अनुक्रम
पर रखना नियुक्ति कहलाता है। इसमें कर्मचारियों का प्रशिक्षण एवं विकास भी शामिल
है।
नियुक्तिकरण का अर्थ
नियुक्तिकरण की आवश्यकता
- योग्य कर्मचारी प्राप्त करना :- यह विभिन्न पदों के लिए योग्य कर्मचारियों को खोजने में सहायता करता है।
- बेहतर निष्पादन :- सही व्यक्ति को सही स्थान पर रखकर यह बेहतर निष्पादन को निश्चित करता है।
- निरन्तर विकास :- उचित नियुक्तिकरण उपक्रम के निरन्तर विकास को सुनिश्चित करता है।
- मानव संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग :- यह आवश्यकता से अधिक कर्मचारियों को रखने से बचाता है। उच्च श्रम लागत को रोकने में सहायक है।
- कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाता है :- यह कर्मचारियों के कार्य सन्तोष में सुधार करता है।
नियुक्ति का महत्व
संस्था प्रमुख नीतियों का निर्धारण करते है जिसकी पूर्ति हेतु वहां के कर्मचारी ही
कार्य करते हैं अत: समय पर कर्मचारियों की नियुक्ति आवश्यक है।
प्राप्त होता है। साथ ही उसे अच्छा वातावरण व अच्छी परिस्थितियों में कार्य करने
का अवसर प्राप्त होता है, जिससे आय में वृद्धि होती है और जीवन-स्तर में
सुधार आता है। वही दूसरी ओर प्रशिक्षण और अनुभव/ज्ञान की प्राप्ति होती है,
जिससे मानसिक क्षमता भी बढ़ता है।
सम्बन्धित कार्य होते है, जिसे उच्च प्रबंध को या कुछ कमर्चारियों द्वारा पूर्ण करना
सम्भव नहीं होता है अत: इसे पूर्ण करने के लिए कमर्चारियों की नियुक्ति आवश्यक है।
मानवीय श्रम शक्ति का महत्व कभी भी कम नहीं हो सकता है। मानव मानसिक,
योग्यता, बुद्धि, कला-कौशल व ज्ञान का समूचित उपयोग हो और इसके लिए
स्टाफिंग महत्वपूर्ण है।
कर्मचारी किसी संस्था में एकत्र होते हैं। और वे अपने अनुभव योग्यता व कला से
संस्था की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करते है।
रहने वाले लोगों को रोजगार मिलता है और रोजगार मिलने से परिवार का और
फिर समाज का स्तर सुधरता है। इससे सामाजिक अशांति का खतरा कम हो
जाता है।
कर्तव्य है कि वह सम्पूर्ण समाज में सुख, शांति, रोजगार व उपभोग योग्य वस्तुएँ
उपलब्ध कराए, जो स्टॉफिंग से पूर्ण होता है।
- प्रशिक्षण संस्थाओं की स्थापना होती है।
- उपक्रम के आकार में वृद्धि होती है।
- मानवीय विकास होता है।
- राष्ट्रीय स्तर में वस्तु की गुणवत्ता में सुधार व लागत में कमी आती
है।
नियुक्तिकरण की प्रक्रिया
नियुक्तिकरण की प्रक्रिया को मानव शक्ति नियोजन भी कहते हैं इसमें सर्वप्रथम
संगठन के लिए कर्मचारियों के प्रकार और संख्या का निर्धारण किया जाता है तत्पश्चात्
भर्ती प्रक्रिया जिसमें मानव संशाधनों की खोज की जाती है इसके पश्चात् परीक्षा,
साक्षात्कार द्वारा उचित व्यक्ति का चयन और उसकी नियुक्ति दी जाती है फिर उस
वातावरण से परिचय कराया जाता है जिसमें उन्हें कार्य करना है साथ ही पारिश्रमिक
संबंधी नियम, पदोन्नति, स्थानान्तरण आदि की भी जानकारी दी जाती हैं।
1. मानव शक्ति आवश्यकताओं का आकलन- इसमें निम्नलिखित शामिल है:-
- सबसे पहले इस बात का पता लगाना कि कितनी संख्या में तथा किस प्रकार के कर्मचारी संस्था में उपलब्ध है।
- यह निर्धारित किया जाता है कि संस्था को कितने एवं किस प्रकार के कर्मचारियों की आवश्यकता है।
- मानव शक्ति आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कार्यक्रम तैयार करना। कार्यभार विश्लेषण मानव शक्ति आवश्यकताओं को समझने के लिए उपयुक्त है।
2. भरती- यह वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत मानव शक्ति की उपलब्धता के विभिन्न स्रोतों से संभावित कर्मचारियों की खोज की जाती है तथा उन्हें संस्था में प्रार्थना-पत्र भेजने हेतु प्रोत्साहित किया जाता है।
चयन : इसके अंतर्गत विभिन्न कार्यों के लिए योग्य प्रार्थियों को चुना जाता है जिसके लिए रोजगार, परीक्षाएँ लेना, साक्षात्कार एवं चिकित्सीय जाँच शामिल है।