आंग्ल मराठा युद्ध के कारण एवं परिणाम

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (1772 ई. से 1784 ई.) 1761 ई. में पनीपत के तृतीय युद्ध के कुछ समय बाद ही पेशवा बालाजी बाजीराव की मृत्यु हो गयी। उसके पश्चात उसका पुत्र माधवराव पेशवा बना। उसने थोड़े समय में ही मराठा शक्ति ओर साम्राज्य को पुन: बढ़ा लिया और महादजी सिंधिया ने मुगल सम्राट शाहआलम को अंग्रेजों …

Read more

पिट्स इंडिया एक्ट कब पारित हुआ? पिट्स इंडिया एक्ट के मुख्य उपबंध

अगस्त, 1784 ई. में पिट का  इंडिया एक्ट पास हुआ। इसने भूतपूर्व अधिनियमों के दोषों को दूर करने का प्रयास किया। इसकी भाषा संयमित थी। इसमें कंपनी के प्रदेशों को भारत में ब्रिटिश अधिकृत क्षेत्र कहा गया था। पिट्स इंडिया एक्ट पारित होन की घटनाएँ 1772 तथा 1781 में कम्पनी के मामलों की छानबीन करने के …

Read more

रेगुलेटिंग एक्ट कब पारित हुआ, रेगुलेटिंग एक्ट के दोष

रेगुलेटिंग एक्ट के मुख्य उपबंध 1. मद्रास और बंबई को बंगाल के अधीन किया जाना – 1773 ई. के पूर्व बंगाल और मद्रास की प्रेसीडेन्सियाँ एक दूसरे से स्वतंत्र थी। इस अधिनियम के द्वारा बंबई और मद्रास प्रेसिडेन्सियों को बंगाल के अधीन कर दिया गया। बंगाल के गवर्नर को तीन प्रेसिडेन्सियों का निरीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का …

Read more

बक्सर युद्ध के कारण और परिणाम

बक्सर का युद्ध के कारण और परिणाम निम्नलिखित है। बक्सर युद्ध के कारण बक्सर का युद्ध के कारण निम्नलिखित है। बंगाल में प्रभुत्व की समस्या  संरक्षण की नीति का त्याग  एलिस की नीति  अंग्रेजों का व्यापारिक विवाद  मीरकासिम के विरूद्ध शड़यंत्र एवं पटना पर आक्रमण मीरकासिम की प्रारम्भिक पराजय और पटना का हत्याकांड 1. बंगाल में प्रभुत्व …

Read more

प्लासी का युद्ध के कारण, घटनाएं और परिणाम

ज्योंही कलकत्ता के पतन का समाचार मद्रास पहुंचा, वहां के अधिकारियों ने एक सेना जो उन्होंने फ्रांसीसियों के विरुद्ध युद्ध के लिए गठित की थी, क्लाइव के नेतृत्व में कलकत्ते भेज दी। क्लाइव को अपना कार्य शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण करने को कहा गया क्योंकि यह सेना फ्रांसीसियों के विरुद्ध युद्ध के लिए मद्रास में चाहिए थी। यह सेना 16 …

Read more

कर्नाटक युद्ध के कारण, महत्व और परिणाम

कर्नाटक अपनी धन सम्पदा के लिये प्रसिद्ध था। दिल्ली के सैयद बन्धुओं के प्रभाव से मुगल सम्राट ने मराठों को कर्नाटक से चौथ वसूल करने का अधिकार दे दिया था। जब मराठों ने कर्नाटक के नवाब दोस्त अली से चौथ की धनराशि मांगी और उसने यह धनराशि नहीं दी तो मराठों ने 1740 ई. में कर्नाटक …

Read more

मोल सिद्धांत क्या है?

परमाणु द्रव्यमान इकाई (Atomic mass unit or amu)- तत्वों के परमाणु द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए आजकल कार्बन (जिसका परमाणु-द्रव्यमान 12 होता है) परमाणु के द्रव्यमान के 12 वे भाग को इकाई मान लिया गया है। इसे परमाणु-द्रव्यमान इकाई कहते है। परमाणु द्रव्यमान इकाई के अनुसार परमाणु द्रव्यमान की परिभाषा इस प्रकार दी जाती है- किसी तत्व …

Read more

मूलानुपाती सूत्र और आणविक सूत्र क्या है मूलानुपाती सूत्र और अणु सूत्र में सबंध?

मूलानुपाती सूत्र या सरल सूत्र किसी यौगिक का वह सूत्र जो उस यौगिक के अणु में उपस्थित तत्वों के परमाणुओं की संख्याओं का सरलतम पारस्परिक अनुपात व्यक्त करता है, मूलानुपाती सूत्र या सरल सूत्र कहलाता है। लेकिन इस सूत्र सें यौगिक के अणु में उपस्थित तत्वों के परमाणुओं के वास्तविक संख्या का ज्ञान नहीं होता। 👉 उदाहरणार्थ- …

Read more

स्वस्थ व्यक्तियों पर मूत्र चिकित्सा का प्रभाव रोगी व्यक्तियों पर मूत्र चिकित्सा का प्रभाव

शाब्दिक रुप से देखने पर मूत्र चिकित्सा का अर्थ स्वत: ही स्पष्ट हो जाता है-’’ मूत्र द्वारा विविध रोगों की चिकित्सा करना मूत्र चिकित्सा कहलाता है। इसके अन्तर्गत प्रमुख रुप से स्वमूत्र एवं गौमूत्र द्वारा चिकित्सा करने का वर्णन आता है। मूत्र चिकित्सा को प्राचीन शास्त्रों में शिवाम्बु कल्प का नाम देते हुए कहा गया है …

Read more

संतुलित आहार का अर्थ, परिभाषा, प्रमुख घटक, महत्व

ऐसा आहार जिसमें वे सभी चीजें उचित मात्रा में मौजूद हों जो शरीर निर्वाह के लिए आवश्यक है। ऐसे ही भोजन से शरीर का भली-भाँति पोषण होता है। उससे पर्याप्त शक्ति और ताप की उपलब्धि होती है तथा स्वास्थ्य एवं आयु की वृद्धि होती है। संतुलित आहार में कार्बोज, वसा, प्रोटीन, खनिज लवण, जल तथा सभी प्रकार के विटामिन उचित मात्रा में होते हैं जिनसे शरीर …

Read more