अनुक्रम
अवलोकन का अर्थ
अवलोकन का अर्थ अवलोकन शब्द अंग्रेजी भाषा के शब्द ‘Observation’ का पर्यायवाची है। अवलोकन का अर्थ
‘देखना, प्रेक्षण, निरीक्षण। यह ‘Observe’ शब्द से बना है जिसका अर्थ ध्यान देना, परीक्षा करना, अनुष्ठान करना आदि। इसका सीधा अर्थ है आंखों से देखना।।
अनुसार विज्ञान निरीक्षण से प्रारम्भ होता है और फिर सत्यापन के लिए अन्तिम रूप से निरीक्षण
पर ही लौटकर आता है। और वास्तव में को वैज्ञानिक किसी भी घटना को तब तक स्वीकार
नहीं करता जब तक कि वह स्वयं उसका अपनी इन्द्रियों से निरीक्षण नहीं करता।
अवलोकन की परिभाषा
अवलोकन के प्रकार
अध्ययन की सुविधा के लिए निरीक्षण को कई भागों में बाँटा जाता है। प्रमुख रूप से निरीक्षण का वर्गीकरण इस प्रकार है।
- अनियन्त्रित अवलोकन
- नियन्त्रित अवलोकन
- सहभागी अवलोकन
- असहभागी अवलोकन
- अर्द्वसहभागी अवलोकन
- सामूहिक अवलोकन
1. अनियन्त्रित अवलोकन
अनियन्त्रित निरीक्षण ऐसे निरीक्षण को कहा जा सकता है जबकि उन लोगों पर किसी प्रकार
का को नियंत्रण न रहे जिन का अनुसंधानकर्ता निरीक्षण कर रहा है। दूसरे शब्दों में जब
प्राकृतिक पर्यावरण एव अवस्था में किन्ही क्रियाओं का निरीक्षण किया जाता है। साथ ही क्रियाये
किसी भी बाहय शक्ति द्वारा संचालित एंव प्रभावित नही की जाती है तो ऐसे निरीक्षण का
अनियंत्रित निरीक्षण कहा जाता है। इस प्रकार के अवलोकन में अवलोकन की जाने वाली घटना
को बिना प्रभावित किये हुये, उसे उसके स्वाभाविक रूप में देखने का प्रयास किया जाता है।
इसलिए गुड एवं हाट इसे साधारण अवलोकन (Simple observation) कहते हैं।
2. नियन्त्रित अवलोकन
अभाव-ने ही नियन्त्रित अवलोकन का सूत्रपात किया है। नियन्त्रित अवलोकन में अवलोकनकर्त्ता
पर तो नियन्त्रण होता ही है, साथ ही साथ अवलोकन की जाने वाली घटना अथवा परिस्थिति
पर भी नियन्त्रण किया जाता है। अवलोकन सम्बन्धी पूर्व योजना तैयार की जाती है, जिसके अन्तर्गत निर्धारित प्रक्रिया एवं साधनों की सहायता से तथ्यों का संकलन किया जाता है। इस
प्रकार के अवलोकन में निम्न दो प्रकार से नियन्त्रण लागू किया जाता है –
जाता है जिस प्रकार प्राकृतिक विज्ञानों में प्रयोगशाला में परिस्थितियों को नियन्त्रित करके
अध्ययन किया जाता है, उसी प्रकार समाज वैज्ञानिक भी सामाजिक घटनाओं अथवा
परिस्थितियों को नियन्त्रित कर के, उनका अध्ययन करता है। तथापि, सामाजिक घटनाओं एवं
मानवीय व्यवहारों को नियन्त्रित करना अत्यन्त कठिन कार्य होता है। इस प्रविधि का प्रयोग
बालकों के व्यवहारों, श्रमिकों की कार्य-दषाओं, आदि, के अध्ययनों में प्रयुक्त किया जाता है।
नियन्त्रण लगाया जाता है। यह नियन्त्रण कुछ साधनों द्वारा संचालित किया जाता है। जैसे-
51
अवलोकन की विस्तृत पूर्व योजना, अवलोकन अनुसूची, मानचित्रों, विस्तृत क्षेत्रीय नोट्स व
डायरी, कैमरा, टेप रिकार्डर आदि प्रयुक्त किया जाना। नियन्त्रण के सम्बन्ध में गुडे एवं हाट का
कहना है ‘‘सामाजिक अनुसंधान में अध्ययन-विषय पर नियन्त्रण रख सकना तुलनात्मक दृष्टि से
