भोज्य पदार्थ किसे कहते है इसका वर्गीकरण

भोज्य पदार्थ वे सभी हैं जिन्हें हम भोजन के रूप में खाते हैं, जैसे- अनाज, दालें, मसालें, सब्जियाँ, फल, घी, दूध भोज्य पदार्थ कहते हैं इन सब भोज्य पदार्थों में हर पौष्टिक तत्व अलग-अलग मात्रा में होते हैं।  केवल एक या दो भोज्य पदार्थ भोजन को सन्तुलित नहीं बना सकते हैं। किसी एक भोज्य पदार्थ में सभी पौष्टिक तत्व …

Read more

विटामिन के प्राकृतिक स्रोत क्या है?

आयुर्वेद के अनुसार व्यक्ति अपने रोज लिए जाने वाले भोजन से ही विटामिन तथा खनिज द्रव्यों को प्राप्त कर सकता है। हमें विटामिन स्रोतों को जानकर उसके अनुरूप पोषक तत्वों को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए। हमारे भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में सभी प्रकार की सब्जियाॅं, फल, मेवे तथा अनाज शामिल होने चाहिए। …

Read more

मसालों के औषधीय गुण और उपयोग

मसालों का प्रमुख कार्य भोज्य पदार्थों को सुगन्धित, स्वादिष्ट एवं आकर्षक बनाना है। मसालों की सुगन्ध पाचक रसों को उत्तेजित करती है। भोजन के साथ कई मसालों का प्रयोग करना चाहिए भोजन में प्रयोग होने वाले मसाले गरम या ठंडे होते है जो कि पाचन तंत्र को सही रखते है। मसाले कटु रस प्रधान सुगंधित तेलों से …

Read more

भोजन करने के नियम क्या है ?

वे पदार्थ जो शरीर में ग्रहण किये जाने के पश्चात् उर्जा उत्पन्न करते हो, नये तन्तुओं का निमार्ण तथा पुराने (टूटे-फूटें) उत्तकों की मरम्मत करते हो, शारीरिक क्रियाओं पर नियन्त्रण तथा शरीर के लिये आवश्यक यौगिको के बनाने में सहयोग करते है भोजन कहलाते है । भोजन का उद्देश्य भूख को शान्त करना या जिह्वा की …

Read more

आयुर्वेद के आठ अंग

आयुर्वेद के आठ अंग प्रारम्भ में आयुर्वेद को आठ अंग में विभक्त किया – शल्य शालाक्य कायचिकित्सा भूतविद्या कौमारभृत्य अगदतन्त्र रसायनतन्त्र वाजीकरण तन्त्र 1. शल्यतन्त्र कई प्रकार के छाल, लकड़ी, पत्थर, धूल, धातु, मिट्टी, हड्डी, केश, नख, पूय आगन्तुक तथा आगन्तुक शल्यों के निकालने के लिये यंत्र-शस्त्र, क्षारकर्म, अग्निकर्म के प्रयोग के लिए कई प्रकार के …

Read more

आयुर्वेद के प्रमुख चार ग्रंथ कौन से हैं ?

संसार के प्राचीनतम ग्रन्थों में ऋग्वेद, सामवेद, अथर्ववेद एवं सामवेद हैं। इन चारों वेदों में आयुर्वेद चिकित्सा का भी वर्णन है। अथर्वेद में आयुर्वेद में आयुर्वेद का विस्तृत वर्णन मिलता है तथा आयुर्वेद को अथर्ववेद का उपवेद माना गया है। आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथ  आयर्वेद में उपलब्ध ग्रन्थों को वृहत्त्रयी एवं लघुत्रयी कहा गया है। चरकसंहिता …

Read more

तीव्र रोग किसे कहते है ?

जब शरीर में या उसके किसी भाग में अधिक मल एकत्र हो जाता है तो उसका निष्कासन तीव्र रोगों के रूप में होने लगता है, जो कुछ ही दिन रहकर उस संचित मल को शरीर से निकालकर स्वतः ही चले जाते हैं। जिनकी जीवनीशक्ति प्रबल और अधिक होती है, उन्हें ही तीव्र रोग होता है। जिस रोग …

Read more

शारीरिक रोग किसे कहते हैं ? शारीरिक रोग के कारण

शरीर में जब किसी प्रकार का कष्ट या तकलीफ होता है या शरीर के अंग अपने-अपने कार्य जब सही ढंग से नहीं कर पाते तब उसे शारीरिक रोग कहते हैं।  शारीरिक रोग की परिभाषा आक्फोर्ड शब्दकोश के अनुसार- ‘‘शारीरिक रोग शरीर के या शरीर के किसी अंग की वह दशा है जिसमें इसके कार्य बाधित होते …

Read more

विजातीय द्रव्य क्या है इसके बनने के कारण?

शरीर के भीतर जो बेकार चीज होती है, जैसे- मल, मूत्र, पसीना, कफ, दूषित सांस, दूषित रक्त, दूषित मांस, पीप आदि जो शरीर को विषाक्त व दूषित करते हैं, शरीर का विनाश करते हैं, शरीर के लिए अनुपयोगी है, उसे ही दोष, विकार, मल या विजातीय द्रव्य के नाम से जाना जाता है।  विजातीय द्रव्य क्या …

Read more

रोग क्या है इसके कारण

जब हमारा खान-पान, रहन-सहन, आहार-विहार अप्राकृतिक एवं दूषित हो जाता है तब हमारे शरीर में दोष जिसे विजातीय द्रव्य कहते हैं, एकत्रित हो जाता है। शरीर में संचित विष ही रोग है। शरीर से मल और दूषित पदार्थों के हटाने के प्रयत्न को रोग कहते हैं। रोगों के प्रकार मानव शरीर के तीन पहलू बताये हें-  …

Read more