रजिया सुल्तान कौन थी रजिया की मृत्यु कैसे हुई?

रजिया सुल्तान, इल्तुतमिश की योग्य पुत्री थी। अल्तमश ने अपने किसी भी पुत्र को गद्दी के उपयुक्त नहीं समझा था । इसलिए उसने अपनी पुत्री रजिया को मनोनीत किया । अल्तमश की मृत्यु के बाद कुछ अमीरों ने उसके सबसे बड़े बेटे रूकनुद्दीन को गद्दी पर बैठाया । तथापि रजिया ने दिल्ली की जनता और कुछ …

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घनानंद का जीवन परिचय, प्रमुख रचनाएं, भावपक्ष, कला पक्ष

घनानंद रीतिकाल की रीतिमुक्त स्वच्छन्द काव्यधारा के सुप्रसिद्ध कवि है। आचार्य शुक्ल के मतानुसार इनका जन्म सवंत् 1746 में दिल्ली में हुआ था। घनानंद की मृत्यु के बारे में विद्वानों के दो प्रकार के मत है। प्रथम मत के अनुसार नादिरशाह के आक्रमण के समय मथुरा में सैनिकों द्वारा प्रथम प्रश्नपत्र घनानंद की मृत्यु हुई। किन्तु …

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भ्रमरगीत का क्या अर्थ है? सूरदास के भ्रमरगीत की विशेषताएं

भ्रमरगीत का शाब्दिक अर्थ है- भ्रमर का गान अथवा गुंजन। भ्रमरगीत काव्य परम्परा का मूल एवं आधारभूत ग्रंथ श्रीमद्भागवत है। भागवत में कृष्ण कथा के अन्य प्रसंगों के साथ 47वें अध्याय में भ्रमरगीत का प्रसंग आया है। इसमें भ्रमरगीत का प्रारम्भ श्रीकृष्ण के गोकुल लीला के स्मरण से होता है। उन्हें बचपन के ग्वाल’- बाल सखाओं …

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कबीर दास का जीवन परिचय, कबीर की भाषा, समाज सुधारक रूप

कबीर निर्गुण धारा के सर्वश्रेष्ठ कवि है। वे संतमत के प्रर्वतक और संत काव्य के कवि है। हिन्दी साहित्य के भक्तिकालीन साहित्य के प्रमुख स्तम्भों में से एक हैं। हिन्दी साहित्य में भक्ति आन्दोलन को प्रसारित करने में भी योगदान सर्वाधिक है। उनकी भक्ति का मूल आधार व्यक्ति की गरिमा को सुरक्षित रखकर एकता का प्रतिपादन …

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आयुर्वेद के आठ अंग

आयुर्वेद के आठ अंग प्रारम्भ में आयुर्वेद को आठ अंग में विभक्त किया – शल्य शालाक्य कायचिकित्सा भूतविद्या कौमारभृत्य अगदतन्त्र रसायनतन्त्र वाजीकरण तन्त्र 1. शल्यतन्त्र कई प्रकार के छाल, लकड़ी, पत्थर, धूल, धातु, मिट्टी, हड्डी, केश, नख, पूय आगन्तुक तथा आगन्तुक शल्यों के निकालने के लिये यंत्र-शस्त्र, क्षारकर्म, अग्निकर्म के प्रयोग के लिए कई प्रकार के …

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आयुर्वेद के प्रमुख चार ग्रंथ कौन से हैं ?

संसार के प्राचीनतम ग्रन्थों में ऋग्वेद, सामवेद, अथर्ववेद एवं सामवेद हैं। इन चारों वेदों में आयुर्वेद चिकित्सा का भी वर्णन है। अथर्वेद में आयुर्वेद में आयुर्वेद का विस्तृत वर्णन मिलता है तथा आयुर्वेद को अथर्ववेद का उपवेद माना गया है। आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथ  आयर्वेद में उपलब्ध ग्रन्थों को वृहत्त्रयी एवं लघुत्रयी कहा गया है। चरकसंहिता …

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तीव्र रोग किसे कहते है ?

जब शरीर में या उसके किसी भाग में अधिक मल एकत्र हो जाता है तो उसका निष्कासन तीव्र रोगों के रूप में होने लगता है, जो कुछ ही दिन रहकर उस संचित मल को शरीर से निकालकर स्वतः ही चले जाते हैं। जिनकी जीवनीशक्ति प्रबल और अधिक होती है, उन्हें ही तीव्र रोग होता है। जिस रोग …

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शारीरिक रोग किसे कहते हैं ? शारीरिक रोग के कारण

शरीर में जब किसी प्रकार का कष्ट या तकलीफ होता है या शरीर के अंग अपने-अपने कार्य जब सही ढंग से नहीं कर पाते तब उसे शारीरिक रोग कहते हैं।  शारीरिक रोग की परिभाषा आक्फोर्ड शब्दकोश के अनुसार- ‘‘शारीरिक रोग शरीर के या शरीर के किसी अंग की वह दशा है जिसमें इसके कार्य बाधित होते …

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विजातीय द्रव्य क्या है इसके बनने के कारण?

शरीर के भीतर जो बेकार चीज होती है, जैसे- मल, मूत्र, पसीना, कफ, दूषित सांस, दूषित रक्त, दूषित मांस, पीप आदि जो शरीर को विषाक्त व दूषित करते हैं, शरीर का विनाश करते हैं, शरीर के लिए अनुपयोगी है, उसे ही दोष, विकार, मल या विजातीय द्रव्य के नाम से जाना जाता है।  विजातीय द्रव्य क्या …

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रोग क्या है इसके कारण

जब हमारा खान-पान, रहन-सहन, आहार-विहार अप्राकृतिक एवं दूषित हो जाता है तब हमारे शरीर में दोष जिसे विजातीय द्रव्य कहते हैं, एकत्रित हो जाता है। शरीर में संचित विष ही रोग है। शरीर से मल और दूषित पदार्थों के हटाने के प्रयत्न को रोग कहते हैं। रोगों के प्रकार मानव शरीर के तीन पहलू बताये हें-  …

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