कठिन होता है, अत: अवलोकनकर्त्ता पर नियन्त्रण अधिक व्यावहारिक एवं प्रभावी प्रतीत होता
है।’’
तटस्थता की दृष्टि से अनियन्त्रित अवलोकन की अपेक्षा अधिक महत्वपूर्ण हैय और यही इसकी
लोकप्रियता का आधार है।
नियन्त्रित एवं अनियन्त्रित अवलोकनों में अन्तर- उपरोक्त दोनों पद्धतियों में अन्तर स्पष्ट किये जा सकते हैं : –
- नियन्त्रित अवलोकन में घटनाओं एवं परिस्थितियों को अध्ययन के दौरान कुछ समय तक
नियन्त्रित रखना पड़ता है, जबकि अनियन्त्रित अवलोकन में घटनाओं के विभिन्न पक्षों को,
आवश्यकतानुसार, उनके स्वाभाविक रूप में अवलोकित किया जाता है। - नियन्त्रित अवलोकन का संचालन पूर्व योजना के अनुसार ही किया जाता है। अनियन्त्रित
अवलोकन बिना पूर्व योजना किया जाता है। - नियन्त्रित अवलोकन में अवलोकनकर्त्ता को अपने व्यवहार को पूर्व निर्धारित निर्देशों के
अनुसार ही क्रियान्वित करना पड़ता है। अनियन्त्रित अवलोकन में इस प्रकार का को नियन्त्रण
नहीं होता है। - नियन्त्रित अवलोकन में अवलोकन हेतु कतिपय यन्त्रों-जैसे, अवलोकन निर्देशिका, अनुसूची,
अवलोकन कार्ड, आदि-का प्रयोग किया जाता हैय जबकि अनियन्त्रित अवलोकन में यन्त्रों की
आवश्यकता प्राय: नहीं पड़ती है। - नियन्त्रित अवलोकन में अवलोकनकर्त्ता को पूर्व निर्धारित निर्देशों के अनुसार ही कार्य करना
होता है। अत: अध्ययन निष्पक्ष, विश्वसनीय एवं वस्तु निष्ठ बना रहता है। अनियन्त्रित अवलोकन
में घटनाओं को उनके स्वाभाविक रूप में ही देखा जाता है। अत: पक्षपात की सम्भावना रहती
है। - नियन्त्रित अवलोकन में अवलोकनकर्त्ता पर नियन्त्रण होने के कारण अध्ययन गहन एवं सूक्ष्म
नहीं हो पाता हैय जबकि अनियन्त्रित अवलोकन में अवलोकनकर्त्ता पर नियन्त्रण न
होने के कारण अध्ययन स्वाभाविक, गहन एवं सूक्ष्म हो जाता है।
3. सहभागी अवलोकन
के सामने आया, इस प्रविधि को स्पष्ट करते हुए पी0एच0मान से लिखा है ‘‘ सहभागी अवलोकन
की तात्पर्य एक ऐसी दषा है जिसमें अवलोकनकर्ता अध्ययन किये जाने वाले समूह को
अत्यधिक घनिष्ठ सदस्य बन जाता है। पूर्ण-सहभागी अवलोकन से तात्पर्य उस अवलोकन से है
जिसमें अवलोकनकर्त्ता अध्ययन किये जाने वाले समूह में जा कर रहने लगता है। उस समूह की
सभी क्रियाओं में एक सदस्य की तरह भाग लेता है। समूह के सदस्य भी उसे स्वीकार कर लेते
हैं, और उसे अपने समूह का सदस्य मान लेते हैं।
तथ्य संकलन की एक महत्वपूर्ण प्रविधि के रूप में पूर्ण-सहभागी अवलोकन के निम्न गुणों को
रेखांकित किया जा सकता है।
से लम्बे समय तक भागीदारी निभाता है। अत:, उसे समूह की जितनी सूक्ष्म जानकारी प्राप्त हो
जाती है, उतनी अन्य प्रविधियों से सम्भव नहीं है।
उसकी उपस्थिति समूह के व्यवहार को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करती है। अत:, उसे
समूह के वास्तविक व्यवहार को नजदीकी से देखने व अध्ययन करने का अवसर मिलता है।
घटनाओं को स्वाभाविक तथा क्रमबद्ध रूप से घटते हुये देखता है। अत:, संकलित सूचनायें
अधिक विश्वसनीय एवं भरोसा योग्य होती है।
शुद्धता एवं विश्वसनीयता की जाँच सम्भव है।
परिस्थितियों का सरलता से अवलोकन कर सकता है। यही कारण है कि अनेक मानवशास्त्रियों
