गुणात्मक अनुसंधान क्या है ?

अनुसन्धान विधियों को मुख्यत: दो रूपों में बॉटा जा सकता हे- तार्किक प्रत्यक्षवाद (Logical Positivism) तथा गोचर खोज (Phenomenological Inquiry) । शैक्षिक शोधों में पहला रूप ज्यादा प्रयुक्त हुआ है। परन्तु विगत एक दशक से शैक्षिक परिस्थितियों से सम्बन्धित समस्याओं, समाधान प्रक्रियाओं एवं व्यवस्थाओं से मुद्दों को स्पष्ट एवं उजागर करने के लिये गोचर खेाज उपागम …

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वर्णनात्मक अनुसंधान क्या है ?

शिक्षा तथा मनोविज्ञान के क्षेत्र में वर्णनात्मक अनुसन्धान का महत्व बहुत अधिक है इस विधि का प्रयोग शिक्षा व मनोविज्ञान के क्षेत्र में व्यापक रूप से होता है। जॉन डब्ल्यू बेस्ट के अनुसार ‘‘वर्णनात्मक अनुसन्धान ‘क्या है’ का वर्णन एवं विश्लेषण करता है। परिस्थितियाँ अथवा सम्बन्ध जेा वास्तव में वर्तमान है, अभ्यास जो चालू है, विश्वास, …

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ऐतिहासिक अनुसंधान विधि क्या है ?

ऐतिहासिक अनुसन्धान विधि ऐतिहासिक अनुसन्धान का सम्बन्ध भूतकाल से हैं। यह भविष्य केा समझने के लिये भूत का विष्लेशण करता है। जॉन डब्ल्यू बेस्ट के अनुसार ‘‘ऐतिहासिक अनुसन्धान का सम्बन्ध ऐतिहासिक समस्याओं के वैज्ञानिक विष्लेशण से है। इसके विभिन्न पद भूत के सम्बन्ध में एक नयी सूझ पैदा करते है, जिसका सम्बन्ध वर्तमान और भविष्य से …

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शोध परिकल्पना क्या है ?

परिकल्पना शब्द परि + कल्पना दो शब्दों से मिलकर बना है। परि का अर्थ चारो ओर तथा कल्पना का अर्थ चिन्तन है। इस प्रकार परिकल्पना से तात्पर्य किसी समस्या से सम्बन्धित समस्त सम्भावित समाधान पर विचार करना है। परिकल्पना किसी भी अनुसन्धान प्रक्रिया का दूसरा महत्वपूर्ण स्तम्भ है। इसका तात्पर्य यह है कि किसी समस्या के …

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शोध समस्या की प्रकृति एवं चयन

किसी भी शैक्षिक शोध की शुरूआत एक शोध समस्या की स्पष्ट पहचान से होती है। शोध समस्या की स्पष्ट रूप से पहचान कर उसका उल्लेख करना शोधकर्ता के लिए एक कठिन कार्य होता है। फिर भी वह परिस्थितियों की समझ, अपने अनुभवों एवं पहले किये गये शोधों की समीक्षा करके किसी स्पष्ट तथा ठोस समस्या का …

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भाषा विकास

भाषा का अर्थ होता है- कही हुर्इ चीज। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार भाषा दूसरों तक विचारों को पहुंचाने की योग्यता हैं इसमें विचार-भाव के आदान प्रदान के प्रत्येक साधन सम्मिलित किये जाते हैं। जिसमें विचारों और भावों के प्रतीक बना लिये जाते हैं जिससे कि आदान प्रदान के व्यापक रूप में भिन्न रूपों जैसे लिखित, बोले गये, …

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संज्ञानात्मक विकास का अर्थ एवं सिद्धान्त

संज्ञानात्मक विकास मनुष्य के विकास का महत्वपूर्ण पक्ष है। ‘संज्ञान’ शब्द का अर्थ है ‘जानना’ या ‘समझना’। यह एक ऐसी बौद्धिक प्रक्रिया है जिसमें विचारों के द्वारा ज्ञान प्राप्त किया जाता है। संज्ञानात्मक विकास शब्द का प्रयोग मानसिक विकास के व्यापक अर्थो में किया जाता है जिसमें बुद्धि के अतिरिक्त सूचना का प्रत्यक्षीकरण, पहचान, प्रत्याºवान और …

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वृद्धि एवं विकास

अभिवृद्धि व्यक्ति के स्वाभाविक विकास को अभिवृद्धि कहते है। गर्भाशय में भ्रूण बनने के पश्चात जन्म होते समय तक उसमें जो प्रगतिशील परिवर्तन होते है वह अभिवृद्धि है। इसके अतिरिक्त जन्मोपरान्त से प्रौढावस्था तक व्यक्ति में स्वाभाविक रूप से होने वाले परिवर्तन, जो अधिगम एवं प्रशिक्षण आदि से प्रभावित नही है, और ऊध्र्ववर्ती है, भी अभिवृद्धि …

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अभिक्षमता का अर्थ, मापन एवं अभिक्षमता परीक्षण के प्रकार

अभिक्षमता का अर्थ किसी व्यक्ति की उस तत्परता, योग्यता, क्षमता या रूझान से है जो किसी कार्य या व्यवसाय में भावी सफलता पाने हेतु आवश्यक हेाती है तथा जिसका प्रस्फुटन शिक्षा एवं अभ्यास के द्वारा होता है। ऐसी प्रतिभा, योग्यता या क्षमता प्राय: जन्मजात होती है। विंघम के शब्दों में अभिक्षमता ‘‘किसी विशिष्ट प्रशिक्षण के उपरान्त …

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दर्शन का अर्थ, परिभाषा, आवश्यकता एवं विशेषताएँ

दर्शन का अर्थ दर्शन शब्द संस्कृत की दृश् धातु से बना है- ‘‘दृश्यते यथार्थ तत्वमनेन’’ अर्थात् जिसके द्वारा यथार्थ तत्व की अनुभूति हो वही दर्शन है। अंग्रेजी के शब्द फिलॉसफी का शाब्दिक अर्थ ‘‘ज्ञान के प्रति अनुराग’’ होता है। भारतीय व्याख्या अधिक गहरार्इ तक पैठ बनाती है, क्योंकि भारतीय अवधारणा के अनुसार दर्शन का क्षेत्र केवल …

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