राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम 1990 के मुख्य कार्य

वर्ष 1990 में, राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम पारित हुआ। राष्ट्रीय महिला आयोग महिलाओं के सशक्तीकरण का एक अन्य महत्वपूर्ण उपकरण है। अधिनियम की धारा 3(1) के अनुसार केन्द्रीय सरकार राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन करेगी जो अधिनियम के अन्तर्गत दिये गये कार्यों का सम्पादन करेगा। आयोग अधिनियम की धारा 10 के अन्तर्गत उल्लिखित कार्यों का सम्पादन …

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भारत के जल संसाधन क्या है ?

भारत में विश्व के कुल जल संसाधन का 5 प्रतिशत जल संसाधन है। भारत में नदियों का औसत वार्षिक प्रवाह 1869 घन किलोमीटर है। सतही जल का सर्वाधिक प्रवाह सिंधु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र में है जो कुल प्रवाह का 60 प्रतिशत है। भारत में सतही जल 1869 अरब घन मीटर प्रतिवर्ष आकलन किया गया है। सतही …

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सामाजिक मनोविज्ञान का क्षेत्र क्या है?

सामाजिक मनोवैज्ञानिक यह जानने का प्रयास करते हैं कि व्यक्ति एक दूसरे के बारे में कैसे सोचते हैं तथा कैसे एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। ‘‘सामाजिक मनोविज्ञान उन मानसिक अवस्थाओं एवं प्रवाहों का अध्ययन करता है जो मनुष्यों में उनके पारस्परिक सम्पर्क के कारण उत्पन्न होते हैं। यह विज्ञान मनुष्यों की उन भावनाओं, विश्वासों और कार्यों …

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जॉन लॉक के मानव स्वभाव पर विचार

जॉन लॉक के मानव स्वभाव पर विचार जॉन लॉक के मानव स्वभाव पर विचार हॉब्स से सर्वथा विपरीत हैं। जॉन लॉक के मानव स्वभाव पर विचार उसकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘मानव-विवेक से सम्बन्धित निबन्ध’ में पाए जाते हैं। जॉन लॉक का यह विश्वास है कि मनुष्य एक बुद्धियुक्त सामाजिक प्राणी है। अत: वह एक नैतिक व्यवस्था को …

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जॉन लॉक का प्राकृतिक अधिकारों का सिद्धांत

जॉन लॉक के प्राकृतिक अधिकार का सिद्धांत जॉन लॉक का राजदर्शन के इतिहास को सबसे बड़ी देन उसके प्राकृतिक अधिकार विशेषकर सम्पत्ति का अधिकार है। यह धारणा जॉन लॉक के राजनीतिक दर्शन का सार है। जॉन लॉक के सभी सिद्धांत किसी न किसी रूप में जॉन लॉक के प्राकृतिक अधिकारों के सिद्धांत से जुड़े हुए हैं। जॉन …

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जॉन लॉक की प्राकृतिक अवस्था की अवधारणा

जॉन लॉक की प्राकृतिक अवस्था की अवधारणा  हॉब्स की तरह जॉन लॉक भी अपने राजनीति दर्शन का प्रारम्भ प्राकृतिक अवस्था से करता है। जॉन लॉक की प्राकृतिक अवस्था की अवधारणा हॉब्स की प्राकृतिक दशा की धारणा से बिल्कुल विपरीत है। जॉन लॉक का विश्वास है कि मनुष्य एक बुद्धियुक्त प्राणी है और वह नैतिक अवस्था को …

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जॉन लॉक का सामाजिक समझौता सिद्धांत

जॉन लॉक का सामाजिक समझौता सिद्धांत लॉज के राजनीतिक चिन्तन का सर्वाधिक प्रमुख भाग सामाजिक समझौता सिद्धांत है जिसके द्वारा लॉक ने इंगलैण्ड में हुई 1688 की गौरवपूर्ण क्रान्ति के औचित्य को ठीक ठहराया है। सामाजिक समझौता सिद्धांत सबसे पहले हॉब्स ने प्रतिपादित किया, परन्तु लॉक ने उसे उदारवादी आधार प्रदान करने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका …

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बेंथम के राजनीतिक विचार

इतिहास में यह एक विवादास्पद मुद्दा रहा है कि क्या बेंथम को एक राजनीतिक दार्शनिक माना जाए या नहीं। कई लेखक उसको राजनीतिक दार्शनिक की बजाय एक राजनीतिक सुधारक मानते हैं। उनके अनुसार बेंथम का ध्येय किसी राजनीतिक सिद्धान्त का प्रतिपादन करना नहीं था बल्कि अपने सुधारवादी कार्यक्रम की पृष्ठभूमि के लिए राज्य के सम्बन्ध में …

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बेन्थम उपयोगितावाद का सिद्धांत, #जेरेमी बेन्थम

बेन्थम के उपयोगितावाद का सिद्धांत बेंथम की सबसे महत्त्वपूर्ण एवं अमूल्य देन है। उसके अन्य सभी राजनीतिक विचार उसके उपयोगितावाद पर ही आधारित हैं। लेकिन उसे इसका प्रवर्तक नहीं माना जा सकता। रोचक बात यह है कि बेंथम ने कहीं भी उपयोगितावाद शब्द का प्रयोग नहीं किया।  बेन्थम के उपयोगितावाद का सिद्धांत बेंथम के उपयोगितावादी दर्शन …

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हीगल के राज्य संबंधी विचार, #Hegel

हीगल के राज्य संबंधी विचार सम्पूर्ण राजनीतिक चिन्तन में एक महत्त्वपूर्ण एवं मौलिक विचार हैं। उसके प्रमुख राज्य संबंधी विचार ‘फिनोमिनोलॉजी ऑफ स्पिरिट’ तथा ‘फिलोसॉफी ऑफ राइट’ नामक ग्रन्थों में वर्णित हैं। हीगल ने जर्मनी की तत्कालीन राजनीतिक दुर्दशा को देखकर अपने चिन्तन को खड़ा किया था ताकि जर्मनी का एकीकरण हो सके और जर्मनी एक शक्तिशाली राष्ट्र …

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