एवं समाजशास्त्रियों ने छोटे समुदायों, जन – जातियों एवं साँस्कृतिक समूहों के
किसी भी पक्ष का अध्ययन करने में इस विधि का सफलतापूर्वक प्रयोग किया है।
सहभागी अवलोकन के दोष/सीमायें-
कहा है। यह सत्य भी है। उदाहरण के लिए, जनजातियों के साथ सहभागिता के दौरान उनके
रीति-रिवाजों, आदतों, मनोवृत्तियों के अनुसार अवलोकनकर्त्ता का रहना सम्भव नहीं हो सकता
है। इसी प्रकार, पागलों के अध्ययन के दौरान भी सहभागिता सम्भव नहीं है।
उचित ही लिखा है- ‘‘एक क्षेत्रीय कार्यकर्त्ता कुछ व्यावहारिक कारणों से अध्ययन किये जाने
वाले समुदाय के जीवन में कभी भी पूर्णतया भाग नहीं ले सकता है।’’
अवलोकनकर्त्ता के व्यवहार एवं स्वभाव का प्रभाव, समूह के व्यक्तियों के व्यवहार में भी परिवर्तन
ला देता है। ऐसी स्थिति में, समूह के स्वाभाविक एवं वास्तविक व्यवहार का अवलोकन सम्भव
नहीं हो पाता है।
चलते क महत्वपूर्ण तथ्यों को सामान्य समझ कर छोड़ देता है, जबकि वे तथ्य अध्ययन की
दृष्टि महत्वपूर्ण होते हैं।
प्रति लगाव व आत्मीयता पैदा कर देती है। परिणामस्वरूप, वह समूह के अवगुणों को छिपा कर
अच्छाइयों को ही चिन्हित करने लग जाता है, जिससे कि अध्ययन की वस्तुनिष्ठता में कमी
आती है।
विश्वास जीतने में काफी समय के साथ-साथ अधिक धन भी व्यय करना पड़ता है।
अत:, इस प्रविधि का प्रयोग लघु समुदाय में ही संभव है।
है। एक भूमिका अवलोकनकर्त्ता की एवं दूसरी समूह के सदस्य की। दोनों भूमिकाओं के उचित
निर्वहन से ही वह निष्पक्ष सूचनायें एकत्रित कर सकता है। अन्यथा ‘भूमिका संघर्ष’
अवलोकनकर्त्ता की मेहनत पर पानी फेर सकता है।
व्यक्ति प्रधान क्रिया है, अत: इसकी सफलता बहुत कुछ अवलोकनकर्त्ता के व्यक्तिगत गुणों पर
निर्भर करती है।’’
4. असहभागिक अवलोकन
अस्था सदान्य बनता है और न उनकी क्रियाओं में भागीदार ही होता है इस से ही निरीक्षण
कर उसकी गहरा में जाने का प्रयत्न करता है। वह सामूहिक जीवन में स्वंय प्रवेश करने के
बजाए उसके बाहय पहलुओं का ही निरीक्षण करता है। इस प्रकार से निष्पादन एव स्वत्रंतापूर्वक
अध्ययन इस प्रकार की प्रवधि की विशेषता है इसमें अवलोकनकर्त्ता अध्ययन समूह के
बीच उपस्थिति रहते हुये भी, उनके क्रियाकलापों में भागीदारी नहीं निभाता है वरन् तटस्थ तथा
पृथक रहते हुए वह एक मूक दर्शक की तरह घटनाओं को घटते हुए देखता है, सुनता है एवं
उनका आलेखन करता है।
बैठकर घटनाओं का निरीक्षण करना। तथापि, यह आवश्यक है कि असहभागी अवलोकनकर्त्ता
को अपनी उपस्थिति से समूह के घटनाक्रम को प्रभावित नहीं होना देना चाहिये।
उपरोक्त विवेचन से असहभागी अवलोकन की निम्न
विशेषताओं को रेखांकित कर सकते हैं : –
- वस्तु परकता- अवलोकनकर्त्ता अध्ययन समूह में घुलता मिलता नहीं है, वरन् एक मौन दर्शक
के ही रूप में रह कर तथ्यों का संकलन करता है। अत:, उसके अध्ययन में वस्तु-निष्ठता बनी
रहती है। - कम खर्चीली- सहभागी अवलोकन की तुलना में अपेक्षाकृत समय व धन कम खर्च होता है।
तथा भूमिका सामंजस्य की समस्या से भी मुक्ति मिल जाती है। - विश्वसनीयता- अवलोकनकर्त्ता अपरिचित के रूप में होता है। अत: अध्ययन समूह के सदस्य
