …

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तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के कारण

तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध युद्ध के कारण 1. टीपू द्वारा फ्रांस-तुर्की से सहायता का प्रयत्न – आंग्ल-मैसूर संबंधों में परिस्थितियों से बाध्य होकर टीपू ने 1784 ई. में अंग्रेजों से मंगलौर की संधि कर ली थी परन्तु हृदय से वह अंग्रेजों का कट्टर शत्रु था। वह उनकी शक्ति को नष्ट करने के लिए दृढ़-संकल्पित था। इसीलिए उसने …

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वहाबी आंदोलन का नेतृत्व किसने किया ?

शाह वलीउल्लाह वहाबी आंदोलन धर्म सुधार आंदोलन समर्थन तथा पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के विरोध में मुसलमानों में पहली प्रतिक्रिया वहाबी आंदोलन के रूप में हुई इस आंदोलन का नेतृत्व शाह वलीउल्लाह (1702-62) ने किया। यह आंदोलन वास्तविक रूप से मुसलमानों के धार्मिक रीति रिवाजों तथा मान्यताओं में आई कुरीतियों को दूर करने का प्रयास था। इस आंदोलन का प्रमुख …

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