बिना हिचकिचाये स्वाभाविक रूप से व्यवहार करते हैं। अत:, तथ्यों की विश्वसनीयता बनी रहती है।
असहभागी अवलोकन के दोष-
- पूर्ण असहभागिता सम्भव नहीं हो पाती हैय अर्थात् अवलोकनकर्त्ता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से
कहीं न कहीं घटनाओं से प्रभावित हो सकता है। - यदि अध्ययन समूह के सदस्यों को अवलोकनकर्त्ता पर सन्देह हो जाने की दषा में, उनके
व्यवहार में कृत्रिमता आ सकती है। - अवलोकनकर्त्ता घटनाओं को केवल अपने दृष्टिकोण से ही देखता है जिससे मौलिकता
संदेहपूर्ण हो सकती है। - अचानक घटित होने वाली घटनाओं का अध्ययन इस प्रविधि से सम्भव नहीं है।
- इस प्रविधि से गहन अध्ययन सम्भव नहीं होता है।
उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर, आप सहभागी व असहभागी अवलोकन में निम्न अन्तर स्पष्ट
कर सकते हैं : –
तक पहुँच कर समूह का गहन, आन्तरिक एवं सूक्ष्म अध्ययन कर सकता है। इसके विपरीत
असहभागी अवलोकन से समूह के केवल बाहरी व्यवहार का अध्ययन सम्भव हो सकता है।
गोपनीय सूचनायें प्राप्त नहीं की जा सकती हैं।
कर रच बस जाता है एवं उसके क्रिया कलापों में सक्रियता से भाग लेता है। असहभागी
अवलोकन में अवलोकनकर्त्ता की स्थिति एक अपरिचित की रहती हैय अर्थात् वह अध्ययन समूह
से पृथक व तटस्थ रह कर अध्ययन करता है।
सूचनाओं की शुद्धता की जाँच कर सकता है, जबकि अहसभागी अवलोकन में अवलोकनकर्त्ता
कभी-कभी या घटनाओं के घटने की सूचना मिलने पर ही अध्ययन समूह में जाता
है। अत:, अवलोकित घटनाओं की पुर्नपरीक्षा सम्भव नहीं हो पाती है।
घुलमिल जाता है। अत:, घटनाओं का अवलोकन उनके सरल एवं स्वाभाविक रूप में सम्भव
होता है जबकि असहभागी अवलोकन में अवलोकनकर्त्ता के एक अपरिचित व्यक्ति के रूप में होने
के कारण लोग उसे शंका एवं संदेह की दृष्टि से देखते हैं। अत:, स्वाभाविक मानवीय व्यवहार
का अध्ययन सम्भव नहीं होता है।
अवलोकनकर्त्ता को लम्बे समय तक अध्ययन समूह में रहना पड़ता है। इसकी तुलना में
असहभागी अवलोकन में समय व धन तुलनात्मक रूप से कम खर्च होता हैं।
5. अर्द्धसहभागी अवलोकन
इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुये, गुडे एवं हॉट ने मध्यम मार्ग को अपनाने का सुझाव दिया है।
अर्थात्, अर्द्धसहभागी अवलोकन, सहभागी एवं असहभागी अवलोकन दोनों का समन्वय है। इस
प्रकार के अवलोकन में अवलोकनकर्त्ता परिस्थिति, आवश्यकता और घटनाओं की प्रकृति के
56
अनुसार कभी अध्ययन समूह में सहभागिता निभाते हुए सूचनायें एकत्रित करता है, और कभी
उससे पूर्णतया पृथक रह कर एक मूक दर्शक के रूप में सूचनायें एकत्रित करता है।
दृष्टिकोण अव्यावहारिक रहा है। एक वर्ग के साथ एकीकरण से उसका सम्बन्ध अन्य वर्गों से समाप्त
हो जाता है। अत: अर्द्ध-सहभागिता अधिक संभव होने के साथ ही उपयुक्त भी प्रतीत होती है।’’
6. सामूहिक अवलोकन
विषय-विशेषज्ञों द्वारा अवलोकन किया जाता है, स्पष्ट है कि सामूहिक अवलोकन में अवलोकन
का कार्य क व्यक्तियों के माध्यम से किया जाता है। इन सभी अवलोकनकर्त्ताओं में कार्य को
बाँट दिया जाता है, और उनके कार्यों का समन्वय एक केन्द्रीय संगठन द्वारा किया जाता है।
स्वभाव व विचारों के अध्ययन हेतु किया गया था। 1944 में जमैका में स्थानीय दशाओं के
अध्ययन हेतु भी इस विधि का प्रयोग किया गया था। यह प्रविधि खर्चीली होने के साथ-साथ कुशल
प्रशासन भी चाहती है। इसी वजह से इस विधि का प्रयोग व्यक्ति के बजाय सरकारी या अर्द्ध
सरकारी संस्थानों द्वारा अधिक किया जाता है।
सामूहिक अवलोकन के गुण-
- यह अध्ययन की सहकारी एवं अन्तर- अनुशासकीय विधि है।
- इसमें अध्ययन विश्वसनीय एवं निष्पक्ष होता है।
- व्यक्तिगत पक्षपात की सम्भावना नहीं होती है।
- इसमें नियन्त्रित एवं अनियन्त्रित अवलोकन विधियों का मिश्रण होता है।
- इसमें व्यापक क्षेत्र का अध्ययन सम्भव है।
- गहन अध्ययन एवं पुन: परीक्षण सम्भव है।
सामूहिक अवलोकन की सीमाएँ –
- एक से अधिक कुशल अवलोकन कर्त्ताओं को जुटा पाना कठिन कार्य है।
- विभिन्न अवलोकनकर्त्ताओं के कार्यों में परस्पर समन्वय व सन्तुलन बनाया जाना आसान नहÈ
है। - वांछित मात्राओं में समय, धन एवं परिश्रम की व्यवस्था कर पाना आसान नहÈ है।
- इस प्रविधि का प्रयोग प्राय: सरकारी संगठनों के द्वारा ही अधिक संभव है।
अवलोकन की उपयोगिता
अन्तर्गत स्पष्ट कर सकते हैं-
विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती है।
हूबहू विवरण प्रस्तुत करता है। अत: वैषयिकता बनी रहती है।
के कारण घटनाओं के प्रति नवीन विचारों एवं उपकल्पनाओं की उत्पत्ति होती है, जो भावी अनुसन्धान का
आधार बनती है।
लोकप्रिय पद्धति है।
अवलोकन पद्धति सीमायें
जैसे-
- पति-पत्नि के व्यक्तिगत व व्यावहारिक जीवन का अवलोकन
- कुछ घटनाओं के
घटित होने का समय व स्थान का निश्चित ना होना। जैसे पति-पत्नि की कलह, साह-बहू का
तकरार। - अमूर्त घटनायें, जैसे, व्यक्ति के विचार, भावनायें, मनोदशा आदि।
हटकर नाटकीय व्यवहार करते हैं। परिणामस्वरूप सही निष्कर्ष नहीं निकल पाते हैं।
कर पाती है।
कारण अध्ययन में पक्षपात आने की सम्भावना रहती है।
होती हैं जबकि अवलोकन में ज्ञानेन्द्रियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसी स्थिति में अध्ययन
प्रभावित होता है।
अवलोकन की विशेषताएँ
1. प्रत्यक्ष पद्धति- सामाजिक अनुसंधान की दो पद्धितियॉ हैं- प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष। अवलोकन सामाजिक अनुसंधान की प्रत्यक्ष पद्धति है, जिसमें अनुसंधानकर्ता सीधे अध्ययन वस्तु को देखता है और निष्कर्ष निकालता है।
अवलोकन की प्रक्रिया
अवलोकन सोच समझ कर की जाने वाली क्रमबद्ध प्रक्रिया है। अत: अवलोकन प्रारम्भ करने से पूर्व, अवलोकनकर्त्ता अवलोकन के प्रत्येक चरण को सुनिश्चित कर लेता है।
- Goode and Hot, 1952, Methods in Social Research, Mack Grow Hill Company, Inc. Tokyo.
- Moser, CA, Survey Methods in Social Investigation.
- Young, PV, Scientific Social Survey and Research.
- Jahoda and Cook, Research methods in social relations.
- Mann Ph., Methods of Sociological Inquiry.
